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कानपुर: फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का मामला, एप के जरिये विदेशी खातों में होता था लेनदेन
Tue, 02 Feb 2021 09:16 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 02 Feb 2021 09:16 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
कानपुर में रेलबाजार में पकड़े गए फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज के मामले में कुछ खास एप के जरिये विदेशी खातों में लेनदेन किया गया। पुलिस ने जब आरोपियों के खाते खंगाले तो पता चला कि एप से करेंसी एक्सचेंज होती थी। मामले में पुलिस पहले ही चार्जशीट लगा चुकी है।
अब टेलीकॉम कंपनी ने अपने स्तर से जांच शुरू की है। अक्तूबर 2020 खुफिया विभाग के इनपुट पर सर्विलांस टीम ने रेलबाजार से जावेद और शहनवाज को गिरफ्तार किया था। दोनों फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज संचालित कर सस्ती दरों पर आईएसडी कॉल करवाते थे।
विदेश से आरोपियों के कनेक्शन का खुलासा हुआ था। जांच अधिकारी के मुताबिक आरोपियों के छह बैंक खातों में लाखों रुपये मिले थे। इसमें विदेश से भी ट्रांजेक्शन की पुष्टि हुई थी। जांच में पता चला कि पेपल जैसे एप के जरिये लेनदेन होता था।
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इसमें संबंधित व्यक्ति अपने देश की करेंसी जमा कर सकते हैं और दूसरी तरफ जिसके खाते में रकम जाती है वह अपने देश की करेंसी में पैसे हासिल कर सकता है। इसके अलावा बरामद 151 सिम फर्जी आईडी पर मिले थे। ये सभी प्री एक्टिवेटेड थे। इसमें टेलीकॉम कंपनी के एजेंट की बड़ी भूमिका होने की संभावना है।
इसलिए टेलीकॉम कंपनी के अफसरों ने भी जांच शुरू कर दी है। रेलबाजार थाने पहुंचकर मामले की पूरी जानकारी ली। सिम की आईडी आदि भी जुटाईं। जांच पूरी होने के बाद कंपनी के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
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अब टेलीकॉम कंपनी ने अपने स्तर से जांच शुरू की है। अक्तूबर 2020 खुफिया विभाग के इनपुट पर सर्विलांस टीम ने रेलबाजार से जावेद और शहनवाज को गिरफ्तार किया था। दोनों फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज संचालित कर सस्ती दरों पर आईएसडी कॉल करवाते थे।
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विदेश से आरोपियों के कनेक्शन का खुलासा हुआ था। जांच अधिकारी के मुताबिक आरोपियों के छह बैंक खातों में लाखों रुपये मिले थे। इसमें विदेश से भी ट्रांजेक्शन की पुष्टि हुई थी। जांच में पता चला कि पेपल जैसे एप के जरिये लेनदेन होता था।
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इसमें संबंधित व्यक्ति अपने देश की करेंसी जमा कर सकते हैं और दूसरी तरफ जिसके खाते में रकम जाती है वह अपने देश की करेंसी में पैसे हासिल कर सकता है। इसके अलावा बरामद 151 सिम फर्जी आईडी पर मिले थे। ये सभी प्री एक्टिवेटेड थे। इसमें टेलीकॉम कंपनी के एजेंट की बड़ी भूमिका होने की संभावना है।
इसलिए टेलीकॉम कंपनी के अफसरों ने भी जांच शुरू कर दी है। रेलबाजार थाने पहुंचकर मामले की पूरी जानकारी ली। सिम की आईडी आदि भी जुटाईं। जांच पूरी होने के बाद कंपनी के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है।