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राज्यपाल के खिलाफ परिवाद दर्ज कराने को अर्जी
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Tue, 03 Nov 2015 02:24 AM IST
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राज्यपाल राम नाईक और राज्यपाल की प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर के खिलाफ सीएमएम विजय कुमार द्वितीय की कोर्ट में परिवाद दर्ज कराने के लिए अर्जी दी गई है। इन दोनों पर राष्ट्रगान बीच में रुकवाने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने परिवाद दर्ज करने पर फैसला सुरक्षित कर लिया है।
एडवोकेट अविनाश कटियार ने कोर्ट में दी अर्जी में कहा है कि 31 अक्तूबर को न्यूज चैनल पर उत्तर प्रदेश सरकार का मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण समारोह देख रहे थे। समारोह खत्म होने के समय राष्ट्रगान की धुन शुरू हुई तो गांधी सभागार राज्य भवन लखनऊ में मौजूद सभी व्यक्ति राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होकर राष्ट्रगान गाने लगे। तभी राज्यपाल की प्रमुख सचिव ने राज्यपाल से
कुछ कहा और राज्यपाल ने हाथ से इशारा कर राष्ट्रगान की धुन रोकने को कहा। राज्यपाल के इशारे को मानते हुए बैंड वालों ने राष्ट्रगान की धुन रोक दी। यह राष्ट्रगान का अपमान है। अधिवक्ता ने बताया कि परिवाद दर्ज करने पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट मंगलवार को फैसला सुना सकती है।
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तीन साल तक की सजा ः राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत धारा तीन में राष्ट्रगान के अपमान पर सजा का प्राविधान है। इसके तहत तीन साल तक कैद और जुर्माना अथवा दोनों दिया जा सकता है। अगर दूसरी बार भी अपमान किया जाता है तो हर बार 1 वर्ष की सजा और होगी। सजा पाने वाले को 6 साल तक किसी भी तरह का चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होगा।
दर्ज कराया था शिवपाल के खिलाफ परिवाद ः अविनाश कटियार ने तत्कालीन सदन प्रतिपक्ष के नेता शिवपाल सिंह यादव और विधायक इरफान सोलंकी समेत कई सपा नेताओं के खिलाफ 18 अक्तूबर 2010 को तिरंगा केक काटने पर परिवाद दर्ज कराया था। पुलिस में भी रिपोर्ट लिखाई थी। यह दोनों मामले एक साथ चले थे। बाद में अधिवक्ता ने परिवाद नॉट प्रेस (पैरवी के लिए बल न देना) कर लिया था। शासन ने अभियोजन से यह मुकदमा वापस लेने को कहा था। अभियोजन की पैरवी के बाद कोर्ट ने मुकदमा वापसी पर अपना फैसला सुनाया था।
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एडवोकेट अविनाश कटियार ने कोर्ट में दी अर्जी में कहा है कि 31 अक्तूबर को न्यूज चैनल पर उत्तर प्रदेश सरकार का मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण समारोह देख रहे थे। समारोह खत्म होने के समय राष्ट्रगान की धुन शुरू हुई तो गांधी सभागार राज्य भवन लखनऊ में मौजूद सभी व्यक्ति राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होकर राष्ट्रगान गाने लगे। तभी राज्यपाल की प्रमुख सचिव ने राज्यपाल से
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कुछ कहा और राज्यपाल ने हाथ से इशारा कर राष्ट्रगान की धुन रोकने को कहा। राज्यपाल के इशारे को मानते हुए बैंड वालों ने राष्ट्रगान की धुन रोक दी। यह राष्ट्रगान का अपमान है। अधिवक्ता ने बताया कि परिवाद दर्ज करने पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट मंगलवार को फैसला सुना सकती है।
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तीन साल तक की सजा ः राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत धारा तीन में राष्ट्रगान के अपमान पर सजा का प्राविधान है। इसके तहत तीन साल तक कैद और जुर्माना अथवा दोनों दिया जा सकता है। अगर दूसरी बार भी अपमान किया जाता है तो हर बार 1 वर्ष की सजा और होगी। सजा पाने वाले को 6 साल तक किसी भी तरह का चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होगा।
दर्ज कराया था शिवपाल के खिलाफ परिवाद ः अविनाश कटियार ने तत्कालीन सदन प्रतिपक्ष के नेता शिवपाल सिंह यादव और विधायक इरफान सोलंकी समेत कई सपा नेताओं के खिलाफ 18 अक्तूबर 2010 को तिरंगा केक काटने पर परिवाद दर्ज कराया था। पुलिस में भी रिपोर्ट लिखाई थी। यह दोनों मामले एक साथ चले थे। बाद में अधिवक्ता ने परिवाद नॉट प्रेस (पैरवी के लिए बल न देना) कर लिया था। शासन ने अभियोजन से यह मुकदमा वापस लेने को कहा था। अभियोजन की पैरवी के बाद कोर्ट ने मुकदमा वापसी पर अपना फैसला सुनाया था।