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नवरात्र 2026: माता सीता के तप से प्रकट हुईं थीं माता तपेश्वरी, मन्नत पूरी होने पर भक्त जलवाते हैं अखंड ज्योति

Sun, 11 Oct 2026 11:16 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Sun, 11 Oct 2026 11:16 PM IST
सार

350 साल पुरानी सिद्धपीठ में मन्नत पूरी होने पर भक्त अखंड ज्योति जलवाते हैं। नवरात्र में बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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Navratri 2026: Goddess Tapeshwari manifested through the penance of Mother Sita
बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिरहाना रोड स्थित करीब 350 वर्ष पुराने सिद्धपीठ माता तपेश्वरी मंदिर में शारदीय नवरात्र पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भोर में पांच बजे से ही दर्शन के लिए कतारें लग जाती हैं। हाथों में नारियल, प्रसाद और सुहाग की सामग्री लिए भक्त मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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मान्यता है कि माता सीता ने इसी स्थान पर तपस्या की थी और अपने पुत्रों लव-कुश का मुंडन संस्कार भी यहीं कराया था। कहा जाता है कि उनकी तपस्या से स्वयंभू माता तपेश्वरी प्रकट हुई थीं। इसी मान्यता के चलते नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बच्चों का मुंडन संस्कार कराने पहुंचते हैं। मंदिर में माता तपेश्वरी के साथ मां लक्ष्मी, दुर्गा, पार्वती और सरस्वती की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। रात की शयन आरती में भक्तों की भीड़ जुटती है। नवरात्र की दशमी पर मंदिर प्रबंधन की ओर से भंडारा कराया जाता है। मंदिर के बाहर लगने वाला मेला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है। सुरक्षा के लिए अस्थायी पुलिस चौकी बनाई गई है और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है।
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अखंड ज्योति जलाती महिला - फोटो : अमर उजाला
मन्नत पूरी हुई तो जलवाई अखंड ज्योति
मंदिर में 500 से अधिक मन्नत की ज्योतियां श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक बनी हुई हैं। मान्यता है कि मां से मांगी मुराद पूरी होने पर भक्त दरबार में अखंड ज्योति प्रज्वलित कराते हैं। नवरात्र के पूरे नौ दिन जलने वाली इन ज्योतियों से मंदिर परिसर रोशन रहता है। दीपों की लौ भक्तों के विश्वास, कृतज्ञता और मां के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

 

Navratri 2026: Goddess Tapeshwari manifested through the penance of Mother Sita
बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल के बाद घटी शृंगार की बुकिंग
मंदिर प्रबंधक सिद्धार्थ व्यास ने बताया कि यहां सालभर श्रद्धालु बच्चों का मुंडन और छेदन संस्कार कराने आते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त नवरात्र में अखंड ज्योति जलवाते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल से पहले मंदिर के शृंगार की बुकिंग तीन साल तक के लिए हो जाती थी, लेकिन अब साल में करीब 150 दिन ही बुकिंग हो पाती है।
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