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‘जब तक सूरज चांद रहेगा, श्ाहीद तेरा नाम रहेगा’
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 04 Dec 2014 03:07 AM IST
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वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा...। देश के सपूत सीआरपीएफ के शहीद डिप्टी कमांडेंट बीएस वर्मा को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए बुधवार को उनके गांव खाड़ेपुर में जन सैलाब उमड़ पड़ा।
तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव की सीमा में लाया गया, हाथों में तिरंगा लिए हजारों हाथ कंधा देने के लिए दौड़ पड़े। जब तक सूरज चांद रहेगा, वर्मा तेरा नाम रहेगा...शहीद वर्मा अमर रहें...भारत माता की जय...के नारे लगाते हुए हुजूम आगे बढ़ा।
हर आंख नम थी...लेकिन शहादत पर फख्र करते हुए सिर भी गर्व से ऊंचा था। गॉर्ड ऑफ ऑनर देने के बाद बेटे रवि वर्मा ने शहीद को मुखाग्नि दी।
छत्तीसगढ़ के नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट बीएस वर्मा के अंतिम दर्शन के लिए दूरदराज से भी लोग आए। दोपहर बाद तीन बजे फूल-मालाओं से सजी गाड़ी में तिरंगे से लिपटा पार्थिव शरीर गांव के भीतर पहुंचा तो एक झलक देखने के लिए सब गाड़ियों के साथ भागते रहे।
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गलियां-छतें लोगों से पटी पड़ी थीं। किसी ने फूल मालाओं से नमन किया तो कोई हाथ जोड़कर खड़ा रहा। पार्थिव शरीर को जैसे ही घर की चौखट पर लाया गया...पापा...हाय पापा!...क्यों छोड़ कर चले गए...हम अनाथ हो गए... करुण क्रंदन से गांव गूंज उठा।
बच्चों का क्रंदन लोगों की आंखों को नम कर गया। डिप्टी कमांडेंट के वृद्ध पिता की पथराई आंखें जवान बेटे के शव को एकटक निहार रही थीं। मां बेसुध हो चुकी थीं।
11 महीने पहले हुई मां की मौत का गम झेल रही पुत्री पिता के शव को देख बदहवास हो चुकी थी। काफी देर से अपने दिल को मजबूत किए बेटा, शहीद पिता को खामोश लेटे देख टूट-सा गया।
हिम्मत करके कभी बहन को संभालता तो कभी बाबा, दादी को। श्रद्धांजलि स्थल पर चलने की बात सुनते ही बेटा रवि फफक पड़ा। जिनके कंधे पर बैठकर घूमा, आज उन्हीं को कंधा देने जा रहा था। भारी हुजूम के साथ पिता को श्रद्धांजलि स्थल पर लाया गया।
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तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव की सीमा में लाया गया, हाथों में तिरंगा लिए हजारों हाथ कंधा देने के लिए दौड़ पड़े। जब तक सूरज चांद रहेगा, वर्मा तेरा नाम रहेगा...शहीद वर्मा अमर रहें...भारत माता की जय...के नारे लगाते हुए हुजूम आगे बढ़ा।
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हर आंख नम थी...लेकिन शहादत पर फख्र करते हुए सिर भी गर्व से ऊंचा था। गॉर्ड ऑफ ऑनर देने के बाद बेटे रवि वर्मा ने शहीद को मुखाग्नि दी।
छत्तीसगढ़ के नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट बीएस वर्मा के अंतिम दर्शन के लिए दूरदराज से भी लोग आए। दोपहर बाद तीन बजे फूल-मालाओं से सजी गाड़ी में तिरंगे से लिपटा पार्थिव शरीर गांव के भीतर पहुंचा तो एक झलक देखने के लिए सब गाड़ियों के साथ भागते रहे।
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गलियां-छतें लोगों से पटी पड़ी थीं। किसी ने फूल मालाओं से नमन किया तो कोई हाथ जोड़कर खड़ा रहा। पार्थिव शरीर को जैसे ही घर की चौखट पर लाया गया...पापा...हाय पापा!...क्यों छोड़ कर चले गए...हम अनाथ हो गए... करुण क्रंदन से गांव गूंज उठा।
बच्चों का क्रंदन लोगों की आंखों को नम कर गया। डिप्टी कमांडेंट के वृद्ध पिता की पथराई आंखें जवान बेटे के शव को एकटक निहार रही थीं। मां बेसुध हो चुकी थीं।
11 महीने पहले हुई मां की मौत का गम झेल रही पुत्री पिता के शव को देख बदहवास हो चुकी थी। काफी देर से अपने दिल को मजबूत किए बेटा, शहीद पिता को खामोश लेटे देख टूट-सा गया।
हिम्मत करके कभी बहन को संभालता तो कभी बाबा, दादी को। श्रद्धांजलि स्थल पर चलने की बात सुनते ही बेटा रवि फफक पड़ा। जिनके कंधे पर बैठकर घूमा, आज उन्हीं को कंधा देने जा रहा था। भारी हुजूम के साथ पिता को श्रद्धांजलि स्थल पर लाया गया।