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595 का टिकट, मजदूरों से वसूले 900 तक

Sun, 10 May 2020 12:54 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 10 May 2020 12:54 AM IST
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ticket 595,  take 900 rupee
प्रवासी मजदूरों को उनके गृह जनपद भेजने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र से आने वाली ट्रेनों के श्रमिकों से वसूली पर सवाल खड़े हुए हैं। श्रमिकों का कहना है कि सरकारों ने जो नोडल एजेंसियां नामित की हैं, उनके प्रतिनिधि ही टिकट किराये नाम पर वसूली कर रहे हैं। शनिवार को गुजरात के मोरबी से एक स्पेशल ट्रेन दोपहर पौने तीन बजे 1198 मजदूरों को लेकर आई। यहां तक का टिकट 595 रुपये का था लेकिन श्रमिकों ने बताया कि उनसे 800 से 900 रुपये तक लिए गए हैं। रोडवेज की 45 बसों से 24 जिलों के लोग थर्मल स्क्रीनिंग के बाद भेजे गए। इसमें सबसे ज्यादा फतेहपुर जिले के लोग थे, जो 12 बसों से रवाना हुए।
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बिना वसूली लिस्ट में नाम ही नहीं आता
गुजरात से आने वाले जानकार लोगों और रेलवे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि टिकट के नाम पर जो रुपये मजदूरों से लिए जा रहे हैं, उसके पीछे एक नेटवर्क काम कर रहा है। इसमें वह लोग भी शामिल हैं, जिनके प्रतिष्ठानों में यूपी-बिहार के या दूसरे राज्यों के प्रवासी मजदूर काम करते हैं। यदि किसी फैक्ट्री में 150 मजदूर काम करते हैं, तो उस फैक्ट्री के मालिक से राज्य सरकार की ओर से नामित की गई नोडल एजेंसियों के प्रतिनिधि संपर्क करते हैं। उन्हें अपने यहां काम करने वालों की लिस्ट दी जती है, जिनके नाम दिए जाते हैं, उनको ही ट्रेन से आने का मौका मिलता है। स्वयं से प्रयास करने वालों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है। जिन फैक्ट्री मालिकों को लगता है कि उनके मजदूर वापस आएंगे, उनका किराया वह स्वयं ही भर देता है। जबकि ज्यादातर मजदूरों की जल्द वापसी की उम्मीद न होने से लिस्ट के मुताबिक टिकट का किराया और उससे ज्यादा वसूली की जा रही है। इस पूरे मामले की जांच होने पर घपलेबाज पकड़े जा सकते हैं।
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बातचीत
मोरबी में बड़ी संख्या में मजदूर आना चाहते हैं। सब कामगार हैं, इसलिए किराया सभी बचाकर रखते हैं, लेकिन टिकट से ज्यादा वसूली हो रही है। 595 की जगह 900 रुपये देकर आया हूं।
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- प्रिंस सिंह, महाराजगंज
वेल्डिंग का काम करता हूं। बहुत दिनों से वापस आना चाहता था। पैदल-साइकिल से आना मुनासिब नहीं समझा। इसलिए इंतजार किया, अब ट्रेन से आया हूं।
- हरेंद्र, देवरिया
खाने-पीने की मुश्किल हो गई थी। रुपये खत्म हो चुके थे। एक हजार रुपये सेठ से उधार लिया और बस में बैठने से पहले मोरबी में 900 रुपये दे दिया।
- जितेंद्र कुमार, बांदा
पान की फैक्ट्री में काम करता हूं। कारोबार एक महीने से ज्यादा समय से बंद है। 595 रुपये के टिकट के बदले 900 रुपये वसूलने पर बताया गया था कि 300 रुपये का ट्रेन में खाना-पानी मिलेगा।
- अविनाश कमार, देवरिया
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