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Kanpur News: उद्योगों का संकट होगा खत्म, खाड़ी और अफ्रीकी देशों तक पहुंच सकेंगे आर्डर
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कानपुर। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की घोषणा से शहर के उद्योग और निर्यात जगत को महीनों से मिल रही चुनौतियों में कमी आने की संभावना है। होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुलने से खाड़ी देशों के साथ अफ्रीका और यूरोप के बाजारों में उत्पादों की पहुंच फिर से दिख सकेगी। इससे वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट समाप्त होने की उम्मीद है। प्लास्टिक दाना सहित विभिन्न कच्चे माल की कीमतों में कमी आने की संभावना है जिससे उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा समुद्री जहाजों का आवागमन होने से निर्यात लागत में कमी आएगी। उद्योगों में महंगाई घटेगी तो महंगाई में कमी आ सकेगी।
अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को युद्ध शुरू हुआ था। इसके चलते गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देशों में शामिल सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन के अलावा इस्राइल, ईरान में निर्यात ठप हो गया था। इस कारण शहर के निर्यातकों को अरबों रुपये का झटका लगा था। इसके अलावा दुबई, संयुक्त अरब अमीरात के जरिये अफ्रीकी और यूरोप के देशों को होने वाला निर्यात खुल सकेगा।
समुद्री होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाएगा तो चुनौतियां खत्म होंगी। मसलन समुद्री परिवहन लागत, जोखिम और बीमा का दाम कम हो सकेगा। इस घटनाक्रम से वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट समाप्त होने की उम्मीद है। इसके परिणामस्वरूप, प्लास्टिक दाना सहित विभिन्न कच्चे माल की कीमतों में कमी आने की संभावना है जिसका असर उद्योगों के उत्पादन लागत में आने वाले समय में दिख सकेगा।
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बातचीत
निर्यातकों की बड़ी राहत मिलेगी
समझौता होने की घोषणा के बाद से फरवरी से निर्यातकों में अनिश्चितता का माहौल बन गया था। परिवहन लागत बढ़ ही गई थी। निर्यात ऑर्डर संबंधित तक पहुंचेगा इस पर भी संशय आ गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा तो इससे निर्यातकों की बड़ी राहत मिलेगी। - यादवेंद्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद।
परिवहन की चुनौतियां खत्म होंगी
यह समझौता अर्थव्यवस्था, निर्यात के लिए बड़ा अहम है। अमेरिका ने पूरी दुनिया को अनिश्चितता के दौर में कर दिया। अब वह खुद भी परेशान है। समझौता होने की घोषणा से खाड़ी देशों के साथ अफ्रीका के देशों में निर्यात खुल सकेगी। परिवहन की चुनौतियां खत्म होंगी। - असद इराकी, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद।
ऑर्डर तुरंत दूसरे देश पहुंचेंगे
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों को शहर से चमड़ा और चमड़ा का उत्पाद, किचन सब्जी मसाला, आइसक्रीम, कपड़ा, इंजीनियरिंग आदि का निर्यात किया जाता था। युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह से ठप हो गया था। अब इसके खुलने की संभावना होगी। ऑर्डर तत्काल संबंधित देशों को जाने लगेंगे। - आलोक श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश प्रमुख, फियो
परिवहन लागत कम होगी
समझौता के बाद होर्मुज खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति सुचारू होगी। इससे डीजल और पेट्रोल के दामों में संभावित वृद्धि पर रोक लगेगी। ईंधन की कीमतों में स्थिरता से परिवहन लागत कम होगी। यह उद्योगों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी। - मनोज बंका, अध्यक्ष, पीआईए।
हर उद्योग पर दिखेगा असर
उद्यमियों का कहना है कि इस समझौता से प्लास्टिक उद्योग को विशेष रूप से फायदा होगा क्योंकि प्लास्टिक दाना एक प्रमुख कच्चा माल है। अन्य विनिर्माण क्षेत्रों को भी उत्पादन लागत में कमी आएगी। यह कदम वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करेगा। उत्पादों के दाम घटेंगे तो महंगाई में भी कमी आएगी। चमड़ा, केमिकल, कपड़ा, पैकेजिंग, प्लास्टिक समेत सभी प्रमुख उद्योगों को आने वाले समय में लाभ मिल सकेगा।
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अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को युद्ध शुरू हुआ था। इसके चलते गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देशों में शामिल सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन के अलावा इस्राइल, ईरान में निर्यात ठप हो गया था। इस कारण शहर के निर्यातकों को अरबों रुपये का झटका लगा था। इसके अलावा दुबई, संयुक्त अरब अमीरात के जरिये अफ्रीकी और यूरोप के देशों को होने वाला निर्यात खुल सकेगा।
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समुद्री होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाएगा तो चुनौतियां खत्म होंगी। मसलन समुद्री परिवहन लागत, जोखिम और बीमा का दाम कम हो सकेगा। इस घटनाक्रम से वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट समाप्त होने की उम्मीद है। इसके परिणामस्वरूप, प्लास्टिक दाना सहित विभिन्न कच्चे माल की कीमतों में कमी आने की संभावना है जिसका असर उद्योगों के उत्पादन लागत में आने वाले समय में दिख सकेगा।
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निर्यातकों की बड़ी राहत मिलेगी
समझौता होने की घोषणा के बाद से फरवरी से निर्यातकों में अनिश्चितता का माहौल बन गया था। परिवहन लागत बढ़ ही गई थी। निर्यात ऑर्डर संबंधित तक पहुंचेगा इस पर भी संशय आ गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा तो इससे निर्यातकों की बड़ी राहत मिलेगी। - यादवेंद्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद।
परिवहन की चुनौतियां खत्म होंगी
यह समझौता अर्थव्यवस्था, निर्यात के लिए बड़ा अहम है। अमेरिका ने पूरी दुनिया को अनिश्चितता के दौर में कर दिया। अब वह खुद भी परेशान है। समझौता होने की घोषणा से खाड़ी देशों के साथ अफ्रीका के देशों में निर्यात खुल सकेगी। परिवहन की चुनौतियां खत्म होंगी। - असद इराकी, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद।
ऑर्डर तुरंत दूसरे देश पहुंचेंगे
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों को शहर से चमड़ा और चमड़ा का उत्पाद, किचन सब्जी मसाला, आइसक्रीम, कपड़ा, इंजीनियरिंग आदि का निर्यात किया जाता था। युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह से ठप हो गया था। अब इसके खुलने की संभावना होगी। ऑर्डर तत्काल संबंधित देशों को जाने लगेंगे। - आलोक श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश प्रमुख, फियो
परिवहन लागत कम होगी
समझौता के बाद होर्मुज खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति सुचारू होगी। इससे डीजल और पेट्रोल के दामों में संभावित वृद्धि पर रोक लगेगी। ईंधन की कीमतों में स्थिरता से परिवहन लागत कम होगी। यह उद्योगों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी। - मनोज बंका, अध्यक्ष, पीआईए।
हर उद्योग पर दिखेगा असर
उद्यमियों का कहना है कि इस समझौता से प्लास्टिक उद्योग को विशेष रूप से फायदा होगा क्योंकि प्लास्टिक दाना एक प्रमुख कच्चा माल है। अन्य विनिर्माण क्षेत्रों को भी उत्पादन लागत में कमी आएगी। यह कदम वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करेगा। उत्पादों के दाम घटेंगे तो महंगाई में भी कमी आएगी। चमड़ा, केमिकल, कपड़ा, पैकेजिंग, प्लास्टिक समेत सभी प्रमुख उद्योगों को आने वाले समय में लाभ मिल सकेगा।