"मोदीजी के वादे के मुताबिक 15 लाख की पहली किस्त साढ़े 3 लाख रुपये आ गई", अब सब झाड़ रहे पल्ला
- महिला के खाते में गलती से पहुंचे साढ़े तीन लाख, बोली, ये तो मोदी जी ने दिए
- सेवानिवृत्त नगर निगम कर्मी के रुपये ट्रांसफर में हुई गड़बड़ी
- तमिलनाडु की महिला के खाते में पहुंचे रुपये
- 10 महीने से अपनी रकम के लिए भटक रहा है पीड़ित
- तकनीक पेंच के मामले में है अनोखा मामला, सब झाड़ रहे पल्ला
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आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- ऐसे हुई चूक ...
नगर निगम से भेजी गई सूचना में रमेश का खाता इलाहाबाद बैंक वाला ही था। नगर निगम के सिस्टम में तकनीक गड़बड़ी के कारण उनका खाता और नाम सही रहा पर माइकर और आईएफएस कोड एसबीआई का चला गया। रमेश और महिला के अकाउंट नंबर भी एक जैसे थे। यहां ध्यान नहीं दिया गया और रकम दूसरे के खाते में चली गई।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- माइनर कोड नहीं मिलाया ...
सूत्रों के मुताबिक, भुगतान के समय सभी जानकारी के बाद रुपये ट्रांसफर होते हैं लेकिन क्लीयरिंग हाउस कर्मियों ने अकाउंट नंबर तो देखा पर नाम, माइकर कोड का मिलान किए बगैर ही भुगतान कर दिया।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- जिम्मेदारों के बयान...
-रोहित कांत मिश्रा, प्रबंधक शाखा परिचालन, एसबीआई मोतीझील
मामले में बैंकिं ग लोकपाल, एसबीआई, आरबीआई तक में बात की गई है। हालांकि अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है लेकिन विभाग उनका भुगतान करवाएगा। जरूरत पड़ी तो नगर निगम कार्यकारिणी समिति में मामला लाकर भुगतान होगा।
-रमेश चंद्र निरंजन, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, नगर निगम कानपुर