{"_id":"66afcb9f4fa165ce3f077aa4","slug":"there-is-an-influx-of-shiva-devotees-in-hidimbeshwar-mahadev-temple-etawa-news-c-216-1-etw1004-114507-2024-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: हिडिंबेश्वर महादेव मंदिर में शिवभक्तों का लगता तांता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: हिडिंबेश्वर महादेव मंदिर में शिवभक्तों का लगता तांता
विज्ञापन
फोटो 05
सोमवार विशेष ::
सब्दलपुर के बीहड़ में स्थित मंदिर में भीम और उनकी पत्नी हिडिंबा ने शिवलिंग की स्थापना की थी
संवाद न्यूज एजेंसी
बकेवर। लवेदी क्षेत्र के ग्राम सब्दलपुर के बीहड़ में स्थित हमीरपुरा महादेव मंदिर पर श्रावण मास में शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहां शिवलिंग की स्थापना महाभारत काल में भीम और उनकी पत्नी हिडिंबा ने की थी। यहां पूजन से मन्नत पूरी होती है, इसीलिए श्रावण मास या महाशिवरात्रि या फिर सोमवार का दिन,यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
हमीरपुरा का प्राचीन शिवमंदिर लखना चकरनगर मार्ग पर लखना से तीन किमी दूर सब्दलपुर गांव के पीछे बीहड़ में इकनौर गांव के पास स्थित है। हमीरपुरा वाले के नाम से प्रसिद्ध हिडिंबेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर सावन के सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
फर्रुखाबाद के श्रृंगीरामपुर से गंगाजल लेकर इस मंदिर पर कांवड़ चढ़ाने आते हैं। मंदिर के महंत बाबा सुरजनदास बताते हैं कि इस स्थान का महत्व महाभारत में वर्णित किया गया है। इसका उल्लेख इष्टकापुरी के नाम से आया है। कहते हैं कि लाक्षागृह की घटना के बाद जब पांडव अज्ञातवास के लिए विचरण करने लगे तो पांडव के चार भाई व मां कुंती एक पेड़ के नीचे भूखे-प्यासे सो रहे थे और भीम पहरा दे रहे थे।
विज्ञापन
पास ही में एक पेड़ पर भाई हिडिंब और उसकी बहन हिडिंबा रह रहे थे। पांडवों को खाने के लिए उन्होंने उन पर आक्रमण किया, वहां युद्ध में हिडिंब मारा गया। भीम की वीरता देख हिडिंबा उन पर मोहित हो गई। भीम और हिडिंबा ने गंधर्व विवाह इसी स्थान पर किया।
पुत्र की अभिलाषा से दोनों ने भगवान शंकर की आराधना करके शिवलिंग की स्थापना की। भोलेनाथ की कृपा से उनके घटोत्कच नाम का महाबली पुत्र हुआ। इसके बाद से लगातार इस मंदिर की प्रसिद्धी बढ़ती गई और अब सावन व महाशिवरात्रि को मंदिर पर जनपद समेत अन्य जिलों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना करने आते हैं।
विज्ञापन
सोमवार विशेष ::
सब्दलपुर के बीहड़ में स्थित मंदिर में भीम और उनकी पत्नी हिडिंबा ने शिवलिंग की स्थापना की थी
संवाद न्यूज एजेंसी
बकेवर। लवेदी क्षेत्र के ग्राम सब्दलपुर के बीहड़ में स्थित हमीरपुरा महादेव मंदिर पर श्रावण मास में शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहां शिवलिंग की स्थापना महाभारत काल में भीम और उनकी पत्नी हिडिंबा ने की थी। यहां पूजन से मन्नत पूरी होती है, इसीलिए श्रावण मास या महाशिवरात्रि या फिर सोमवार का दिन,यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
हमीरपुरा का प्राचीन शिवमंदिर लखना चकरनगर मार्ग पर लखना से तीन किमी दूर सब्दलपुर गांव के पीछे बीहड़ में इकनौर गांव के पास स्थित है। हमीरपुरा वाले के नाम से प्रसिद्ध हिडिंबेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर सावन के सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
विज्ञापन
फर्रुखाबाद के श्रृंगीरामपुर से गंगाजल लेकर इस मंदिर पर कांवड़ चढ़ाने आते हैं। मंदिर के महंत बाबा सुरजनदास बताते हैं कि इस स्थान का महत्व महाभारत में वर्णित किया गया है। इसका उल्लेख इष्टकापुरी के नाम से आया है। कहते हैं कि लाक्षागृह की घटना के बाद जब पांडव अज्ञातवास के लिए विचरण करने लगे तो पांडव के चार भाई व मां कुंती एक पेड़ के नीचे भूखे-प्यासे सो रहे थे और भीम पहरा दे रहे थे।
विज्ञापन
पास ही में एक पेड़ पर भाई हिडिंब और उसकी बहन हिडिंबा रह रहे थे। पांडवों को खाने के लिए उन्होंने उन पर आक्रमण किया, वहां युद्ध में हिडिंब मारा गया। भीम की वीरता देख हिडिंबा उन पर मोहित हो गई। भीम और हिडिंबा ने गंधर्व विवाह इसी स्थान पर किया।
पुत्र की अभिलाषा से दोनों ने भगवान शंकर की आराधना करके शिवलिंग की स्थापना की। भोलेनाथ की कृपा से उनके घटोत्कच नाम का महाबली पुत्र हुआ। इसके बाद से लगातार इस मंदिर की प्रसिद्धी बढ़ती गई और अब सावन व महाशिवरात्रि को मंदिर पर जनपद समेत अन्य जिलों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना करने आते हैं।