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Kanpur News: शिक्षक के साथ एआई से पढ़ाई का सफर होगा पूरा

Thu, 27 Aug 2026 02:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 02:36 AM IST
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The journey of learning with AI alongside the teacher will be complete.
कानपुर। शिक्षक के मार्गदर्शन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के साथ से पढ़ाई का सफर और बेहतर हो सकेगा। एआई से जहां छात्रों को भविष्य की गणना करना, रिपोर्ट बनाना और जानकारी जुटाना आसान होगा, वहीं गुरु से व्यक्तित्व विकास, मानवीय संवेदना, आत्मीयता की सीख मिलेगी। यह जानकारी छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के अध्ययन में सामने आई है। उन्होंने दोनों के साथ को लेकर फॉर्मूला भी तैयार किया है।
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सीएसजेएमयू के शिक्षा विभाग के डॉ. विमल सिंह, अशोक कुमार यादव, अभिषेक कुमार मिश्रा, सूरज गुप्ता ने कई छात्रों पर अध्ययन किया है। इस पर निकले निष्कर्ष में कहा गया है कि भविष्य की शिक्षा का रास्ता न तो केवल पुरानी परंपराओं से होकर जाता है और न ही केवल आधुनिक तकनीक से। असली रास्ता दोनों के बेहतर तालमेल में है। भारतीय गुरुकुल परंपरा के मानवीय मूल्यों को जनरेटिव एआई
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जैसी आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर शिक्षा को ज्यादा व्यक्तिगत, उपयोगी, नैतिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील बनाया जा सकता है। इस अध्ययन का विषय गुरुकुल से जनरेटिव एआई : कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बहुसांस्कृतिक शिक्षा रहा है।
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अध्ययन में बताया गया कि जनरेटिव एआई विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार पढ़ने में मदद कर सकता है। किसी विद्यार्थी को कोई विषय समझने में कठिनाई है तो एआई उसे अलग तरीके से समझा सकता है। लेकिन यह भी साफ है कि तकनीक की अपनी सीमाएं हैं। मशीन जानकारी दे सकती है, लेकिन मानवीय संवेदना, नैतिक मार्गदर्शन, वास्तविक शिक्षक-विद्यार्थी संबंध और जीवन मूल्यों का विकास केवल तकनीक के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

एआई के पांच फायदे
-चीजों को तुरंत, आसान तरीके से बता सकती है
-विभिन्न माध्यम से जानकारी तुरंत जुटाई जा सकती है
- जरूरत के लिहाज से सीखने का तरीका मिलता है
- मानवीय शिक्षा व्यवस्था बनाने में मददगार साबित हो सकती है
- गुरुकुल संस्कारों के साथ एआई की मदद से स्मार्ट शिक्षा होगी
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एआई के प्रयोग की पांच चुनौतियां
-डाटा गलत फीड होने पर गलत जानकारी दे सकता है
- असंवेदनशीलता, मशीन-निर्भरता, डिजिटल डिवाइड आदि समस्याएं
- डिजिटल संसाधनों की सुविधा न होने पर पीछे रह सकते
- किसी समुदाय के प्रति गलत फीडिंग समस्या बन सकती है
- एआई स्वयं से व्यक्ति की मन:स्थिति समझने में सक्षम नहीं है
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