{"_id":"5f74cc298ebc3e9bbb18c817","slug":"ten-years-of-imprisonment-to-the-accused-for-attempting-to-misdeed-with-minor","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फतेहपुर: नाबालिग से दुष्कर्म के प्रयास में आरोपी को दस साल का सश्रम कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फतेहपुर: नाबालिग से दुष्कर्म के प्रयास में आरोपी को दस साल का सश्रम कारावास
Wed, 30 Sep 2020 11:52 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 30 Sep 2020 11:52 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहपुर जिले में दहेज की लालच में अपने घर की बहू को जलाकर मार देने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट की अपर जिला जज अर्पणा त्रिपाठी ने सभी मुल्जिमों पति, सास-ससुर, जेठ-जेठानी और नंद-नंदोई को कारावास की सजा सुना दी।
अदालत का आदेश आते ही मामले के सभी सातों आरोपियों को जेल भेज दिया गया। हालांकि अदालत ने इसी प्रकरण में आरोपी रहे मृतका के दो चाचा ससुर को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। घटना कानपुर देहात के मंगतपुर थानाक्षेत्र के अकना गांव में 20 फरवरी 2016 को घटित हुई थी।
गाजीपुर थानाक्षेत्र के फुलवामऊ गांव निवासी उदय प्रताप सिंह ने अपनी पुत्री ऊषा देवी की शादी 9 जुलाई 2014 को ललौली थानाक्षेत्र के कोर्रा गांव निवासी राकेश पुत्र जगतपाल से की थी। शादी के बाद से ही पति राकेश और उसके घरवाले ऊषा पर मायके पक्ष से एक लाख रुपए नगद और एक मोटरसाइकिल दिलाने की मांग कर रहे थे।
विज्ञापन
मांग पूरी न होने पर आए दिन उसे प्रताड़ित करते थे। शादी के एक साल बाद गृह कलह के कारण ऊषा को उसकी नंद संता देवी और नंदोई कृष्ण कुमार उर्फ गुड्डू अपने गांव अकना थाना मंगतपुर जिला कानपुर देहात ले गए थे।
विज्ञापन
अदालत का आदेश आते ही मामले के सभी सातों आरोपियों को जेल भेज दिया गया। हालांकि अदालत ने इसी प्रकरण में आरोपी रहे मृतका के दो चाचा ससुर को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। घटना कानपुर देहात के मंगतपुर थानाक्षेत्र के अकना गांव में 20 फरवरी 2016 को घटित हुई थी।
विज्ञापन
गाजीपुर थानाक्षेत्र के फुलवामऊ गांव निवासी उदय प्रताप सिंह ने अपनी पुत्री ऊषा देवी की शादी 9 जुलाई 2014 को ललौली थानाक्षेत्र के कोर्रा गांव निवासी राकेश पुत्र जगतपाल से की थी। शादी के बाद से ही पति राकेश और उसके घरवाले ऊषा पर मायके पक्ष से एक लाख रुपए नगद और एक मोटरसाइकिल दिलाने की मांग कर रहे थे।
विज्ञापन
मांग पूरी न होने पर आए दिन उसे प्रताड़ित करते थे। शादी के एक साल बाद गृह कलह के कारण ऊषा को उसकी नंद संता देवी और नंदोई कृष्ण कुमार उर्फ गुड्डू अपने गांव अकना थाना मंगतपुर जिला कानपुर देहात ले गए थे।
जहां ऊषा की 20 फरवरी 2016 को संदेहास्पद स्थितियो में आग से जलने के कारण मौत हो गई थी। बेटी की मौत के बाद पिता उदय प्रताप सिंह के बार-बार तहरीर देने पर भी जब पुलिस ने मुकदमा नहीं लिखा तो उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने इस मामले में दहेज हत्या की एफआईआर लिखी थी। पुलिस की चार्जशीट में मृतका ऊषा देवी के पति राकेश, सास मुन्नी देवी, ससुर जगतपाल, जेठ बृजेश और सुरेश, जेठानी प्रतिमा सिंह, चाचा ससुर मुन्नू सिंह और राम सिंह, नंद संता देवी और नंदोई कृष्ण कुमार उर्फ गुड्डू का बतौर अभियुक्त नाम आया।
घटना के बाद से पति राकेश जेल में था। जबकि अन्य सभी लोग जमानत पर थे। बुधवार को मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट 2 की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अर्पणा त्रिपाठी ने की। उनके समक्ष सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम ने साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए।
