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Kanpur News: विवाद के बहाने बाहर निकला एनआरएचएम घोटाले का जिन्न

Fri, 20 Jun 2025 01:31 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Jun 2025 01:31 AM IST
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The spirit of NRHM scam came out on the pretext of controversy
कानपुर। डीएम-सीएमओ विवाद के बीच एक बार फिर वर्ष 2010-11 में हुए एनआरएचएम घोटाले का जिन्न बाहर आ गया है। इस घोटाले में फंसी फर्म एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई। सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी का कहना है कि एनआरएचएम घोटाले में फंसी इस फर्म को सीबीआई ने बाकायदा चार्जशीट किया है। इसके साथ ही इससे जुड़े लोग जेल भी जा चुके हैं। यह फर्म ब्लैक लिस्टेड है।
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जेएम फार्मा फर्म की स्वास्थ्य विभाग में पहले भी सप्लाई रही है। डॉ. नेमी का कहना है कि इस फर्म को कार्य दिया ही नहीं जाना चाहिए। एनआरएचएम घोटाले में स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी घेरे में आ चुके हैं। इस मामले में तीन सीएमओ से जांच एजेंसियों की ओर से अलग-अलग पूछताछ भी हुई। इसके अलावा सीबीआई यहां तत्कालीन एनआरएचएम के डिप्टी सीएमओ को उठा कर ले गई। बाद में लखनऊ में बयान दर्ज करने के बाद उन्हें छोड़ा था। तत्कालीन सीएमओ डॉ. एके मिश्रा से भी इस संबंध में ब्योरा लिया जा चुका है।
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डीएम-सीएमओ का विवाद उभरने के बाद एनआरएचएम घोटाले की फाइल का लाल फीता एक बार फिर खुल सकता है। इससे घोटाले से जुड़े नए पहलू सामने आ सकते हैं, जिसकी वजह से कुछ अधिकारी सीबीआई के रडार पर आ जाएंगे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक एनआरएचएम घोटाले का मामला शांत होने के बाद फर्मों ने दांव-पेच करके फिर से विभाग में सप्लाई का काम ले लिया। अधिकारियों ने उनके कार्य में सहयोग दिया। ऐसे अधिकारियों का पुराना रिकॉर्ड जांच एजेंसियां नए सिरे से खंगाल सकती हैं, जिससे नए मामले सामने आ सकते हैं। डॉ. नेमी का कहना है कि जेएम फार्मा ने जो सामान सप्लाई किया है, उसके बैच नंबर का मिलान नहीं हो पा रहा है। इसी तरह जब जांच एजेंसियों ने वर्ष 2010-11 में यहां स्टोर और लैब के सामान की जांच की तो बैच नंबर में फर्क आया। इसके साथ ही सामान की कीमत में भी दोगुना और तीन गुना का फर्क रहता है। जांच एजेंसियां अभिलेखों के आंकड़ों और वास्तव में की गई मेडिकल उपकरणों और लैब के सामान की खरीद में फर्क की गड़बड़ी भी पकड़ी जा चुकी है।
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