फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   the nack team examined in csjm university

नैक के निरीक्षण में खुली पोल

Tue, 24 Mar 2015 02:47 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Tue, 24 Mar 2015 02:47 AM IST
विज्ञापन
the nack team examined in csjm university
छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी की शैक्षिक और शोध की गुणवत्ता की पोल सोमवार को खुल गई है। पहले दिन की ग्रेडिंग से ही राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की टीम असंतुष्ट दिखी। टीम को जो फीडबैक  मिला है, वह शैक्षिक और शोध की गुणवत्ता के मानक पर कहीं नहीं ठहरता है।
विज्ञापन


शिक्षकों की क्वालिफिकेशन, सर्विस कंडीशन देखने के बाद टीम के एक सदस्य ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अच्छा स्थान नहीं है। ये मनी जनरेटिंग यूनिवर्सिटी है। यहां पढ़ाने से भला नहीं हो सकता है। समय से पहले दूसरा संस्थान पकड़ लें, ताकि भविष्य चौपट होने से बच जाए।
विज्ञापन


सेल्फ फाइनेंस कोर्स में एक भी प्रोफेसर की नियुक्ति न होने को लेकर नैक टीम ने नाराजगी जताई है। जेएनयू के प्रोफेसर और गुजरात सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. काले की अध्यक्षता में नैक की 12 सदस्यीय टीम ने कानपुर यूनिवर्सिटी में डेरा डाल दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह टीम 26 मार्च तक रहेगी और अलग-अलग डिपार्टमेंट की शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता परखेगी। यही टीम सोमवार को इंस्टीट्यूट आफ बिजनेस मैनेजमेंट (आईबीएम), बी. फार्मेसी, लाइब्रेरी साइंस, लाइफ साइंस और बीएसबीटी में गई। अलग-अलग शिक्षक और स्टूडेंट्स से बातचीत की।

शिक्षकों से सर्विस कंडीशन, सैलरी, प्रमोशन प्रक्रिया, रिसर्च प्रोजेक्ट, फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम, पीएचडी स्टूडेंट और दूसरे शैक्षिक संस्थानों से समझौते की जानकारी ली। शिक्षकों ने जो फीडबैक दिया, वह निराश करने वाला है। फीडबैक से पता चला कि सेल्फ फाइनेंस कोर्स में 14 साल से पढ़ा रहे हैं, फिर भी चतुथ श्रेणी कर्मचारी के बराबर वेतन मिला है।

हर छह महीने और एक साल में जॉब रिन्यूवल की जा रही है। इस कारण शिक्षक पीएचडी नहीं करा पा रहे हैं। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) सहित अन्य रिसर्च इंस्टीट्यूट से रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं ले पा रहे हैं। सर्विस कंडीशन इतनी खराब है कि दूसरी यूनिवर्सिटी से मिलकर काम नहीं कर रही है।

नैक टीम ने कहा कि इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी में एक भी स्मार्ट क्लास रूम नहीं हैं। इंटरनेट की स्थिति बेहद खराब है। कैंपस सेलेक्शन भी कोई खास नहीं है। 1000 से ज्यादा कॉलेजों को संबद्धता देने वाली यूनिवर्सिटी की खराब स्थिति पर नैक टीम ने चिंता जताई। टिप्पणी करते हुए कहा कि सेल्फ फाइनेंस कोर्स से अच्छी इनकम होती है।

जो इनकम होती है, उसका पैसा कहां जाता है। यूनिवर्सिटी अपना खजाना भरने में जुटी है। उसे शैक्षिक और शोध की गुणवत्ता से कोई लेना देना नहीं है। नैक की टीम मंगलवार को यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) में जाएगी।


यहां की स्थिति और खराब है। एसोसिएट प्रोफेसर को यूआईईटी का डायरेक्टर बना रखा है। कम अर्हता वाले शिक्षक भी पढ़ा रहे हैं, जिन्हें कि फिक्स वेतनमान दिया जा रहा है। स्केल पाने वाले शिक्षकों को छठवां वेतनमान नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed