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अंत्येष्टि स्थल के विवाद में दो वर्ग आए आमने सामने
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रमऊ गांव में अंत्येष्टि स्थल का विवाद सुलझाते एसडीएम, तहसीलदार व सीओ। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
राजपुर। रमऊ गांव में वृद्धा की मौत के बाद परिजन बस्ती के पास अंत्येष्टि स्थल में अंतिम संस्कार करने लगे तो दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध किया। इससे टकराव की नौबत आ गई। जानकारी पर पहुंचे एसडीएम व सीओ ने पैमाइश कराई। अंतिम संस्कार किए जा रहे स्थान पर अंत्येष्टि स्थल अभिलेखों में भी दर्ज मिला। इसके बाद वहीं अंतिम संस्कार किया गया।
कानपुर ग्वालटोली की ममता देवी (90) करीब 35 वर्षों से बेटी कांता देवी के यहां रमऊ गांव में रह रही थीं। मंगलवार को उनकी मौत हो गई। दामाद मन्नीराम अन्य परिजनों के साथ अंतिम संस्कार के लिए शव को अंत्येष्टि स्थल पर ले गए। पूर्व प्रधान कलाम अली, निजाम अली व वाजिद अली ने बस्ती के पास अंतिम संस्कार करने पर ऐतराज जताया। ये बात गांव में पहुंची तो दूसरे समुदाय के लोग एकत्र हो गए। सूचना पर एसडीएम रमेश चंद्र, सीओ रविकांत गौड़ पहुुंच गए। वृद्धा का जिस स्थान पर अंतिम संस्कार किया जा रहा था वहां की पैमाइश कराई गई। राजस्व अभिलेखों में वह स्थान अंत्येष्टि स्थल के रूप में ही दर्ज मिला।
ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि पहले अंत्येष्टि स्थल गांव के बाहर था, अब लोगों ने वहां आसपास घर बना लिए हैं। इससे बस्ती नजदीक हो गई है लेकिन वह जगह अंत्येष्टि स्थल के लिए चिह्नित है। एसओ कपिल दुबे ने बताया कि पैमाइश के बाद विवाद खत्म हो गया है। शव का अंतिम संस्कार भी हो गया है।
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अंत्येष्टि स्थल की जमीन को लेकर विवाद की सूचना पर पैमाइश कराई गई। पूरे रकबा की पैमाइश के लिए टीम गठित की गई है। जो निर्माण अंत्येष्टि स्थल की जमीन में पाए जाएंगे। उन्हें ढहाकर जमीन को खाली कराया जाएगा।-रमेश चंद्र यादव, एसडीएम सिकंदरा
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कानपुर ग्वालटोली की ममता देवी (90) करीब 35 वर्षों से बेटी कांता देवी के यहां रमऊ गांव में रह रही थीं। मंगलवार को उनकी मौत हो गई। दामाद मन्नीराम अन्य परिजनों के साथ अंतिम संस्कार के लिए शव को अंत्येष्टि स्थल पर ले गए। पूर्व प्रधान कलाम अली, निजाम अली व वाजिद अली ने बस्ती के पास अंतिम संस्कार करने पर ऐतराज जताया। ये बात गांव में पहुंची तो दूसरे समुदाय के लोग एकत्र हो गए। सूचना पर एसडीएम रमेश चंद्र, सीओ रविकांत गौड़ पहुुंच गए। वृद्धा का जिस स्थान पर अंतिम संस्कार किया जा रहा था वहां की पैमाइश कराई गई। राजस्व अभिलेखों में वह स्थान अंत्येष्टि स्थल के रूप में ही दर्ज मिला।
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ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि पहले अंत्येष्टि स्थल गांव के बाहर था, अब लोगों ने वहां आसपास घर बना लिए हैं। इससे बस्ती नजदीक हो गई है लेकिन वह जगह अंत्येष्टि स्थल के लिए चिह्नित है। एसओ कपिल दुबे ने बताया कि पैमाइश के बाद विवाद खत्म हो गया है। शव का अंतिम संस्कार भी हो गया है।
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अंत्येष्टि स्थल की जमीन को लेकर विवाद की सूचना पर पैमाइश कराई गई। पूरे रकबा की पैमाइश के लिए टीम गठित की गई है। जो निर्माण अंत्येष्टि स्थल की जमीन में पाए जाएंगे। उन्हें ढहाकर जमीन को खाली कराया जाएगा।-रमेश चंद्र यादव, एसडीएम सिकंदरा