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Kanpur News: केंद्र व्यवस्थापक की मनमानी, नियमों को ताक पर रख कर बाहरियों को बनाया कक्ष निरीक्षक
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कानपुर। बीएनएसडी इंटर कॉलेज में होमगार्ड भर्ती परीक्षा के दौरान पेपर लीक करने की कोशिश में पुलिस केंद्र व्यवस्थापक अमर सिंह की भूमिका को भी संदिग्ध मान कर जांच कर रही है। कारण कि कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी उनके ही जिम्मे थी। ऐसे में संदीप चंद्र विश्वकर्मा और निर्मल कुमार जैसे बाहरी व्यक्ति कैसे कक्ष निरीक्षक बनकर ड्यूटी करने अंदर पहुंच गए। इस सवाल को लेकर डीआईओएस ने भी जांच और कार्रवाई के आदेश विद्यालय प्रबंधन को दिए हैं।
कॉलेज में होमगार्ड भर्ती परीक्षा के दौरान ड्यूटी के लिए बाहरी कक्ष निरीक्षकों के नाम डीएम कार्यालय से भेजे गए थे। तीन आरोपियों के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने जांच की तो संदीप चंद्र विश्वकर्मा और निर्मल कुमार बाहरी कक्ष निरीक्षक के तौर पर वहां मौजूद थे। इनके नाम उस सूची में नहीं मिले। उनके पास मिले परिचय पत्र पर भी किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे। ऐसे में पुलिस को केंद्र व्यवस्थापक अमर सिंह की भूमिका पर शक है क्योंकि उन्होंने बिना मिलान किए किसी बाहरी व्यक्ति को कक्ष निरीक्षक के तौर पर काम करने की अनुमति कैसे दे दी। इसके अलावा बड़ा सवाल यह भी है कि सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद कॉलेज के प्रवक्ता अखिलेश यादव के यहां पॉकेट प्रिंटर और मोबाइल फोन रखने को संदिग्ध क्यों नहीं माना गया। इसके बावजूद कैमरों की निगरानी में लापरवाही बरती गई क्योंकि कैसे एक कक्ष निरीक्षक ने दूसरे को प्रश्नपत्र देकर एनसीसी कमरे की ओर भेज दिया। अच्छी बात यह रही कि कॉलेज परिसर में मौजूद पुलिस कर्मियों की नजर संदीप पर पड़ गई और उसे पकड़ लिया।
इस संबंध में डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रकरण की जांच एसीपी कर्नलगंज कर रहे हैं। जांच में जिस किसी की भी संलिप्तता प्रतीत होगी, वह पुलिस की कार्रवाई की जद में आएगा।
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कोट:
बीएनएसडी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और केंद्र व्यवस्थापक रहे अमर सिंह की भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध है। ऐसे किसी भी मामले में गड़बड़ी होने पर पूरी जिम्मेदारी केंद्र व्यवस्थापक की होती है। इसलिए पूरे प्रकरण की कॉलेज स्तर पर सही जांच कराने और 24 घंटे में प्रधानाचार्य को निलंबित करने का पत्र प्रबंधन को भेजा गया है। -संतोष कुमार राय, डीआईओएस
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कॉलेज में होमगार्ड भर्ती परीक्षा के दौरान ड्यूटी के लिए बाहरी कक्ष निरीक्षकों के नाम डीएम कार्यालय से भेजे गए थे। तीन आरोपियों के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने जांच की तो संदीप चंद्र विश्वकर्मा और निर्मल कुमार बाहरी कक्ष निरीक्षक के तौर पर वहां मौजूद थे। इनके नाम उस सूची में नहीं मिले। उनके पास मिले परिचय पत्र पर भी किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे। ऐसे में पुलिस को केंद्र व्यवस्थापक अमर सिंह की भूमिका पर शक है क्योंकि उन्होंने बिना मिलान किए किसी बाहरी व्यक्ति को कक्ष निरीक्षक के तौर पर काम करने की अनुमति कैसे दे दी। इसके अलावा बड़ा सवाल यह भी है कि सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद कॉलेज के प्रवक्ता अखिलेश यादव के यहां पॉकेट प्रिंटर और मोबाइल फोन रखने को संदिग्ध क्यों नहीं माना गया। इसके बावजूद कैमरों की निगरानी में लापरवाही बरती गई क्योंकि कैसे एक कक्ष निरीक्षक ने दूसरे को प्रश्नपत्र देकर एनसीसी कमरे की ओर भेज दिया। अच्छी बात यह रही कि कॉलेज परिसर में मौजूद पुलिस कर्मियों की नजर संदीप पर पड़ गई और उसे पकड़ लिया।
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इस संबंध में डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रकरण की जांच एसीपी कर्नलगंज कर रहे हैं। जांच में जिस किसी की भी संलिप्तता प्रतीत होगी, वह पुलिस की कार्रवाई की जद में आएगा।
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बीएनएसडी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और केंद्र व्यवस्थापक रहे अमर सिंह की भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध है। ऐसे किसी भी मामले में गड़बड़ी होने पर पूरी जिम्मेदारी केंद्र व्यवस्थापक की होती है। इसलिए पूरे प्रकरण की कॉलेज स्तर पर सही जांच कराने और 24 घंटे में प्रधानाचार्य को निलंबित करने का पत्र प्रबंधन को भेजा गया है। -संतोष कुमार राय, डीआईओएस