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किसी के पिता तो कहीं कोच ने बदली किस्मत, जानिए इन होनहारों की 'सफलता की कहानी'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 05 Sep 2018 08:22 AM IST
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ज्योति शुक्ला अपने कोच के साथ, कुलदीप यादव अपने कोच के साथ
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वैसे तो हर वो शख्स आपका शिक्षक है, जिससे जीवन में कुछ भी सीखने को मिलता है। लेकिन हर किसी के जीवन में शिक्षक के रूप में एक ऐसी शख्सियत जरूर आई है, जिसने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। जिसकी शिक्षा और सुझावों ने कामयाबी का मार्ग प्रशस्त किया है। जिसकी शिक्षा से दूर और असंभव सी लगने वाली मंजिल भी आप पाने में कामयाब हो गए। आइये जानते हैं ऐसे ही शिक्षकों के बारे में, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाई और शिष्यों को मुकाम तक पहुंचाया।
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शिक्षक बन बेटे आयुष को भी ध्रुपद गायन का बनाया फनकार
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ध्रुपद गायक पंडित विनोद कुमार द्विवेदी अपने बेटे के साथ
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ध्रुपद गायक पंडित विनोद कुमार द्विवेदी अपने बेटे के ही शिक्षक बने। अपने बेटे आयुष को भी इसी विद्या का फनकार बना दिया। आयुष शहर के पहले ऐसे शख्स हैं, जिन्हें गायन के लिए केंद्र सरकार से स्कॉलरशिप मिली हो। आयुष कहते हैं कि वे सौभाग्यशाली हैं जो उनके पिता ने उन्हें शिक्षा दी। आयुष ने तीन साल की उम्र से ही संगीत सीखना शुरू कर दिया था। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा मनोज श्रीवास्तव से ली एवं तबला राजकुमार त्रिपाठी से सीखा। ध्रुपद में विशेष रुझान होने के कारण उन्होंने अपने पिता को ही शिक्षक बना लिया और अभ्यास शुरू कर दिया। आयुष ने अपने पिता के साथ देश के बड़े-बड़े मंच साझा किए। कई रागों को आयुष ने पिताजी से मंच पर गाने के दौरान ही सीखे। आयुष बताते हैं गायन के उनके व्यक्तित्व से भी बहुत कुछ सीखने को मिला। उनका सरल स्वाभाव, उनके सिद्धांत सभी के लिए प्रेरणादायी हैं। आयुष को युवा ध्रुपद कलाश्री सम्मान मिल चुका है। इसके साथ ही देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों जैसे दिल्ली, चेन्नई, जालंधर, ऋषिकेष भोपाल आदि जगहों पर प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।
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ज्योति को प्रेरित किया, घर वालों को समझाया, एशियन गेम्स तक पहुंचाया
ज्योति शुक्ला अपने कोच के साथ
कानपुर शहर से एशियन गेम्स खेलने जाने वाली पहली महिला खिलाड़ी ज्योति शुक्ला भी इस मुकाम तक पहुंचने का श्रेय अपने कोच अतुल मिश्रा को देती हैं। गुरुदेव निवासी ज्योति कहती हैं कि अगर कोच अतुल ने उन्हें प्रेरित न किया होता और घर वालों को न समझाया होता तो शायद उसकी भी प्रतिभा दबी रह जाती। 2008 में जब उसने ग्रीनपार्क में हैंडबॉल सीखना शुरू किया तो कोच ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और लखनऊ जाकर अभ्यास करने को कहा। उस समय इतनी सुविधाएं नहीं थीं। घर वाले भी खेलों के प्रति इतना जागरूक नहीं थे। खासकर लड़की को कहीं भेजने की बात आए तो और भी मुश्किल। घर वालों ने मना कर दिया। तब उन्होंने ही उसके माता-पिता को समझाया और खेल जारी रखने के लिए राजी कर लिया। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की। एशियन गेम्स में खेलना, उन्हीं की मेहनत से संभव हुआ है। हालांकि मेडल न ला पाने का मलाल है।
क्रिकेटर कुलदीप की कला को पहचाना, अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमका
कुलदीप यादव अपने कोच के साथ
क्रिकेट के खिलाड़ी कानपुर निवासी कुलदीप यादव को अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकाने में उनके कोच कपिल पांडेय का अहम रोल रहा है। कपिल ही हैं, जिन्होंने कुलदीप की प्रतिभा को पहचाना और भविष्यवाणी भी कर दी थी कि तुम भारतीय टीम का हिस्सा जरूर बनोगे। दरअसल, कुलदीप चाइनामैन गेंदबाजी करते हैं। चाइनामैन गेंदबाज मतलब बाएं हाथ की कलाई से ऑफ स्पिन गेंद कराना। ऐसे गेंदबाज कम ही हैं। डिफेंस कॉलोनी निवासी कुलदीप ने बताया कि वह पहली बार 2004 में रोवर्स मैदान में कोच कपिल पांडेय से मिला था। करीब 25 गेंद फेंकने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारे पास गेंद फेंकने की अजब कला है। उनसे ही मुझे मेरी ही खूबी के बारे में पता चला। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार क्रिकेट खेलो तो टीम इंडिया में जरूर पहुंचोगे। इस पर कुलदीप ने उनके यहां प्रैक्टिस शुरू कर दी। कुलदीप बताते हैं कि कभी-कभी उसका अभ्यास करने का मन नहीं होता था तो घर से ले जाते थे। इसी की नतीजा है कि आज वह इस मुकाम पर है।
रितिक को पार्क में डांस करते देखा, फ्री में प्रैक्टिस कराई, फिर पूरे देश के सामने नाचा
रितिक दिवाकर अपने कोच के साथ
सोनी पर प्रसारित होने वाले सुपर डांस (सीजन-टू) में दूसरे स्थान पर आने वाले कानपुर नौबस्ता के इमलीपुर गांव निवासी रितिक दिवाकर को भी ऐसा शिक्षक मिला कि उसकी दुनिया ही बदल गई। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाला रितिक बताता है कि जब वह सात साल का था तो घर वालों से छिपकर पार्क में डांस की प्रैक्टिस किया करता था। एक दिन डांस एकेडमी चलाने वाले योगेश सर ने उसे डांस करते देख लिया। पूछा डांस सीखोगे। उसने कहा पैसा नहीं और घरवाले भी राजी नहीं होंगे। तब योगेश सर ने कहा कि पैसे की चिंता मत करो फ्री में सिखाऊंगा। इसके बाद वह उन्हीं के पास डांस सीखने लगा। पहला ‘टैलेंट ऑफ द सिटी डांस कंम्टीशन’ शहर में हुआ, जिसके फार्म भरने के पैसे भी योगेश सर ने दिए। सुपर डांस के पहले सीजन में भी लेकर गए गए थे। हालांकि उसमें सेलेक्शन नहीं हुआ था। दूसरी बार में उसका चयन हो गया। योगेश सर उसके साथ ही रहे। अब रितिक साढ़े 11 साल का है। केडीएमए स्कूल मेें पढ़ाई कर रहा है। इसका खर्च वरुण धवन दे रहे हैं। रितिक इसका भी श्रेय योगेश को ही देता है।