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Kanpur News: लेजर से संभव है समलबाई का इलाज
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कानपुर। ऑफ्थेल्मिक सोसाइटी के बैनर तले रविवार को समलबाई मूल्यांकन मास्टर क्लास का आयोजन किया गया। बताया गया कि लेजर से समलबाई (ग्लूकोमा) का इलाज संभव है। विषय विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि आंखों के बाहरी चैंबर में रास्ता बंद होने से पानी भरने लगता है। इससे आंख का प्रेशर बढ़ जाता है। लेजर से बंद रास्ता खोल दिया जाता है जिससे प्रेशर कम होता है और आंख की रोशनी बच जाती है।
बेनाझाबर स्थित एक होटल में आयोजित मास्टर क्लास में 50 नेत्र विशेषज्ञों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश ऑफ्थेलमिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. मलय चतुर्वेदी और मुख्य संयोजक डॉ. शालिनी मोहन रहीं। कानपुर ऑफ्थेल्मिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. मनीष महेंद्रा ने समलबाई जैसे दिखने वाले डिस्क की पहचान की सूक्ष्मताओं को बताया। लखनऊ की डॉ. श्वेता त्रिपाठी ने समलबाई की निगरानी के लिए ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी तकनीक की प्रस्तुति दी। डॉ. रीना शर्मा ने विजुअल फील्ड की त्रुटियों के बारे में बताया। प्रत्येक सत्र में क्विज हुआ। सत्रों का संचालन डॉ. आकाश शर्मा, डॉ. सुकांत पांडेय, डॉ. ईना बुधिराजा, डॉ. आकांक्षा और डॉ. लोकेश अरोड़ा ने किया।
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बेनाझाबर स्थित एक होटल में आयोजित मास्टर क्लास में 50 नेत्र विशेषज्ञों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश ऑफ्थेलमिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. मलय चतुर्वेदी और मुख्य संयोजक डॉ. शालिनी मोहन रहीं। कानपुर ऑफ्थेल्मिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. मनीष महेंद्रा ने समलबाई जैसे दिखने वाले डिस्क की पहचान की सूक्ष्मताओं को बताया। लखनऊ की डॉ. श्वेता त्रिपाठी ने समलबाई की निगरानी के लिए ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी तकनीक की प्रस्तुति दी। डॉ. रीना शर्मा ने विजुअल फील्ड की त्रुटियों के बारे में बताया। प्रत्येक सत्र में क्विज हुआ। सत्रों का संचालन डॉ. आकाश शर्मा, डॉ. सुकांत पांडेय, डॉ. ईना बुधिराजा, डॉ. आकांक्षा और डॉ. लोकेश अरोड़ा ने किया।
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