जिन पर विचार करते हुए एडीजे अर्पणा त्रिपाठी ने पति राकेश, नंद संता देवी और नंदोई कृष्ण कुमार उर्फ गुड्डू को दस-दस साल और 12-12 हजार रुपए जुर्माना और सास मुन्नी देवी, ससुर जगतपाल, जेठ बृजेश, सुरेश और जेठानी प्रतिमा सिंह को सात-सात वर्ष और 8-8 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में मृतका की चाचा ससुर मुन्नू सिंह और राम सिंह को इस मामले से बरी कर दिया।
सीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने इस मामले में दहेज हत्या की एफआईआर लिखी थी। पुलिस की चार्जशीट में मृतका ऊषा देवी के पति राकेश, सास मुन्नी देवी, ससुर जगतपाल, जेठ बृजेश और सुरेश, जेठानी प्रतिमा सिंह, चाचा ससुर मुन्नू सिंह और राम सिंह, नंद संता देवी और नंदोई कृष्ण कुमार उर्फ गुड्डू का बतौर अभियुक्त नाम आया।
घटना के बाद से पति राकेश जेल में था। जबकि अन्य सभी लोग जमानत पर थे। बुधवार को मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट 2 की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अर्पणा त्रिपाठी ने की। उनके समक्ष सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम ने साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए।
जिन पर विचार करते हुए एडीजे अर्पणा त्रिपाठी ने पति राकेश, नंद संता देवी और नंदोई कृष्ण कुमार उर्फ गुड्डू को दस-दस साल और 12-12 हजार रुपए जुर्माना और सास मुन्नी देवी, ससुर जगतपाल, जेठ बृजेश, सुरेश और जेठानी प्रतिमा सिंह को सात-सात वर्ष और 8-8 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में मृतका की चाचा ससुर मुन्नू सिंह और राम सिंह को इस मामले से बरी कर दिया।
नाबालिग से दुष्कर्म के प्रयास में आरोपी को 10 साल की कैद
नाबालिग से दुष्कर्म के प्रयास में आरोपी को सश्रम कारावास की सजा सुना दी गई। मामला न्यायालय में विगत तीन वर्ष से विचाराधीन चल रहा था। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविकांत की अदालत ने सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयानों और साक्ष्यों को मद्देनजर रखते हुए मुल्जिम को सजा सुना दी।
घटना थरियांव थानाक्षेत्र के एक गांव में 29 मई 2017 को हुई। जिसमें शौच के लिए खेत गई नौ साल की बच्ची के साथ गांव-गांव फेरी लगाने वाले सैय्यद शाह निवासी करमचंदपुर साड़ा ने दुष्कर्म की कोशिश की थी।
मगर बच्ची ने भागकर अपने परिजनों को पूरा वाकया बताया तो घर वालो ने गांव में घूमकर फेरी लगा रहे 23 साल के सैय्यद शाह को पकड़कर पुलिस को सुपुर्द कर दिया था। तबसे वह जेल में था। बुधवार को एडीजीसी धर्मेंद्र उत्तम की पैरवी पर अपर जिला जज रविकांत की पाक्सो कोर्ट ने आरोपी सैय्यद शाह को दस वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुना दी।
नाबालिग से दुष्कर्म के प्रयास में आरोपी को सश्रम कारावास की सजा सुना दी गई। मामला न्यायालय में विगत तीन वर्ष से विचाराधीन चल रहा था। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविकांत की अदालत ने सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयानों और साक्ष्यों को मद्देनजर रखते हुए मुल्जिम को सजा सुना दी।
घटना थरियांव थानाक्षेत्र के एक गांव में 29 मई 2017 को हुई। जिसमें शौच के लिए खेत गई नौ साल की बच्ची के साथ गांव-गांव फेरी लगाने वाले सैय्यद शाह निवासी करमचंदपुर साड़ा ने दुष्कर्म की कोशिश की थी।
मगर बच्ची ने भागकर अपने परिजनों को पूरा वाकया बताया तो घर वालो ने गांव में घूमकर फेरी लगा रहे 23 साल के सैय्यद शाह को पकड़कर पुलिस को सुपुर्द कर दिया था। तबसे वह जेल में था। बुधवार को एडीजीसी धर्मेंद्र उत्तम की पैरवी पर अपर जिला जज रविकांत की पाक्सो कोर्ट ने आरोपी सैय्यद शाह को दस वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुना दी।