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इस शूमेकर की सक्सेस स्टोरी जानकर हो जाएंगे हैरान, पढ़िए इनके संघर्ष की कहानी
Sat, 09 Feb 2019 05:07 PM IST
शिखा पांडेय
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 09 Feb 2019 05:07 PM IST
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स्वदेशी फुटवियर समूह के मालिक महेश कुमार रस्तोगी
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स्वदेशी फुटवियर समूह के मालिक महेश कुमार रस्तोगी की साधारण व्यापारी से बड़ा उद्योगपति बनने के पीछे बड़ी दिलचस्प कहानी है। माल खरीदने के सिलसिले में वे एक उद्योगपति की फैक्ट्री में गए थे। उन्होंने फैक्ट्री देखने की इच्छा जताई तो उस उद्योगपति ने मनाकर दिया। यह बात उनके दिमाग में बैठ गई। उसी वक्त ठाना कि उन्हें अब इस कानपुर शहर में फुटवियर निर्माता के तौर पर स्थापित होना है। महज 8,000 रुपये से व्यापार की शुरुआत की। आज शहर में उनकी पांच फैक्ट्रियां हैं। सालाना टर्नओवर 50 करोड़ रुपये से पार हो चुका है।
सिविल लाइंस निवासी महेश कुमार रस्तोगी मूलरूप से फतेहपुर के रहने वाले हैं। इन्होंने पिता श्रीराम जी रस्तोगी के साथ वर्ष 1963 में फतेहपुर से आकर यहां मेस्टन रोड में फुटवियर की छोटी सी दुकान खोली थी। उस वक्त महेश ने इंटर की परीक्षा पास की थी। वर्ष 1974 तक अनवरत मेहनत करते हुए इन्होंने अपने छोटे से काम को थोक व्यापार में तब्दील कर लिया था। बताते हैं कि उस दौर में इन्होंने प्रदेश के नंबर एक थोक फुटवियर विक्रेता की पहचान बना ली थी। इसके बाद इस व्यापार में इनके चार अन्य भाई अवधेश, दिनेश, गणेश और राकेश रस्तोगी भी हाथ बंटाने लगे। इसी बीच इन्हें एक उद्योगपति का व्यवहार आहत कर गया।
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सिविल लाइंस निवासी महेश कुमार रस्तोगी मूलरूप से फतेहपुर के रहने वाले हैं। इन्होंने पिता श्रीराम जी रस्तोगी के साथ वर्ष 1963 में फतेहपुर से आकर यहां मेस्टन रोड में फुटवियर की छोटी सी दुकान खोली थी। उस वक्त महेश ने इंटर की परीक्षा पास की थी। वर्ष 1974 तक अनवरत मेहनत करते हुए इन्होंने अपने छोटे से काम को थोक व्यापार में तब्दील कर लिया था। बताते हैं कि उस दौर में इन्होंने प्रदेश के नंबर एक थोक फुटवियर विक्रेता की पहचान बना ली थी। इसके बाद इस व्यापार में इनके चार अन्य भाई अवधेश, दिनेश, गणेश और राकेश रस्तोगी भी हाथ बंटाने लगे। इसी बीच इन्हें एक उद्योगपति का व्यवहार आहत कर गया।
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स्वदेशी फुटवियर समूह के मालिक महेश कुमार रस्तोगी
जूते चप्पल बनते हुए देखने की इच्छा जताने पर भी उस उद्योगपति ने इन्हें फैक्ट्री के अंदर जाने नहीं दिया। उसी समय इस शहर में एक और फुटवियर निर्माता का जन्म हो गया था। इन्होंने ठान लिया था कि अब उद्योगपति बनना है। थोक व्यापार भाइयों के हवाले कर इन्होंने वर्ष 1987 में फजलगंज में जूते चप्पल बनाने की फैक्ट्री खोली और ब्रांड का नाम रखा ‘स्वदेशी’।
तमाम संघर्षों को झेलते हुए इन्होंने उद्यमिता में भी महारत हासिल की। 1994 में फजलगंज की फैक्ट्री बंदकर पनकी में उससे बड़ी इकाई लगाई। 1997 में दूसरी और 2001 में तीसरी फैक्ट्री खोली। वर्तमान में पनकी औद्योगिक क्षेत्र में ही इनकी पांच औद्योगिक इकाइयां हैं।
तमाम संघर्षों को झेलते हुए इन्होंने उद्यमिता में भी महारत हासिल की। 1994 में फजलगंज की फैक्ट्री बंदकर पनकी में उससे बड़ी इकाई लगाई। 1997 में दूसरी और 2001 में तीसरी फैक्ट्री खोली। वर्तमान में पनकी औद्योगिक क्षेत्र में ही इनकी पांच औद्योगिक इकाइयां हैं।
स्वदेशी फुटवियर समूह के मालिक महेश कुमार रस्तोगी
दर्जन भर राज्यों में फैला कारोबार
बांके बिहारी का भक्त होने की वजह से महेश कुमार रस्तोगी ने सभी फैक्ट्रियों के नाम श्रीकृष्ण जी के नाम पर रखे हैं। ये पांचों फैक्ट्रियां, वृंदावन बिहारी प्राइवेट लिमिटेड, श्री बिहारी जी प्राइवेट लिमिटेड, श्री नाथ जी फुटवियर, श्री कृष्ण जी फुटवियर लिमिटेड हैं। इन फैक्ट्रियों में सौ से ज्यादा डिजाइनों में तैयार जूते-चप्पल यूपी, उत्तराखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत 12-14 राज्यों में सप्लाई होते हैं। उत्तराखंड और दिल्ली में भी फैक्ट्रियां खोली थीं, लेकिन उन्हें समेटकर कानपुर में कारोबार का विस्तार किया।
युवाओं को संदेश
युवा नौकरी के पीछे न भागें। यदि दिमाग में कोई बिजनेस आइडिया है तो उस पर काम करें। लगन और मेहनत से किए गए काम में सफलता मिलती है। एक बात ध्यान रखें जो भी उत्पाद बेचें या बनाएं उससे एक दिन में कमाने की न सोचें। व्यवसाय दीर्घकालीन लाभ के लिए होता है।
बांके बिहारी का भक्त होने की वजह से महेश कुमार रस्तोगी ने सभी फैक्ट्रियों के नाम श्रीकृष्ण जी के नाम पर रखे हैं। ये पांचों फैक्ट्रियां, वृंदावन बिहारी प्राइवेट लिमिटेड, श्री बिहारी जी प्राइवेट लिमिटेड, श्री नाथ जी फुटवियर, श्री कृष्ण जी फुटवियर लिमिटेड हैं। इन फैक्ट्रियों में सौ से ज्यादा डिजाइनों में तैयार जूते-चप्पल यूपी, उत्तराखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत 12-14 राज्यों में सप्लाई होते हैं। उत्तराखंड और दिल्ली में भी फैक्ट्रियां खोली थीं, लेकिन उन्हें समेटकर कानपुर में कारोबार का विस्तार किया।
युवाओं को संदेश
युवा नौकरी के पीछे न भागें। यदि दिमाग में कोई बिजनेस आइडिया है तो उस पर काम करें। लगन और मेहनत से किए गए काम में सफलता मिलती है। एक बात ध्यान रखें जो भी उत्पाद बेचें या बनाएं उससे एक दिन में कमाने की न सोचें। व्यवसाय दीर्घकालीन लाभ के लिए होता है।
- महेश कुमार रस्तोगी, प्रबंध निदेशक, स्वदेशी फुटवियर समूह