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दल-बदलने में माहिर दबंग MLA कुलदीप सिंह सेंगर की 10 कहानियां, विवादों-आरोपों से इनका पुराना रिश्ता
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 11 Apr 2018 09:01 AM IST
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भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
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UP की राजनीति में राजधानी लखनऊ से सटे उन्नाव जिले में सक्रिय BJP विधायक कुलदीप सेंगर उनके भाई अतुल सेंगर पर हत्या और बलात्कार के आरोप ने सियासी गर्मी बढ़ा दी है। रेप का आरोप लगाने वाली लड़की के पिता की जेल में ही मौत हो गई। आरोप है दबंग विधायक के इशारे पर पिता को पीट-पीटकर मार डाला गया। मामला एक साल पुराना है लेकिन अब इस मामले ने योगी सरकार के कान खड़े कर दिए हैं। दो दिन पहले रेप पीड़ित लड़की मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मादाह करने गई थी पुलिस तत्काल उसे गिरफ्तार कर थाने ले गई। उसी दिन विधायक के भाई अतुल सेंगर की पिटाई से घायल रेप पीड़िता के पिता को उल्टा फंसाकर जेल भेज दिया गया। जेल में उसकी इलाज के अभाव में मौत हो गई। मंगलवार को विधायक के भाई अतुल सेंगर को गिरफ्तार कर लिया गया है। बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर हमेशा से ही विवादों में घिरे रहे हैं।
भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
कुलदीप सेंगर मूल रूप से फतेहपुर जिले के रहने वाले हैं। उन्नाव के माखी थाना क्षेत्र के सराय थोक पर उनका ननिहाल है वह यहीं आकर बस गए। उन्नाव की बांगरमऊ सीट से विधायक हैं. कुलदीप सेंगर ने यूथ कांग्रेस से राजनीति की शुरूआत की और 2002 में भगवंत नगर से बीएसपी के टिकट पर विधायक बने। इन्हें रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया का बेहद करीबी माना जाता है। ये दलबदलू नेता के नाम से भी चर्चित हैं।
भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
चार बार से लगातार विधायक बन रहे कुलदीप सेंगर कभी चुनाव नहीं हारे हैं। यूपी की सियासत में कुलदीप चल रही हवा का रुख भांप लेते हैं। ऐसे में वो चार बार विधायक बने। तीन बार उनका क्षेत्र अलग-अलग रहा है। सेंगर ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी। साल 2002 में विधानसभा के चुनाव आए तो कुलदीप ने कांग्रेस को छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया। 1996 के चुनावों में 10 हजार वोटों से हारी हुई उन्नाव सदर की सीट से मायावती ने कुलदीप को उम्मीदवार बना दिया। कुलदीप चुनावी मैदान में उतरे और कांग्रेस के प्रत्याशी शिव पाल को करीब चार हजार वोट से मात दे दी। उससे पहले 1996 के चुनाव में ये सीट सपा के दीपक कुमार के पास थी। इस चुनावी जीत के साथ ही कुलदीप की छवि बाहुबली की बननी शुरू हो गई थी।
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भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
2012 में एसपी के साथ आये और पार्टी का माहौल खराब हुआ तो 2017 में बीजेपी का झंडा पकड़ विधायक बन गए। पत्नी से से लेकर भाईयों तक, सभी में किसी न किसी पद पर रहने का जुनून रहा। कुलदीप की पत्नी संगीता सेंगर को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया गया, भाई मनोज सेंगर ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। खुद लोकसभा के लिए अपनी पिच तैयार कर रहे हैं। कुलदीप के तीसरे भाई अतुल सिंह राजनीतिक साम्राज्य का कामकाज संभालते हैं।
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भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
पीड़ित लड़की के चाचा महेश सिंह का कहना है कि विधायक के खिलाफ पुलिस कुछ नहीं कर सकती। बयान से विधायक कुलदीप का नाम हटाया गया है। महेश सिंह की मानें तो विधायक के इशारे पर उनके खिलाफ 21 अक्टूबर से लेकर 15 नवंबर के बीच माखी और सफीपुर कोतवाली में चार मुकदमे दर्ज कराये गए। मृतक पप्पू सिंह के खिलाफ भी कई मुकदमे दर्ज कराये गए।