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'अभाव में बढ़ी, मेहनत कड़ी, अब सुनहरी घड़ी', ऐसी है एशियन गेम्स खिलाड़ी ज्योति शुक्ला की कहानी
पुलकित तिवारी, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 20 Aug 2018 02:30 PM IST
सार
-एशियन गेम्स खेलने वाली शहर की पहली खिलाड़ी ज्योति शुक्ला की कहानी
-आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद घरवालों ने बेटी का हौसला बढ़ाया
-शिक्षिका और कोच ने भी दिया सहयोग, सभी की उम्मीदों पर खरी उतरी
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एशियन गेम्स खेलने वाली शहर की पहली खिलाड़ी ज्योति शुक्ला की कहानी
एशियन गेम्स खेलने वाली कानपुर शहर की पहली खिलाड़ी ज्योति शुक्ला ने कड़े संघर्ष के बाद यह मुकाम हासिल किया है। जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में भारतीय हैंडबाल
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आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद घरवालों ने बेटी का हौसला बढ़ाया
रूंधे गले से ज्योति के बारे में पिता शिव शंकर व मीरा देवी ने बताया कि वह अशोक नगर स्थित पूर्णा देवी गर्ल्स इंटर कालेज में कक्षा छह में पढ़ती थी। स्कूल में ही उसने हैंडबाल खेलना शुरू कर दिया था। उस वक्त उसे कॉलेज की शिक्षिका रमाकांती प्रशिक्षण देती थीं। ज्योति की कड़ी मेहनत देखकर रमाकांती ने उसे ग्रीनपार्क के हैंडबाल प्रशिक्षक अतुल मिश्रा से मिलवाया। वर्ष 2008 में अतुल ने ज्योति को ट्रेनिंग देनी शुरू की। ग्रीनपार्क में ज्योति का खेल देखकर हैंडबाल एसोसिएशन के चेयरमैन रजत आदित्य दीक्षित काफी प्रभावित हुए। उन्होंने उसे लखनऊ स्थित सांई हॉस्टल में अभ्यास के लिए भिजवाया। वहां तीन माह के कड़े अभ्यास के बाद ज्योति को प्लेटफॉर्म मिलना शुरू हो गया। पिता शिव शंकर ने बताया कि पहले मंडल फिर जिला और अंत में वह राष्ट्रस्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगी। ज्योति की व्यस्तता के चलते घरवालों ने भी दिल पर पत्थर रख लिया। बस फोन पर ही वह बेटी को शुभकामनाएं देते रहे। वर्ष 2015 में ज्योति ने राष्ट्रस्तरीय प्रतियोगिता में पहला स्वर्ण पदक जीता। मार्च 2018 में लखनऊ स्थित बाबू स्टेडियम में हैंडबाल प्रतियोगिता में बांग्लादेश, नेपाल व चाइना को हराकर स्वर्ण पदक जीता।
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शिक्षिका और कोच ने भी दिया सहयोग, सभी की उम्मीदों पर खरी उतरी ज्योति
शिव शंकर शुक्ला के परिवार में पत्नी मीरा देवी, दो बेटे व तीन बेटियां हैं। बड़े बेटे योगेश और बेटी कल्याणी की शादी हो चुकी है। भाई बहनों में ज्योति चौथे नंबर की है। शिव शंकर की अशोक नगर में बल्ब की फैक्ट्री थी। चाइना की लाइटें आने के कारण वर्ष 2008 में उनकी फैक्ट्री पूरी तरह से बंद हो गई। घर की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बच्चों को पढ़ाया।
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ज्योति शुक्ला
शिव शंकर शुक्ला के मुताबिक जब ज्योति को बाहर खेलने जाना होता था तो उसकी शिक्षिका रमाकांती, कोच अतुल मिश्रा व रजत दीक्षित ने हर संभव मदद की। उन्हें घर की स्थिति के बारे में सब पता था। पिता के मुताबिक ज्योति कम बोलती है। यदि उसे कोई बात बुरी लगती है तो वह सामने वाले के मुंह पर स्पष्ट बोल भी देती है।
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ज्योति शुक्ला
हैंडबाल एसोसिएशन के चेयरमैन रजत दीक्षित ने घर की अर्थिक स्थिति को देखते हुए ज्योति को सरकारी विभागों का फार्म भरवाना शुरू कर दिए थे। वर्ष 2016 में स्पोर्ट्स कोटे से ज्योति की रेलवे में टीटीई के पद पर नौकरी लग गई थी। वर्तमान में उसकी तैनाती गोरखपुर में है।
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