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Kanpur News: कार न मिलने पर बरात लेकर नहीं आया दूल्हा
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इटावा। दहेज में कार न मिलने पर दूल्हा बरात लेकर नहीं आया। देर शाम दूल्हे के पिता ने फोन करके कहा कि दहेज में कार दोगे तो बरात लेकर आएंगे। दुल्हन के पिता ने इस मामले में सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
जसवंतनगर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ने थाने में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि मैनपुरी जिले के थाना बरनाहल गणेश गांव निवासी भूदेव ने उनकी बेटी की शादी अंकित कुमार निवासी कसौली थाना बरनाहल, जिला मैनपुरी से तय कराई थी। अंकित के पिता रामपाल, चाचा अवनीश और मां निर्मला देवी घर आए और पुत्री को देखकर सब राजी हुए और रस्म पूरी हुई। उसने दो लाख रुपये रुकाई के रूप में दिए। 26 अगस्त को घर जाकर आठ लाख रुपये का सामान व कपड़ा रक्षाबंधन के दो दिन पहले रामपाल को मध्यस्थ भूदेव के भाई मुकेश के सामने दिए। दोबारा चार लाख पचास हजार रुपये 21 नवंबर को दिये। दोनों पक्षों की सहमति से शादी की तारीख 18 दिसंबर तय हुई। 15 दिसंबर को लग्न की रस्म की गई। इसमें एक लाख रुपए दिया गया।
17 दिसंबर को रामपाल सिंह का फोन आया और उसने कहा कि दो लाख रुपये, सोने की चेन व अंगूठी दे जाओ। नेकराम ने अपने पुत्र अंकुल व अंकित से रुपये व जेवर भिजवाया। शादी की तैयारी बंधन मैरिज होम छिमारा रोड जसवंतनगर में की गई। रामपाल शाक्य से बरात वाले दिन दो बजे तक बराबर फोन से बात होती रही। शाम तक बरात नहीं आने पर मध्यस्थ भूदेव शाक्य से संपर्क किया। भूदेव रामपाल के घर पहुंचे। पता चला कि घर पर कोई नहीं है। घरों पर ताले लगे हैं। देर शाम एक बार फोन पर रामपाल सिंह से बात हुई तो उसने गाली-गलौज करते हुए पुत्र के लिए कार की मांग की। कार नहीं देने पर बरात लाने से इंकार कर दिया। जिसके बाद उसे पता चला कि उसकी रकम हड़प ली गई बरात न आने पर मेरी क्षेत्र व रिश्तेदारी में काफी बदनामी हुई है।
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जसवंतनगर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ने थाने में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि मैनपुरी जिले के थाना बरनाहल गणेश गांव निवासी भूदेव ने उनकी बेटी की शादी अंकित कुमार निवासी कसौली थाना बरनाहल, जिला मैनपुरी से तय कराई थी। अंकित के पिता रामपाल, चाचा अवनीश और मां निर्मला देवी घर आए और पुत्री को देखकर सब राजी हुए और रस्म पूरी हुई। उसने दो लाख रुपये रुकाई के रूप में दिए। 26 अगस्त को घर जाकर आठ लाख रुपये का सामान व कपड़ा रक्षाबंधन के दो दिन पहले रामपाल को मध्यस्थ भूदेव के भाई मुकेश के सामने दिए। दोबारा चार लाख पचास हजार रुपये 21 नवंबर को दिये। दोनों पक्षों की सहमति से शादी की तारीख 18 दिसंबर तय हुई। 15 दिसंबर को लग्न की रस्म की गई। इसमें एक लाख रुपए दिया गया।
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17 दिसंबर को रामपाल सिंह का फोन आया और उसने कहा कि दो लाख रुपये, सोने की चेन व अंगूठी दे जाओ। नेकराम ने अपने पुत्र अंकुल व अंकित से रुपये व जेवर भिजवाया। शादी की तैयारी बंधन मैरिज होम छिमारा रोड जसवंतनगर में की गई। रामपाल शाक्य से बरात वाले दिन दो बजे तक बराबर फोन से बात होती रही। शाम तक बरात नहीं आने पर मध्यस्थ भूदेव शाक्य से संपर्क किया। भूदेव रामपाल के घर पहुंचे। पता चला कि घर पर कोई नहीं है। घरों पर ताले लगे हैं। देर शाम एक बार फोन पर रामपाल सिंह से बात हुई तो उसने गाली-गलौज करते हुए पुत्र के लिए कार की मांग की। कार नहीं देने पर बरात लाने से इंकार कर दिया। जिसके बाद उसे पता चला कि उसकी रकम हड़प ली गई बरात न आने पर मेरी क्षेत्र व रिश्तेदारी में काफी बदनामी हुई है।
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