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कानपुर देहात में तीन लाख किसान, फसल बीमा सिर्फ 25 हजार का
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कानपुर देहात में तैयार आलू की फसल। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। मौसम की मार से किसानों को निजात दिलाने के लिए भले ही सरकार ने फसल बीमा योजना चला रखी है, लेकिन इसकी जानकारी आम किसानों तक नहीं है। जिसके चलते किसानों की एक बड़ी आबादी इस योजना से वंचित रह जाती है।
हालत यह है कि जिले में तीन लाख किसानों के सापेक्ष अभी तक 25502 किसानों ने ही जन सेवा केंद्रों के माध्यम से फसलों का बीमा कराया है। केवल 25 किसान ही खुद से ऑनलाइन आवेदन कर सके हैं। जबकि रबी फसलों का बीमा कराने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर है।
जिले में हर साल बरसात के महीने में यमुना, सेंगुर, रिंद समेत अन्य नदी-नाले उफनाने के कारण बड़े पैमाने पर किसानों की फसलों को नुकसान होता है। बीते खरीफ सीजन की बात करें तो बारिश के चलते नदियों में उफान से भोगनीपुर, सिकंदरा समेत अन्य ब्लाकों की 27 ग्राम पंचायतों में फसलों का नुकसान हुआ था।
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किसानों की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरूआत की गई थी। जिसके तहत खेत मालिक किसानों के साथ-साथ बटाईदार व सह खातेदार को भी लाभ देने की व्यवस्था है।
इसके लिए किसानों को फसलों का बीमा कराकर प्रीमियम का भुगतान करना होता है, लेकिन इसकी जानकारी न होने से लाखों किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कृषि आंकड़ों की माने तो जिले में कुल तीन लाख किसान पंजीकृत हैं।
जिन्हें पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा है। वहीं, करीब एक लाख के आसपास केसीसी धारक हैं, लेकिन अभी तक 25502 किसानों ने ही जनसेवा केंद्रों के माध्यम से फसलों का बीमा कराया है। इसके पीछे किसानों को योजना की जानकारी न होने की बात सामने आ रही है।
किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों में कैंप लगाकर फसल बीमा योजना के प्रति लगातार जानकारी दी जाती है। अगर फिर भी किसानों को दिक्कत होती है तो वह कार्यालय व उनसे संपर्क कर सकते हैं। - डॉ. उमेश कुमार गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी
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हालत यह है कि जिले में तीन लाख किसानों के सापेक्ष अभी तक 25502 किसानों ने ही जन सेवा केंद्रों के माध्यम से फसलों का बीमा कराया है। केवल 25 किसान ही खुद से ऑनलाइन आवेदन कर सके हैं। जबकि रबी फसलों का बीमा कराने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर है।
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जिले में हर साल बरसात के महीने में यमुना, सेंगुर, रिंद समेत अन्य नदी-नाले उफनाने के कारण बड़े पैमाने पर किसानों की फसलों को नुकसान होता है। बीते खरीफ सीजन की बात करें तो बारिश के चलते नदियों में उफान से भोगनीपुर, सिकंदरा समेत अन्य ब्लाकों की 27 ग्राम पंचायतों में फसलों का नुकसान हुआ था।
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किसानों की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरूआत की गई थी। जिसके तहत खेत मालिक किसानों के साथ-साथ बटाईदार व सह खातेदार को भी लाभ देने की व्यवस्था है।
इसके लिए किसानों को फसलों का बीमा कराकर प्रीमियम का भुगतान करना होता है, लेकिन इसकी जानकारी न होने से लाखों किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कृषि आंकड़ों की माने तो जिले में कुल तीन लाख किसान पंजीकृत हैं।
जिन्हें पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा है। वहीं, करीब एक लाख के आसपास केसीसी धारक हैं, लेकिन अभी तक 25502 किसानों ने ही जनसेवा केंद्रों के माध्यम से फसलों का बीमा कराया है। इसके पीछे किसानों को योजना की जानकारी न होने की बात सामने आ रही है।
किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों में कैंप लगाकर फसल बीमा योजना के प्रति लगातार जानकारी दी जाती है। अगर फिर भी किसानों को दिक्कत होती है तो वह कार्यालय व उनसे संपर्क कर सकते हैं। - डॉ. उमेश कुमार गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी