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Kanpur News: कंबल के लिए खुले आसमान के नीचे सोने वाले, इन्हें इस हाल में छोड़ने वाले दोनों बेपरवाह
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ठंड में सड़क पर कंबल ओढ़े लेटे लोग।
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर। सर्द रात में बर्फीली हवाओं के बीच मजदूरी करने वाले लोग कंबल और गरम कपड़े पाने की मजबूरी में अपनी जान की परवाह भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे लोग शहर के चाैराहों, फुटपाथों पर खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं। इनकी यह लालच इनकी जान पर बन सकती है, लेकिन यदि ठंड से इन लोगों की जान जाती है तो प्रशासन के लिए भी यह मुश्किल भरा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन और सड़क पर सोने वाले दोनों अपनी जिम्मेदारी से बेपरवाह हैं। अमर उजाला की रविवार और साेमवार की आधी रात में की गई पड़ताल में इसी तरह का नजारा दिखा है।
पिछले दिनों जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की ओर से संबंधित विभागीय अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी गई थी कि कोई भी व्यक्ति सड़क पर सर्द रात में सोते हुए नहीं मिलना चाहिए। सभी को उठाकर आसपास के रैन बसेरों में ले जाना है। जिससे उन्हें कोई दिक्कत न होने पाए। साथ ही रैन बसेरों के केयर टेकरों को भी निर्देश दिया गया था कि यदि कोई यहां रहने वालों से पैेसे की मांग करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। लेकिन सभी निर्देश हवा हवाई बनकर रहे गए।
लाटूस रोड पर दिनभर मेहनत करने वाले मजदूर दुकानें बंद होने के बाद रात को चौराहे पर जल रहे अलाव के पास सो जाते हैं। बांदा के रहने वाले मजदूर शिवचरण ने बताया कि किराए के मकान में रहने के लिए उनके पास पैसे नहीं है। बताते हैं कि सड़क पर सोने से रात में कपड़े या अन्य मदद मिल जाती है। इसी तरह संत नगर चौराहे पर हरदोई के मनोज कुमार और लाल तिवारी ट्रक के नीचे कंबल ओढ़कर रात गुजारते मिले। उनका कहना है कि रैन बसेरों में रुकने के लिए अक्सर पैसे मांगे जाते हैं, इसलिए यहीं सो जाते हैं और सुबह काम पर चले जाते हैं।
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इसी तरह फजलगंज छोटा चौराहा स्थित प्राइमरी विद्यालय के नीचे उर्मिला व परिवार से जुड़े दूसरे लोग भी कंबल लपेटे कांपते हुए मिले। उन्होंने बताया कि उनके पास सोने के लिए यही जगह बची है। दिन भर काम करते फिर यहीं आकर सो जाते हैं। किसी तरह रात गुजर जाती है। आए दिन ठंडी में लोग कंबल और कुछ खाने की चीजें भी दे जाते हैं। जिससे गुजर हो रहा है। बताया कि आसपास रैन बसेरा कहा है काैन पता करे।
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पिछले दिनों जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की ओर से संबंधित विभागीय अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी गई थी कि कोई भी व्यक्ति सड़क पर सर्द रात में सोते हुए नहीं मिलना चाहिए। सभी को उठाकर आसपास के रैन बसेरों में ले जाना है। जिससे उन्हें कोई दिक्कत न होने पाए। साथ ही रैन बसेरों के केयर टेकरों को भी निर्देश दिया गया था कि यदि कोई यहां रहने वालों से पैेसे की मांग करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। लेकिन सभी निर्देश हवा हवाई बनकर रहे गए।
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लाटूस रोड पर दिनभर मेहनत करने वाले मजदूर दुकानें बंद होने के बाद रात को चौराहे पर जल रहे अलाव के पास सो जाते हैं। बांदा के रहने वाले मजदूर शिवचरण ने बताया कि किराए के मकान में रहने के लिए उनके पास पैसे नहीं है। बताते हैं कि सड़क पर सोने से रात में कपड़े या अन्य मदद मिल जाती है। इसी तरह संत नगर चौराहे पर हरदोई के मनोज कुमार और लाल तिवारी ट्रक के नीचे कंबल ओढ़कर रात गुजारते मिले। उनका कहना है कि रैन बसेरों में रुकने के लिए अक्सर पैसे मांगे जाते हैं, इसलिए यहीं सो जाते हैं और सुबह काम पर चले जाते हैं।
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इसी तरह फजलगंज छोटा चौराहा स्थित प्राइमरी विद्यालय के नीचे उर्मिला व परिवार से जुड़े दूसरे लोग भी कंबल लपेटे कांपते हुए मिले। उन्होंने बताया कि उनके पास सोने के लिए यही जगह बची है। दिन भर काम करते फिर यहीं आकर सो जाते हैं। किसी तरह रात गुजर जाती है। आए दिन ठंडी में लोग कंबल और कुछ खाने की चीजें भी दे जाते हैं। जिससे गुजर हो रहा है। बताया कि आसपास रैन बसेरा कहा है काैन पता करे।