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खोदा और पाटा, 220 करोड़ का घाटा
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 06 Dec 2014 01:36 AM IST
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शहर में घर-घर तक सरकारी पानी पहुंचाने की परियोजना समय से पूरी नहीं होने से इसकी लागत 220.06 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
यह योजना कब पूरी होगी? कोई बताने वाला नहीं है। हालात देखते हुए लग रहा है कि अभी लागत और बढ़ेगी।
जेएनएनयूआरएम के तहत छह साल पहले (जनवरी 2008) में शुरू हुई जलापूर्ति परियोजना मई 2012 में पूरी हो जानी थी, पर अभी तक बमुश्किल 80 प्रतिशत ही काम हुआ है।
अब परियोजना को पूरा करने की नई डेडलाइन मार्च 2015 तय की गई है, पर इस बार भी तय तिथि में काम पूरा हो पाने और अगले साल भी शहरवासियों को पर्याप्त पानी मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
इस वजह से जहां एक ओर धनहानि हो रही है, वहीं दूसरी ओर परियोजनाएं पूरी न होने के कारण शहर के सभी घरों में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
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ऊपर से लगभग सात साल से इस परियोजना और गहरी सीवर लाइन के लिए जगह - जगह हो रही खुदाई और धूल उड़ने से लोगों का राह चलना मुश्किल हो गया है।
सर्वोदय नगर, साकेत नगर, काकादेव, मकरावर्टगंज समेत कई मोहल्लों में खुदे गड्ढों के आसपास मानकों के अनुरूप शटरिंग न होने से आए दिन हादसे भी होते रहते हैं।
पानी की कहानी
-50 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर के हर घर में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी (पेयजल) पहुंचाने की परियोजना
-जलापूर्ति परियोजना फेस-1, जनवरी 2008 की अनुमानित लागत 270.95 करोड़ रुपये थी
-फेस-2 मई, 2008 की अनुमानित लागत 377.93 करोड़ रुपये थी।
-यह जलापूर्ति परियोजनाएं मई 2012 में पूरी होनी थीं, पर अभी तक कार्य पूरा नहीं
कार्य अधूरा रहने की वजह से कार्य की अनुमानित लागत 220.06 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
पहले पैसा मिलने में देरी हुई। अब संशोधित लागत का जीओ हो गया है और शासन से धन भी रिलीज हो गया है, पर अभी तक मिला नहीं है।
पहले की कंपनी काम छोड़कर गई है। दोबारा टेंडर कराना पड़ा। इससे भी काम लेट हुआ। जिला प्रशासन कोआपरेट करता है, फिर भी त्यौहार आदि की वजह से खुदाई रोकनी पड़ती है।
इन्हीं वजहों से काम लेट हो गया है। अब तय समयावधि में काम पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
भारत सिंह, अधीक्षण अभियंता, जल निगम
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यह योजना कब पूरी होगी? कोई बताने वाला नहीं है। हालात देखते हुए लग रहा है कि अभी लागत और बढ़ेगी।
जेएनएनयूआरएम के तहत छह साल पहले (जनवरी 2008) में शुरू हुई जलापूर्ति परियोजना मई 2012 में पूरी हो जानी थी, पर अभी तक बमुश्किल 80 प्रतिशत ही काम हुआ है।
अब परियोजना को पूरा करने की नई डेडलाइन मार्च 2015 तय की गई है, पर इस बार भी तय तिथि में काम पूरा हो पाने और अगले साल भी शहरवासियों को पर्याप्त पानी मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
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इस वजह से जहां एक ओर धनहानि हो रही है, वहीं दूसरी ओर परियोजनाएं पूरी न होने के कारण शहर के सभी घरों में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
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ऊपर से लगभग सात साल से इस परियोजना और गहरी सीवर लाइन के लिए जगह - जगह हो रही खुदाई और धूल उड़ने से लोगों का राह चलना मुश्किल हो गया है।
सर्वोदय नगर, साकेत नगर, काकादेव, मकरावर्टगंज समेत कई मोहल्लों में खुदे गड्ढों के आसपास मानकों के अनुरूप शटरिंग न होने से आए दिन हादसे भी होते रहते हैं।
पानी की कहानी
-50 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर के हर घर में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी (पेयजल) पहुंचाने की परियोजना
-जलापूर्ति परियोजना फेस-1, जनवरी 2008 की अनुमानित लागत 270.95 करोड़ रुपये थी
-फेस-2 मई, 2008 की अनुमानित लागत 377.93 करोड़ रुपये थी।
-यह जलापूर्ति परियोजनाएं मई 2012 में पूरी होनी थीं, पर अभी तक कार्य पूरा नहीं
कार्य अधूरा रहने की वजह से कार्य की अनुमानित लागत 220.06 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
पहले पैसा मिलने में देरी हुई। अब संशोधित लागत का जीओ हो गया है और शासन से धन भी रिलीज हो गया है, पर अभी तक मिला नहीं है।
पहले की कंपनी काम छोड़कर गई है। दोबारा टेंडर कराना पड़ा। इससे भी काम लेट हुआ। जिला प्रशासन कोआपरेट करता है, फिर भी त्यौहार आदि की वजह से खुदाई रोकनी पड़ती है।
इन्हीं वजहों से काम लेट हो गया है। अब तय समयावधि में काम पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
भारत सिंह, अधीक्षण अभियंता, जल निगम