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Kanpur News: दो विभागों के बीच फंसी छात्रवृत्ति घोटाले की जांच
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ऋषि तिवारी
इटावा। वर्ष 2008-09 में जिले के विद्यालयों में छात्रवृत्ति घोटाला का मामला सामने आया था। इसमें 65 विद्यालयों में फर्जी छात्र संख्या दर्ज कर छात्रवृत्ति हड़पने के मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की कानपुर यूनिट की ओर से की जा रही है। वर्ष 2019 में इससे जुड़े 154 लोगों पर रिपोर्ट भी दर्ज की जा चुकी है। तीन माह पूर्व ईओडब्ल्यू की ओर से डीआईओएस को पत्र भेजकर घोटाले से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी। डीआईओएस कार्यालय की ओर से बेसिक शिक्षा विभाग को उपरोक्त जानकारी देने की बात कही गई। लेकिन तीन महीने बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अपराध शाखा को कोई जानकारी नहीं दी गई है। तीन महीने से बेसिक शिक्षा विभाग और डीआईओएस कार्यालय के बीच जांच फंसी है।
23 जून 2025 को ईओडब्ल्यू की जांच टीम ने डीआईओएस को पत्र भेजकर 65 विद्यालयों की सूची भेजी थी। इसमें प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों का डाटा मांगा गया था। डीआईओएस ने 18 जुलाई 2025 को इन 65 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों को पत्र जारी किया था। इसमें शैक्षिक सत्र वर्ष 2008-09 में नियुक्त रहे प्रबंधक व प्रधानाचार्य का नाम, पिता का नाम, वर्तमान पता, नियुक्ति अवधि व मोबाइल नंबर की जानकारी मांगी थी। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया था। जांच में पता चला कि ये सभी विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित थे, इस पर डीआईओएस कार्यालय की ओर से उपरोक्त जानकारी बीएसए कार्यालय से मांगने की संस्तुति की गई। लगभग तीन महीने का समय बीत गया है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक ईओडब्ल्यू को कोई भी अभिलेख उपलब्ध ही नहीं करवाए गए हैं। ऐसे में उक्त जांच में रुकावट पैदा हो रही है। हालांकि विभागीय लोगों का कहना है कि इन विद्यालयों के संबंध में जांच प्रक्रिया गतिमान है।
यह था पूरा मामला
शैक्षिक सत्र 2008-09 के दौरान कक्षा एक से 10 तक के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग, सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं की अलग-अलग स्कूलों में फर्जी संख्या दर्शा कर छात्रवृत्ति घोटाला किए जाने की बात सामने आई थी। इस मामले में 6 मई 2010 को शासन ने ईओडब्ल्यू को जांच सौंपी थी। प्रारंभिक जांच के दौरान करोड़ों के घोटाले की पुष्टि हुई और स्कूलों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई। नौ वर्ष चली जांच के बाद वर्ष फरवरी 2019 में इन 65 स्कूलों के 154 लोगों के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें कॉलेजों के प्रधानाचार्यों के अलावा मैनेजर और कई अन्य लोग भी शामिल थे। इसमें 14.61 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाला होने की बात सामने आई थी। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी, बीएसए, बीईओ, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सहित कई आला अधिकारी शामिल थे।
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जिम्मेदार आमने-सामने
बेसिक के थे सभी विद्यालय
1.मामला पुराना है। ईओडब्ल्यू की ओर से जो जानकारी मांगी गई थी, उसके संबंध में संबंधित विद्यालयों से पत्राचार किया गया, लेकिन बाद में पता चला कि सभी विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित है। ऐसे में उपरोक्त जानकारी संबंधित विभाग ही जुटा सकता है।
अतुल कुमार सिंह, डीआईओएस
चल रही जांच, जल्द दी जाएगी जानकारी
2.छात्रवृत्ति घोटाला को लेकर ईओडब्ल्यू की ओर से जो जानकारी मांगी गई थी। इसके लिए जांच कमेटी बनाई गई है, कमेटी अपना काम कर रही है। जल्द ही जांच पूरी होकर सभी अभिलेख ईओडब्ल्यू को सौंपे जाएंगें।
डॉ. राजेश कुमार, बीएसए
उपलब्ध नहीं हुए वांछित अभिलेख
वर्ष 2008-09 छात्रवृत्ति घोटाला प्रकरण में चार एफआईआर लिखे गए थे। चारों विवेचनाएं ईओडब्ल्यू को सौंपी गईं थीं, जांचे चल रही है। जून माह में जो अभिलेख मांगे गए थे वह अभी तक उपलब्ध नहीं हुए है। हालांकि इसके लिए फिर से पत्र भेजकर जानकारी मांगी जाएगी।
