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कन्नौज: पुलिस हिरासत में शिक्षक ने फांसी लगाकर जान दी, परिजनों ने किया हंगामा
Fri, 20 Mar 2020 01:04 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 20 Mar 2020 01:04 PM IST
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मौके पर मौजूद पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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कन्नौज जिले के तिर्वा में पुलिस हिरासत में शिक्षक की मौत के बाद हंगामा हो गया। परिजनों ने मेडिकल कालेज से लेकर ठठिया चौराहे तक दो सड़कें जाम कर दीं। डीएम और एसपी मेडिकल कालेज पहुंचे तो ईएमओ कार्यालय का गेट तोड़ने का प्रयास किया गया। पुलिस से नोकझोंक हुई। सुबह करीब साढ़े आठ बजे शुरू हुए हंगामे को शांत कराने के लिए कई जिलों से फोर्स मंगवानी पड़ी। दोपहर करीब ढाई बजे जाम खुलवाने के बाद डीएम और एसपी की कई चरणों में परिजनों से वार्ता हुई।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आश्वासन पर परिजन शांत हुए। करीब चार बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। जिलाधिकारी ने एसडीएम जयकरन को मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश दिए हैं। तिर्वा कोतवाली प्रभारी समेत कुछ और पुलिसकर्मियों पर निलंबन की गाज गिर सकती है।
जनपद और थाना जालौन के गिदोंसा गांव निवासी अनिल कुमार उर्फ पर्वत सिंह (35) पुत्र श्रीराम औरैया के थाना अछल्दा के सेमपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे। 2012 में तिर्वा कोतवाली के सुक्खापुर्वा गांव निवासी शिक्षक अखिलेश की पुत्री नीरज से शादी हुई थी। दो बच्चों में पुत्र अंश (4) व बेटी अंशिका (3) है। पति से विवाद के चलते 21 फरवरी से नीरज अपने मायके में रह रही थीं।
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गुरुवार शाम को अनिल पत्नी को लेने ससुराल गए। पत्नी के घर न जाने पर विवाद हुआ तो यूपी 112 पुलिस को बुला लिया गया। पुलिस अनिल को कोतवाली ले आई। यहां तड़के करीब पांच बजे मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि शौच क्रिया के बहाने अनिल शौचालय गया। यहां पोछे वाले कपड़े का फंदा बनाकर खुदकुशी कर ली।
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दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आश्वासन पर परिजन शांत हुए। करीब चार बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। जिलाधिकारी ने एसडीएम जयकरन को मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश दिए हैं। तिर्वा कोतवाली प्रभारी समेत कुछ और पुलिसकर्मियों पर निलंबन की गाज गिर सकती है।
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जनपद और थाना जालौन के गिदोंसा गांव निवासी अनिल कुमार उर्फ पर्वत सिंह (35) पुत्र श्रीराम औरैया के थाना अछल्दा के सेमपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे। 2012 में तिर्वा कोतवाली के सुक्खापुर्वा गांव निवासी शिक्षक अखिलेश की पुत्री नीरज से शादी हुई थी। दो बच्चों में पुत्र अंश (4) व बेटी अंशिका (3) है। पति से विवाद के चलते 21 फरवरी से नीरज अपने मायके में रह रही थीं।
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गुरुवार शाम को अनिल पत्नी को लेने ससुराल गए। पत्नी के घर न जाने पर विवाद हुआ तो यूपी 112 पुलिस को बुला लिया गया। पुलिस अनिल को कोतवाली ले आई। यहां तड़के करीब पांच बजे मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि शौच क्रिया के बहाने अनिल शौचालय गया। यहां पोछे वाले कपड़े का फंदा बनाकर खुदकुशी कर ली।
इस मामले की जानकारी पर परिजनों में कोहराम मच गया। सुबह करीब साढ़े आठ बजे अनिल के ससुरालीजन ग्रामीणों के साथ तिर्वा मेडिकल कालेज पहुंचे। यहां हंगामा शुरू कर दिया। मेडिकल कालेज के सामने तिर्वा-कन्नौज मार्ग और यहां से करीब दो किमी दूर ठठिया चौराहे पर जाम लगा दिया। पुलिस से नोकझोंक भी हुई। सूचना पर करीब नौ बजे डीएम राकेश कुमार मिश्रा और एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह मौके पर पहुंच गए।
जाम खुलता न देख फर्रुखाबाद, औरैया, ककवन, बेलापुर, शिवराजपुर, बिल्हौर और कन्नौज के सभी थानों की फोर्स के साथ पीएसी को भी बुला लिया गया। मेडिकल कालेज में ईएमओ कार्यालय में डीएम और एसपी मामले की जानकारी लेने लगे तो बाहर मौजूद मृतक के ससुरालीजनों और ग्रामीणों ने कार्यालय का गेट तोड़ने का प्रयास किया।
करीब 11 बजे अधिकारी मेडिकल कालेज से निकलकर तिर्वा कोतवाली जाने लगे तो इनकी गाड़ियां रोक लीं। लोग नारेबाजी करने लगे। परिजनों का आरोप था कि पुलिस की पिटाई से अनिल की मौत हुई है। मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे से लटका दिया गया।
एडीएम गजेंद्र कुमार, एसडीएम तिर्वा जयकरन, तहसीलदार विश्ववेशर सिंह समेत कई अधिकारियों ने बारी-बारी से आक्रोशित लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। जिलाधिकारी और एसपी ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब यह शांत हुए। डीएम ने बताया कि एसडीएम तिर्वा जयकरन को मजिस्ट्र्रेटी जांच सौंपी गई है। दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी से कहा गया है।
जाम खुलता न देख फर्रुखाबाद, औरैया, ककवन, बेलापुर, शिवराजपुर, बिल्हौर और कन्नौज के सभी थानों की फोर्स के साथ पीएसी को भी बुला लिया गया। मेडिकल कालेज में ईएमओ कार्यालय में डीएम और एसपी मामले की जानकारी लेने लगे तो बाहर मौजूद मृतक के ससुरालीजनों और ग्रामीणों ने कार्यालय का गेट तोड़ने का प्रयास किया।
करीब 11 बजे अधिकारी मेडिकल कालेज से निकलकर तिर्वा कोतवाली जाने लगे तो इनकी गाड़ियां रोक लीं। लोग नारेबाजी करने लगे। परिजनों का आरोप था कि पुलिस की पिटाई से अनिल की मौत हुई है। मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे से लटका दिया गया।
एडीएम गजेंद्र कुमार, एसडीएम तिर्वा जयकरन, तहसीलदार विश्ववेशर सिंह समेत कई अधिकारियों ने बारी-बारी से आक्रोशित लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। जिलाधिकारी और एसपी ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब यह शांत हुए। डीएम ने बताया कि एसडीएम तिर्वा जयकरन को मजिस्ट्र्रेटी जांच सौंपी गई है। दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी से कहा गया है।