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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   The amount of fluoride in water is at dangerous level, Arsenic is also high, it is having bad effect on teeth

UP: पानी में फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर पर...आर्सेनिक भी ज्यादा, दांतों और हड्डियों पर डाल रहा बुरा असर

Tue, 26 Dec 2023 08:05 AM IST
हिमांशु अवस्थी अतुल भारद्वाज, अमर उजाला, नोएडा/कानपुर
अतुल भारद्वाज, अमर उजाला, नोएडा/कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 26 Dec 2023 08:05 AM IST
सार

Kanpur News: सीजीडब्ल्यूए ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि कानपुर नगर, उन्नाव, कन्नौज, बांदा सहित प्रदेश के 45 जिलों में निर्धारित मानक 0.01 मिलीग्राम प्रतिलीटर से अधिक आर्सेनिक की मौजूदगी मिली है।

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The amount of fluoride in water is at dangerous level, Arsenic is also high, it is having bad effect on teeth
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर सहित प्रदेश के 43 जिलों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। इनमें कानपुर नगर के अलावा कानपुर देहात, उन्नाव व आसपास के 12 जिले भी शामिल हैं। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) की ओर से यह रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार कानपुर नगर के पानी में आर्सेनिक की मात्रा भी अधिक पाई गई है।

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सीजीडब्ल्यूए ने माना है कि इसकी वजह से लोगों की सेहत को खतरा पैदा हो रहा हैं। बीते 18 दिसंबर को दी गई रिपोर्ट में सीजीडब्ल्यूए ने कहा है कि भूगर्भ जल में फ्लोराइड की सुरक्षित मात्रा एक मिलीग्राम प्रति लीटर होती है जबकि इन जिलों के पानी में 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड मिला है।
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सीजीडब्ल्यूए ने बताया है कि यूपी के 43 जिले फ्लोराइड की अधिक मात्रा की चपेट में हैं। इस संबंध में एनजीटी ने मुख्य सचिव के साथ सीजीडब्ल्यूए, केंद्र सरकार के सचिव वन और पर्यावरण को इसकी रोकथाम और बचाव के लिए उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट देने को कहा है। अधिकरण इस मामले की सुनवाई अब 15 फरवरी को करेगा।

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ये हैं यूपी के फ्लोराइड अधिकता वाले जिले
कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, हरदोई, बांदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, जालौन, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, फतेहपुर, आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, आजमगढ़, बुलंदशहर, एटा, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजीपुर, गोंडा, गाजियाबाद, हाथरस, जौनपुर, कांशीरामनगर, ललितपुर, मैनपुरी, मथुरा, मऊ, प्रतापगढ़, रायबरेली, शाहजहांपुर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, वाराणसी, चंदौली, गोंडा, सीतापुर, अमरोहा व रामपुर।

महानगर व आसपास के जिलों में आर्सेनिक भी बढ़ी हुई मिली
सीजीडब्ल्यूए ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि कानपुर नगर, उन्नाव, कन्नौज, बांदा सहित प्रदेश के 45 जिलों में निर्धारित मानक 0.01 मिलीग्राम प्रतिलीटर सेअधिक आर्सेनिक की मौजूदगी मिली है।

नगर व उन्नाव में जमीन के नीचे है प्लोराइड की चट्टानें

कानपुर नगर, उन्नाव व इसके आसपास के जिलों के भूगर्भ जल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने की वजह भूगर्भ में पाई जाने वाली चट्टानों में फ्लोराइड की परत का पाया जाना है। यह पानी के धीरे-धीरे घुलती रहती है। घुनशीलता अधिक हो जाती है तो मात्रा सुरक्षित स्तर से अधिक हो जाती है।  -अशोक कुमार पूर्व अधिशासी अभियंता भूगर्भ जल विभाग

पेयजल योजना के तहत भूगर्भ के पानी का परीक्षण होने से उसमें जरूरत के हिसाब से दवाएं डालकर मात्रा को लेवल पर लाया जाता है। लेकिन फसलों की सिंचाई के लिए की जानी वाली पंपिंग सेट की बोरिंग में पानी का परीक्षण नहीं किया जाता है। ऐसे में फ्लोराइड फसलों के जरिये लोगों के शरीर में पहुंच रहा है और नुकसान पहुंचा रहा है।  -आरएस सिन्हा, भूगर्भ जल विज्ञानी

बच्चों के दांत, बड़ों की रीढ़ खराब कर रहा फ्लोराइड
पानी में फ्लोराइड बच्चों और बड़ों के दांतों को खराब करने के साथ हड्डियों को खोखला कर रहा है। इसके असर से हडिडयां टेढ़ी होने लगती हैं। इससे रीढ़ पर भी बुरा असर आता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लोराइड धीमे जहर की तरह असर करता है। रीढ़ टेढ़ी होने की शिकायत लेकर रोगी आ रहे हैं। हैलट की ओपीडी में नगर, देहात, उन्नाव और आसपास के जिलों के लोग आ रहे हैं।

पानी का आर्सेनिक खराब कर देता है नर्वस सिस्टम
आर्सेनिक का भी प्रतिकूल असर पड़ता है। इससे त्वचा खराब तो होती है रोगियों का नर्वस सिस्टम बिगड़ता है। नसें खराब होने और लकवा होने का खतरा पैदा हो जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. विशाल कुमार गुप्ता का कहना है कि फ्लोराइड की मात्रा पानी में अधिक होने से गुर्दे और लिवर भी असर आ सकता है। वहीं आर्सेनिक अगर पानी में है तो नर्वस सिस्टम और नसें खराब होती हैं जिससे हाथ-पैर का लकवा हो सकता है।

फ्लोरोसिस के रोगी बहुत देर में दिखाने आते हैं
वहीं, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. चंदन कुमार का कहना है कि फ्लोरोसिस के रोगी बहुत देर में दिखाने आते हैं। उस वक्त फ्लोराइड का काफी जमाव हो चुका होता है। मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशरफ उल्लाह का कहना है कि प्रत्येक ओपीडी में फ्लोरोसिस के रोगी 12 प्रतिशत होते हैं। सबमर्सिबल का पानी पीने वालों को ज्यादा दिक्कत हो जाती है।

बचाव

  • आरओ का पानी पिएं।
  • पानी उबाल कर पिएं।
  • जल निगम की सप्लाई भी सुरक्षित।
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