दिवाकर उपाध्याय, निरीक्षक/विवेचक, ईओडब्ल्यू/ सीआईडी, कानपुर
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इटावा। वर्ष 2008-09 में जिले के विद्यालयों में छात्रवृत्ति घोटाला का मामला सामने आया था। इसमें 65 विद्यालयों में फर्जी छात्र संख्या दर्ज कर छात्रवृत्ति हड़पने के मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की कानपुर यूनिट की ओर से की जा रही है। वर्ष 2019 में इससे जुड़े 154 लोगों पर रिपोर्ट भी दर्ज की जा चुकी है। तीन माह पूर्व ईओडब्ल्यू की ओर से डीआईओएस को पत्र भेजकर घोटाले से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी। डीआईओएस कार्यालय की ओर से बेसिक शिक्षा विभाग को उपरोक्त जानकारी देने की बात कही गई। लेकिन तीन महीने बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अपराध शाखा को कोई जानकारी नहीं दी गई है। तीन महीने से बेसिक शिक्षा विभाग और डीआईओएस कार्यालय के बीच जांच फंसी है।
23 जून 2025 को ईओडब्ल्यू की जांच टीम ने डीआईओएस को पत्र भेजकर 65 विद्यालयों की सूची भेजी थी। इसमें प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों का डाटा मांगा गया था। डीआईओएस ने 18 जुलाई 2025 को इन 65 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों को पत्र जारी किया था। इसमें शैक्षिक सत्र वर्ष 2008-09 में नियुक्त रहे प्रबंधक व प्रधानाचार्य का नाम, पिता का नाम, वर्तमान पता, नियुक्ति अवधि व मोबाइल नंबर की जानकारी मांगी थी। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया था। जांच में पता चला कि ये सभी विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित थे, इस पर डीआईओएस कार्यालय की ओर से उपरोक्त जानकारी बीएसए कार्यालय से मांगने की संस्तुति की गई। लगभग तीन महीने का समय बीत गया है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक ईओडब्ल्यू को कोई भी अभिलेख उपलब्ध ही नहीं करवाए गए हैं। ऐसे में उक्त जांच में रुकावट पैदा हो रही है। हालांकि विभागीय लोगों का कहना है कि इन विद्यालयों के संबंध में जांच प्रक्रिया गतिमान है।
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यह था पूरा मामला
शैक्षिक सत्र 2008-09 के दौरान कक्षा एक से 10 तक के अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग, सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं की अलग-अलग स्कूलों में फर्जी संख्या दर्शा कर छात्रवृत्ति घोटाला किए जाने की बात सामने आई थी। इस मामले में 6 मई 2010 को शासन ने ईओडब्ल्यू को जांच सौंपी थी। प्रारंभिक जांच के दौरान करोड़ों के घोटाले की पुष्टि हुई और स्कूलों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई। नौ वर्ष चली जांच के बाद वर्ष फरवरी 2019 में इन 65 स्कूलों के 154 लोगों के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें कॉलेजों के प्रधानाचार्यों के अलावा मैनेजर और कई अन्य लोग भी शामिल थे। इसमें 14.61 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाला होने की बात सामने आई थी। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी, बीएसए, बीईओ, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सहित कई आला अधिकारी शामिल थे।
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बेसिक के थे सभी विद्यालय
1.मामला पुराना है। ईओडब्ल्यू की ओर से जो जानकारी मांगी गई थी, उसके संबंध में संबंधित विद्यालयों से पत्राचार किया गया, लेकिन बाद में पता चला कि सभी विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित है। ऐसे में उपरोक्त जानकारी संबंधित विभाग ही जुटा सकता है।
अतुल कुमार सिंह, डीआईओएस
चल रही जांच, जल्द दी जाएगी जानकारी
2.छात्रवृत्ति घोटाला को लेकर ईओडब्ल्यू की ओर से जो जानकारी मांगी गई थी। इसके लिए जांच कमेटी बनाई गई है, कमेटी अपना काम कर रही है। जल्द ही जांच पूरी होकर सभी अभिलेख ईओडब्ल्यू को सौंपे जाएंगें।
डॉ. राजेश कुमार, बीएसए
उपलब्ध नहीं हुए वांछित अभिलेख
वर्ष 2008-09 छात्रवृत्ति घोटाला प्रकरण में चार एफआईआर लिखे गए थे। चारों विवेचनाएं ईओडब्ल्यू को सौंपी गईं थीं, जांचे चल रही है। जून माह में जो अभिलेख मांगे गए थे वह अभी तक उपलब्ध नहीं हुए है। हालांकि इसके लिए फिर से पत्र भेजकर जानकारी मांगी जाएगी।
दिवाकर उपाध्याय, निरीक्षक/विवेचक, ईओडब्ल्यू/ सीआईडी, कानपुर