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Kanpur News: साल भर पढ़ाईकी, अब पता चला कि काॅलेज के छात्र ही नहीं

Mon, 16 Feb 2026 02:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 16 Feb 2026 02:06 AM IST
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Studied for a whole year, now I came to know that not only the college students
कानपुर। बिल्हौर इंटर कॉलेज में एनटीटी और अकाउंटेंट विषय को लेकर चल रहा विवाद गहराता जा रहा है। बोर्ड परीक्षा शुरू होने में दो दिन शेष हैं लेकिन इंटरमीडिएट के 13 छात्र अब भी प्रवेश पत्र और विषय की स्थिति स्पष्ट न होने से परेशान हैं। छात्रों का आरोप है कि वे पिछले तीन सालों से इसी विद्यालय में पढ़ रहे हैं। प्रधानाचार्य को नियमित फीस जमा करते हैं, इसके बावजूद एनटीटी के प्रवेश पत्र नहीं दिए गए। प्रबंधक का कहना है कि इनमें से नौ छात्र उनके कॉलेज के नहीं हैं।
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छात्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों से उन्हें एनटीटी का छात्र बताकर कक्षा में बैठने से रोका जा रहा है। परीक्षा नजदीक आने के बावजूद प्रवेश पत्र और विषय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। छात्रों ने डीआईओएस कार्यालय पहुंचकर शिकायत भी दर्ज कराई है लेकिन अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला। इंटर की छात्रा काजल बताती हैं कि घर वाले कहते हैं कि ऐसा विषय क्यों लिया जो प्रवेश पत्र तक नहीं मिला। अब तो कॉलेज ने यहां की छात्रा मानने से ही इन्कार कर दिया हैं।
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इन 13 में से चार छात्रों खुर्शीद आलम, उजैर, अदनान और कदीर ने शिक्षकों के कहने पर एनटीटी से विषय बदलकर अकाउंटेंट में प्रवेश लिया था और उसी विषय की पढ़ाई कर रहे थे। इसके बावजूद बोर्ड से उनका प्रवेश पत्र एनटीटी विषय का जारी हो गया। इससे छात्र परीक्षा को लेकर असमंजस में हैं और विषय सुधार की मांग कर रहे हैं। खुर्शीद बताते हैं कि शिक्षकों ने कहा था कि एनटीटी बेकार विषय है, भविष्य में इसकी कोई उपयोगिता नहीं। इसके बाद हम चारों ने अकाउंटेंट का चयन किया था।
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प्रबंधक प्रभाकर श्रीवास्तव ने बताया कि दिसंबर 2024 में विद्यालय का बोर्ड पासवर्ड हैक हो गया था जिससे सिर्फ चार छात्रों का एनटीटी में वैध प्रवेश हो पाया जबकि अन्य छात्र मेरे विद्यालय के नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनटीटी की गेस्ट टीचर चित्रांशी ने छात्रों के गलत तरीके से कक्षा 11 के अंकपत्र जारी किए हैं। चित्रांशी का कहना है कि यदि अंकपत्र मैंने जारी किए हैं तो विद्यालय ने विरोध क्यों नहीं किया। 13 छात्र लगातार कक्षा 12 में दाखिला लेकर प्रतिदिन स्कूल आते रहे। उन्होंने यह भी बताया कि इंटरमीडिएट में व्यावसायिक विषय समाप्त करने के चक्कर में बच्चों का भविष्य दांव लगा दिया गया। सूत्रों ने बताया कि अंक पत्र में भी प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर हैं।

विद्यालय में दाखिला देना विद्यालय प्रशासन का कार्य है न कि टीचर का। मामले की जांच कराकर शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। -संतोष कुमार राय, डीआईओएस
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