प्रधानमंत्री बोले- नमामि गंगे से ‘अर्थ-गंगा’ की ओर बढ़ने का समय, खुद भी दिया आर्थिक सहयोग
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पहली राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा को विकास की धारा से जोड़ने की दिशा में नई पहल की है। उन्होंने गंगा से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर फोकस करते हुए ‘नमामि गंगे’ को ‘अर्थ गंगा’ के रूप में परिवर्तित करने की बात कही।
उन्होंने कहा, गंगा में पेपर मिलों से गिर रहा कचरा बंद हो गया है। कानपुर में गिर रहे 16 में से 13 नाले रोक दिए गए हैं, टेनरियों से नदी में जा रहा प्रदूषण कम हो गया है।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे पीएम ने नमामि गंगा परियोजना का विश्लेषण करते हुए कहा, गंगा भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे पवित्र नदी है। इसका कायाकल्प साझे प्रयासों का उदाहरण होना चाहिए। 2014 में शुरू हुई नमामि गंगा परियोजना विभिन्न सरकारी विभागों के नदी में प्रदूषण रोकने, उसके संरक्षण और सुधार के साझे प्रयासों से काफी कुछ हासिल किया गया है।
हालांकि काफी काम होना है। मोदी ने नदी में प्रदूषण नियंत्रण पर निगरानी के लिए ‘गंगा समितियों’ का प्रभाव सभी जिलों में बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही निर्देश दिए कि डिजिटल डैशबोर्ड बनाया जाए, जिसमें गंगा किनारे मौजूद गांव-शहरों से जुटाया जा रहा डाटा अपडेट होगा। इस डाटा की नीति आयोग और जल शक्ति मंत्रालय रोजाना निगरानी करेंगे।
चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में शनिवार को हुई इस बैठक में उप्र के सीएम योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, गजेंद्र सिंह शेखावत, डॉ. हर्षवर्धन, आरके सिंह, प्रह्लाद पटेल, मनसुख मांडविया और हरदीप सिंह मौजूद व कई अधिकारी मौजूद थे। पीएम मोदी ने नमामि गंगे से जुड़े कामों, गंगा बैराज पर बने अटल घाट और क्रूज का भी अवलोकन किया।
सतत विकास का मॉडल ऐसा होगा
खुद पीएम मोदी ने गंगा से जुड़ा सतत विकास का मॉडल सामने रखते हुए कहा कि अर्थ-गंगा में गंगा के किनारे आर्थिक गतिविधियों के लिए केंद्रित है। नदी किनारे वॉटर स्पोर्ट्स, कैंप के लिए जगहों के विकास, साइकिलिंग व वॉकिंग ट्रैक आदि का विकास करना होगा।
इसके लिए पूर्व सैनिकों व स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जा सकती है। किसानों को जीरो बजट कृषि, नदी किनारे फलों के पेड़ व नर्सरियां लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
गंगा में धार्मिक गतिविधियों संग हाइब्रिड पर्यटन
उन्होंने कहा कि गंगा के किनार हाइब्रिड पर्यटन यानी नई तरह से विकसित एडवेंचर पर्यटन की भारी क्षमता रखते हैं। यह और ‘गंगा वन्यजीव संरक्षण व क्रूज पर्यटन’ यहां पारंपरिक तौर पर की जाने वाली धार्मिक गतिविधियों के साथ आगे बढ़ाए जा सकते हैं।
इनसे लोगों को आय होगी। यह गंगा की सफाई के लिए सतत फंड जमा करने में मददगार होगा। उन्हाेंने फिर एक बार जोर देकर कहा कि गंगा की ‘स्वच्छता, अविरलता और निर्मलता’ के लिए लोगों और सभी समुदायों को जागरुक करने और साथ लाने की जरूरत है।
खुद मोदी ने किया आर्थिक सहयोग
सरकार ने क्लीन गंगा फंड भी बनाया है, जिसमें कॉरपोरेट और एनआरआई से लेकर आम नागरिक भी गंगा कायाकल्प केे लिए आर्थिक मदद कर रहे हैं। खुद पीएम ने 2014 से स्वयं को मिले पुरस्कारों सहित सियोल शांति पुरस्कार के जरिए 16.53 करोड़ रुपये फंड में दिया है।
नमामि गंगे परियोजना
2014 में शुरू की गई। 2015 से 2020 गंगा के कायाकल्प पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होने हैं। अब तक 7700 करोड़ रुपये लगे। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने पर सबसे ज्यादा काम हुआ।