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Kanpur News: उत्तर भारत के विद्यार्थी सीख सकेंगे भरतनाट्यम
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कानपुर। अब कानपुर सहित उत्तर भारत के विद्यार्थी दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम का विधिवत प्रशिक्षण आत्मालय अकादमी बंगलूरू में जाकर या ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की कला शिक्षा और कॅरिअर के नए अवसर मिलेंगे। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में स्कूल ऑफ क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स ने वीएसएसडी कॉलेज की संस्कारशाला और बंगलूरू स्थित आत्मालय अकादमी (भरतनाट्यम एवं शास्त्रीय शिक्षा को समर्पित संस्था) के साथ समझौता किया।
समझौते पर विवि की ओर से रजिस्ट्रार राकेश कुमार मिश्रा, वीएसएसडी कॉलेज की प्रबंध समिति सचिव सीए नीतू सिंह और आत्मालय अकादमी की डॉ. पद्मजा वेंकटेश सुरेश ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू से छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की कला शिक्षा और कॅरिअर के अवसर मिलेंगे। साथ ही यह पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करेगी। दक्षिण भारतीय कलाकार उत्तर भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को समझ पाएंगे, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा। शिक्षकों को भी भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत ग्रंथों पर संयुक्त शोध करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने ऑनलाइन की। मुख्य अतिथि डॉ. वंदना पाठक ने कहा कि नृत्य केवल कला नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। सीए नीतू सिंह ने छात्रों को कला सीखने में सहयोग देने का आश्वासन दिया। रजिस्ट्रार राकेश कुमार मिश्रा ने कहा कि प्राध्यापक भी मिलकर भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत ग्रंथों पर शोध कर सकेंगे।
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मुख्य वक्ता डॉ. पद्मजा वेंकटेश सुरेश ने नाट्यशास्त्र की समसामयिक उपयोगिता पर जानकारी दी। अंत में उनकी शिष्या अपर्णा डोड्डामालूर, श्रेया श्रीनाथ और आर्या भारद्वाज ने भरतनाट्यम शैली में नृत्यार्पणम की मनमोहक प्रस्तुति दी। संचालन शोध छात्रा तेजस्वी ने किया। इस अवसर पर प्रो. शोभा मिश्रा, डॉ. रश्मि गोरे, डॉ. मिठाई लाल और सीडीसी निदेशक प्रो. आरके द्विवेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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समझौते पर विवि की ओर से रजिस्ट्रार राकेश कुमार मिश्रा, वीएसएसडी कॉलेज की प्रबंध समिति सचिव सीए नीतू सिंह और आत्मालय अकादमी की डॉ. पद्मजा वेंकटेश सुरेश ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू से छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की कला शिक्षा और कॅरिअर के अवसर मिलेंगे। साथ ही यह पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करेगी। दक्षिण भारतीय कलाकार उत्तर भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को समझ पाएंगे, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा। शिक्षकों को भी भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत ग्रंथों पर संयुक्त शोध करने का अवसर मिलेगा।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने ऑनलाइन की। मुख्य अतिथि डॉ. वंदना पाठक ने कहा कि नृत्य केवल कला नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। सीए नीतू सिंह ने छात्रों को कला सीखने में सहयोग देने का आश्वासन दिया। रजिस्ट्रार राकेश कुमार मिश्रा ने कहा कि प्राध्यापक भी मिलकर भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत ग्रंथों पर शोध कर सकेंगे।
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मुख्य वक्ता डॉ. पद्मजा वेंकटेश सुरेश ने नाट्यशास्त्र की समसामयिक उपयोगिता पर जानकारी दी। अंत में उनकी शिष्या अपर्णा डोड्डामालूर, श्रेया श्रीनाथ और आर्या भारद्वाज ने भरतनाट्यम शैली में नृत्यार्पणम की मनमोहक प्रस्तुति दी। संचालन शोध छात्रा तेजस्वी ने किया। इस अवसर पर प्रो. शोभा मिश्रा, डॉ. रश्मि गोरे, डॉ. मिठाई लाल और सीडीसी निदेशक प्रो. आरके द्विवेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।