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Kanpur News: संयुक्त चिकित्सालय में नहीं आग से बचाव के इंतजाम

Mon, 27 May 2024 11:19 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Mon, 27 May 2024 11:19 PM IST
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There are no fire prevention arrangements in the joint hospital.
इटावा। दिल्ली के अस्पताल में आग लगने से सात नवजातों की जलकर मौत हो गई। इसमें अस्पताल संचालक की लापरवाही भीसामने आई है। दिल्ली की तरह ही बिना मानकों के जिले में भी बड़ी संख्या में नर्सिंगहोम संचालित हैं। इनमें से कई के पास तो लाइसेंस ही नहीं हैं। 35 ऐसे निजी अस्पताल हैं जिनके पास अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं है।
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सबकुछ जानकर भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं। सबसे बड़ी लापरवाही तो संयुक्त चिकित्सालय में है। यहां जिला पुरुष और महिला दोनों जगह आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं है। कई बार नोटिस के बाद भी जिम्मेदार बेफिक्र हैं।
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शहर में संयुक्त चिकित्सालय संचालित है। इसमें जिला पुरुष अस्पताल के साथ ही महिला अस्पताल भी चल रहा है। दोनों ही अस्पतालों में प्रतिदिन लगभग डेढ़ से दो हजार मरीज ओपीडी में दिखाने आते हैं। बड़ी संख्या में मरीज भर्ती भी हैं। इसके बावजूद यहां आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं है।
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दिल्ली में बड़ा हादसा होने के बाद सोमवार को अमर उजाला ने अस्पतालों में आग बुझाने के इंतजामों की पड़ताल की तो जिला पुरुष अस्पताल में फायर सिलिंडर तो लगे मिले, लेकिन अन्य कोई भी उपकरण नहीं है। वहीं सौ शैया महिला अस्पताल में उपकरण गायब हैं। वहीं सिलिंडर भी एक्सपायर लगा हुआ है।
ऐसे में यदि दोनों अस्पतालों में कोई बड़ा अग्निकांड होता है तो अग्निशमन टीम के भरोसे ही सारी व्यवस्थाएं रहेंगी। अग्निशमन विभाग के अनुसार, 2019 से 2023 तक जिला संयुक्त चिकित्सालय के जिम्मेदारों को लगभग 17 नोटिस दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद उपकरणों को दुरुस्त नहीं कराया गया है।
जिम्मेदारों ने दिया रटारटाया बयान
जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि सभी तलों पर फायर सिलिंडर लगे हैं। अन्य उपकरणों को भी जल्द ही लगवाया जाएगा। जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उपकरण सही कराने और सिलिंडर रिफिल कराने के लिए संबंधित फर्म को निर्देशित किया गया है। जल्द ही व्यवस्था दुरुस्त न कराए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।


35 नर्सिंगहोम में भर्ती मरीजों की जान जोखिम में रहती

जिले में 93 निजी अस्पताल पिछली साल पंजीकृत थे। इनमें से 35 निजी अस्पतालों के पास लंबे समय से दमकल विभाग की एनओसी नहीं है। मानक पूरे न होने के बावजूद यह अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं। इन्हें हर साल दमकल विभाग की ओर से नोटिस जारी करके अपनी ड्यूटी तो पूरी कर दी जाती है, लेकिन इसके बाद न तो फिर दमकल के अधिकारी और न ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान देते हैं। इन अस्पतालों प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज भर्ती होते हैं।



वर्जन


जिला अस्पताल प्रबंधन को अग्निशमन उपकरण पूरे लगाने के लिए कई बार नोटस दिया जा चुका है। इसके बावजूद वहां इंतजाम पूरे नहीं किए गए हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। फिर से अवगत कराया जाएगा। वहीं लगभग 35 निजी अस्पताल ऐसे संचालित हैं, जिनके पास एनओसी नहीं है। उन्हें भी लगातार नोटिस दिया जा रहा है। संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा। - तबारक हुसैन, सीएफओ



अस्पतालों के लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। अब उन्हीं अस्पतालों का रिन्यूल किया जाएगा जिनके पास भी मानक होंगे। सभी को दमकल विभाग की एनओसी लेना जरूरी है। तभी उन्हें लाइसेंस दिया जाएगा। जिनके पास एनओसी नहीं होगा उनका लाइसेंस रद्द करने के लिए कार्रवाई कराई जाएगी। - डॉ. गीताराम सीएमओ
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