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7 नौकरियां छोड़ इंजीनियरिंग सर्विसेज में पाई 7वीं रैंक, लाखों के पैकेज ठुकराने की ये थी वजह 

Sun, 11 Nov 2018 09:02 PM IST
हिमांशु मिश्रा, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्रा, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 11 Nov 2018 09:02 PM IST
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Success story of Rohit rajput from hbtu kanpur
रोहित राजपूत
बेरोजगारी का राग अलापने वालों के लिए हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के पूर्व छात्र रोहित राजपूत नजीर हैं। रोहित ने अपनी मेहनत से एक या दो नहीं बल्कि सात बड़ी नौकरियां हासिल की और आखिरकार अपना सपना साकार कर लिया।
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यूपीएससी की इंजीनियरिंग सर्विसेज एग्जाम 2018 में सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच में रोहित को सातवीं रैंक मिली है। रोहित मूल रूप से उत्तराखंड के खटिवां उधमसिंह नगर के रहने वाले हैं। पिता बृजेश कुमार एक फैक्ट्री में काम करते हैं और मां आशा कार्यकत्री हैं। बहन आशू ने एग्रीकल्चर की पढ़ाई की है। रोहित बताते हैं कि एचबीटीयू से बीटेक करने के बाद उन्हें कई नौकरियां ऑफर हुईं, लेकिन वह शुरू से ही इंजीनियरिंग सर्विसेज में जाना चाहते थे। इसलिए सारी नौकरियां छोड़ते गए। पिछले साल इंजीनियरिंग सर्विसेज में चयनित भी हुए लेकिन रैंक अच्छी नहीं मिली तो फिर से परीक्षा देने की ठान ली और इस बार अपने सपने को साकार कर लिया।
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इन नौकरियों को एक पल में ठुकरा दिया

Success story of Rohit rajput from hbtu kanpur
रोहित अपने परिजनों के साथ
- इंजीनियरिंग सर्विसेज एग्जाम 2017 के तहत एईई इन बॉर्ड रोड आर्गेनाइजेशन
- एसएससी जूनियर इंजीनियर- 2018 में ऑल इंडिया सातवीं रैंक
- कोल इंडिया में मैनेजमेंट ट्रेनी
- लखनऊ मेट्रो में असिस्टेंट मैनेजर (टॉपर भी रहे)
- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड
- एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया
रोहित बताते हैं कि उन्होंने यहां एचबीटीयू से 2016 में बीटेक किया। इसके बाद इंजीनियरिंग सर्विसेज की तैयारी करने के लिए दिल्ली चले गए। 2017 में गेट ही ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) में 740 रैंक  हासिल करके आईआईटी रुड़की के सिविल इंजीनियरिंग हाइड्रोलिक्स विषय से एमटेक शुरू कर दिया। 2018 में भी रोहित ने गेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 64वीं रैंक हासिल की।

शायरी के जरिए एचबीटीयू में हैं मशहूर
रोहित केवल पढ़ाई में ही तेज नहीं हैं, बल्कि उतने ही तेज कविता और शायरी करने में भी हैं। बताते हैं कि एचबीटीयू में सत्र 2014-15 के बीच वह छात्र साहित्यिक परिषद के सचिव थे। उन्हें कविताएं लिखना, पढ़ना और शायरी करना काफी अच्छा लगता है। इसी खूबी के चलते वे कैंपस और कवि सम्मेलनों की चर्चाओं में रहते हैं। उनकी शेर-ओ-शायरी के लिए उन्हें पूरा कैंपस जानता है।
 
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