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Kanpur News: छात्रों ने शोध पत्रों में बताए पत्रकारिता के विभिन्न आयाम
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सीएसजेएमयू स्थित सिनेट हाल में पत्रकारिता एंव जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष
- फोटो : संवाद
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के बैनर तले आयोजित अंतरराष्ट्रीय काॅन्फ्रेंस के दूसरे और अंतिम तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इसमें विभाग के 150 छात्र-छात्राओं ने अपने शोध पत्र पढ़े। इनमें डिजिटिलाइजेशन, एआई का इस्तेमाल, पत्रकारिता के विभिन्न आयाम, ग्राउंड रिपोर्टिंग की स्थिति समेत अन्य पहलुओं को उकेरा गया। तकनीकी सत्रों के विशेषज्ञों ने कहा कि पत्रकारिता और जनसंचार का भविष्य उज्जवल है।
पत्रकारिता के गौरवमयी 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर दो दिनों तक चले संवाद में देश दुनिया के शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं पत्रकारों ने पत्रकारिता के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। दूसरे दिन की शुरुआत छात्र छात्राओं के शोध पत्र की प्रस्तुति से हुई। चार सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में ऑनलाइन माध्यम से 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पत्रकारिता से जुड़े विषयों का शोध पत्र वाचन किया। ऑफलाइन माध्यम से 100 से अधिक स्नातक व परास्नातक, शोध छात्रों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए ।
विमर्श सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पाठक ने कहा कि हर पांच साल में पत्रकारिता बदलती है। कार्यक्रम में यूक्रेन से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े ताराश शेव्यचेन्को कीव, राष्ट्रीय विश्वविद्यालय यूक्रेन से प्रो. यूरी ने हिंदी की अलख के संंबंध में बताया। मुख्य वक्ता बीबीएयू लखनऊ के प्रोफेसर गोविंद पांडेय ने बताया कि कैसे कानपुर के जुगल किशोर शुक्ल ने कोलकाता में हिंदी की अलख जलाई।
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समापन सत्र में मुख्य अतिथि माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जगदीश उपासने ने कहा कि छात्रों को ज्यादा से ज्यादा पढ़ना चाहिए। कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. ओम जी उपाध्याय भी जुड़े। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसजेएमयू के प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने की। इस अवसर पर प्रोफेसर राममोहन पाठक, अरुण भगत, पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी, डॉ. योगेंद्र कुमार पांडे, डॉ. जीतेंद्र डबराल, डॉ. ओम शंकर गुप्ता, डॉ. रश्मि गौतम आदि मौजूद रहे।
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पत्रकारिता के गौरवमयी 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर दो दिनों तक चले संवाद में देश दुनिया के शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं पत्रकारों ने पत्रकारिता के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। दूसरे दिन की शुरुआत छात्र छात्राओं के शोध पत्र की प्रस्तुति से हुई। चार सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में ऑनलाइन माध्यम से 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पत्रकारिता से जुड़े विषयों का शोध पत्र वाचन किया। ऑफलाइन माध्यम से 100 से अधिक स्नातक व परास्नातक, शोध छात्रों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए ।
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विमर्श सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पाठक ने कहा कि हर पांच साल में पत्रकारिता बदलती है। कार्यक्रम में यूक्रेन से ऑनलाइन माध्यम से जुड़े ताराश शेव्यचेन्को कीव, राष्ट्रीय विश्वविद्यालय यूक्रेन से प्रो. यूरी ने हिंदी की अलख के संंबंध में बताया। मुख्य वक्ता बीबीएयू लखनऊ के प्रोफेसर गोविंद पांडेय ने बताया कि कैसे कानपुर के जुगल किशोर शुक्ल ने कोलकाता में हिंदी की अलख जलाई।
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समापन सत्र में मुख्य अतिथि माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जगदीश उपासने ने कहा कि छात्रों को ज्यादा से ज्यादा पढ़ना चाहिए। कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. ओम जी उपाध्याय भी जुड़े। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसजेएमयू के प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने की। इस अवसर पर प्रोफेसर राममोहन पाठक, अरुण भगत, पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी, डॉ. योगेंद्र कुमार पांडे, डॉ. जीतेंद्र डबराल, डॉ. ओम शंकर गुप्ता, डॉ. रश्मि गौतम आदि मौजूद रहे।