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UP Election 2022: जिंदा होने का सुबूत जुटाने के लिए भरा विधायकी का पर्चा, परिवार ने बताया था मृत
Thu, 03 Feb 2022 03:57 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 03 Feb 2022 03:57 PM IST
सार
जनसंघ पार्टी से नामांकन दाखिल करने वाले संतोष मूरत ने पर्चा खारिज होने के बाद एसीएम कोर्ट के बहार धरना प्रदर्शन किया। करीब 10 मिनट तक चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत कराया और जिला निर्वाचन अधिकारी से समस्या बताने को कहा गया।
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संतोष सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
परिवार की ओर से कागजों में मृत दर्शाए गए संतोष मूरत सिंह ने महाराजपुर विधानसभा सीट से पर्चा इसलिए दाखिल किया ताकि वे खुद के जिंदा होने के सुबूत जुटा सकें। हालांकि जांच के बाद उनका पर्चा निरस्त कर दिया गया।
विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में नाम न होने के साथ ही कई कॉलम उन्होंने अधूरे छोडे़ थे। जनसंघ पार्टी से नामांकन दाखिल करने वाले संतोष मूरत ने पर्चा खारिज होने के बाद एसीएम कोर्ट के बहार धरना प्रदर्शन किया। करीब 10 मिनट तक चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत कराया और जिला निर्वाचन अधिकारी से समस्या बताने को कहा गया।
संतोष कुमार बनारस के चौबेपुर के रहने वाले है। उन्होंने बताया कि वे मुंबई में फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर के यहां रसोइया थे। उनके माता-पिता के निधन के बाद रिश्तेदारों ने मुंबई में 2003 में हुए बम ब्लास्ट में उन्हें मृत बताकर 18 बीघा जमीन कब्जा ली है।
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तब से वे अपने जिंदा होने का सुबूत दे रहे लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं। पिछले पांच साल से वे जंतर मंतर में इस बात को लेकर धरना भी दे रहे हैं। इसके अलावा अलग-अलग शहरों में जाकर खुद के जिंदा होने का सुबूत दे रहे हैं।
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विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में नाम न होने के साथ ही कई कॉलम उन्होंने अधूरे छोडे़ थे। जनसंघ पार्टी से नामांकन दाखिल करने वाले संतोष मूरत ने पर्चा खारिज होने के बाद एसीएम कोर्ट के बहार धरना प्रदर्शन किया। करीब 10 मिनट तक चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत कराया और जिला निर्वाचन अधिकारी से समस्या बताने को कहा गया।
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संतोष कुमार बनारस के चौबेपुर के रहने वाले है। उन्होंने बताया कि वे मुंबई में फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर के यहां रसोइया थे। उनके माता-पिता के निधन के बाद रिश्तेदारों ने मुंबई में 2003 में हुए बम ब्लास्ट में उन्हें मृत बताकर 18 बीघा जमीन कब्जा ली है।
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तब से वे अपने जिंदा होने का सुबूत दे रहे लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं। पिछले पांच साल से वे जंतर मंतर में इस बात को लेकर धरना भी दे रहे हैं। इसके अलावा अलग-अलग शहरों में जाकर खुद के जिंदा होने का सुबूत दे रहे हैं।