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मिलिए उस शख्स से जिसका जीवन समर्पित है बेजुबानों और इंसानों की सेवा के लिए
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 16 Apr 2018 03:54 PM IST
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महेश चंद्र त्रिपाठी
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इस मतलबी दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनका जीवन दूसरों की सेवा के लिए समर्पित है। ऐसे लोग खुद को कभी सामने नहीं लाना चाहते, बस चुपचाप अपना काम करते रहते हैं। आज हम आपको कानपुर शहर की एक ऐसी शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका पूरा दिन बेजुबानों और इंसानों की सेवा में निकल जाता है। इनका नाम है महेश चंद्र त्रिपाठी। पेशे से महेश एक उद्यमी हैं और सेना के लिए उत्पादों की सप्लाई करते हैं।
महेश चंद्र त्रिपाठी
आपको जानकर हैरानी होगी कि सेना के पैराशूट, हैलीकॉप्टर और एम्युनिशन बॉक्स के हैंडल और मजबूत रस्सियां समेत तमाम तरह के मजबूत प्रोडक्ट कानपुर में बनते हैं। शहर का सूती धागा और कपड़ा आयुध कारखानों में हथियारों की सुरक्षा के काम में भी आता है। कानपुर की एशिया टेक्सटाइल कोलकाता, पुणे, मुंबई, जबलपुर, नीलगिरी, खमरिया और भूसावल की ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों को कई वर्षों से अपने प्रोडक्ट सप्लाई करती आ रही है। इस टेक्सटाइल कंपनी को चलाने वाले महेश चंद्र त्रिपाठी का पूरा जीवन ‘सेना के लिए काम और समाज के लिए दान’ को समर्पित हैं।
जानिए महेश चंद्र के बारे में कुछ खास बातें....
महेश चंद्र त्रिपाठी
1972 में एशिया टेक्सटाइल के नाम से कंपनी शुरू कर दी
साल 1965 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद कानपुर के महेश चंद्र त्रिपाठी ने इंटरनेशनल प्रोडक्ट्स कंपनी में बतौर सप्लाई अधिकारी अपनी पहली और आखिरी नौकरी की शुरुआत की। डिफेंस के लिए आइटम बनाने वाली कंपनी के साथ काम करते हुए महेश ने कई अनुभव प्राप्त किए और ठीक 7 साल बाद 1972 में एशिया टेक्सटाइल के नाम से चमनगंज में खुद की कंपनी शुरू कर दी। कानपुर की एशिया टेक्सटाइल कंपनी तमाम आयुध निर्माणी संस्थानों को बमों की पैकिंग वाले टेप मीडियम प्रूफ, गोला बारूद लोड करने वाले वेविन कॉटन बैंड, एम्युनिशन बॉक्स के हैंडल जैसे प्रोडक्ट सप्लाई कर रही है। महेश चंद्र त्रिपाठी के परिवार में पत्नी सरला त्रिपाठी और वह खुद हैं। नि:सांतान दंपति ने समाज सेवा को अपना धर्म बना लिया। कई गरीब बेटियों की शादियां कराईं, मंदिरों का निर्माण कराया और गौशाला व वृद्धाश्रम खोले।
साल 1965 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद कानपुर के महेश चंद्र त्रिपाठी ने इंटरनेशनल प्रोडक्ट्स कंपनी में बतौर सप्लाई अधिकारी अपनी पहली और आखिरी नौकरी की शुरुआत की। डिफेंस के लिए आइटम बनाने वाली कंपनी के साथ काम करते हुए महेश ने कई अनुभव प्राप्त किए और ठीक 7 साल बाद 1972 में एशिया टेक्सटाइल के नाम से चमनगंज में खुद की कंपनी शुरू कर दी। कानपुर की एशिया टेक्सटाइल कंपनी तमाम आयुध निर्माणी संस्थानों को बमों की पैकिंग वाले टेप मीडियम प्रूफ, गोला बारूद लोड करने वाले वेविन कॉटन बैंड, एम्युनिशन बॉक्स के हैंडल जैसे प्रोडक्ट सप्लाई कर रही है। महेश चंद्र त्रिपाठी के परिवार में पत्नी सरला त्रिपाठी और वह खुद हैं। नि:सांतान दंपति ने समाज सेवा को अपना धर्म बना लिया। कई गरीब बेटियों की शादियां कराईं, मंदिरों का निर्माण कराया और गौशाला व वृद्धाश्रम खोले।
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डिफेंस के लिए महेश बनाते हैं ये आइटम
महेश चंद्र त्रिपाठी की कहानी
- टेप कॉटन फाइन सुप्रीफाइन
- टेप कॉटन फॉर पैराशूट
- टेप कॉटन फॉर इंसुलेशन
- टेप कॉटन मीडियम फॉर एम्युनिशन परपस
- बमों की सुरक्षा के लिए बैग किट
- हेलीकॉप्टन के लिए रस्सी की सीढ़ियां
- सेना के लिए पतली, कभी न टूटने वाली रस्सियां
- टेप कॉटन फॉर पैराशूट
- टेप कॉटन फॉर इंसुलेशन
- टेप कॉटन मीडियम फॉर एम्युनिशन परपस
- बमों की सुरक्षा के लिए बैग किट
- हेलीकॉप्टन के लिए रस्सी की सीढ़ियां
- सेना के लिए पतली, कभी न टूटने वाली रस्सियां
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समाजसेवा के क्षेत्र में महेश के कुछ कार्य
महेश चंद्र त्रिपाठी
महेश चंद्र त्रिपाठी कानपुर शहर के मशहूर उद्योगपतियों की श्रेणी में आते हैं। उनकी कमाई का अधिकतर हिस्सा समाज और पशु-पक्षियों की सेवा के काम आता है। महेश के अनुसार 1972 में पैदा होते ही बेटी की मौत हो जाने के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी सरला त्रिपाठी ने अपना जीवन दूसरों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
- पक्षियों के लिए हर रोज 10 किलो बेसन की गोलियां बनवाते हैं
- मां अन्नपूर्णा के नाम से गौशाला
- बिठूर में वृद्धाश्रम
- जमीन बेचकर गरीब बेटियों की शादी
- निर्धनों को अपने घर में पनाह
- बीमार जानवरों के इलाज के लिए लगाए प्राइवेट डॉक्टर
- पक्षियों के लिए हर रोज 10 किलो बेसन की गोलियां बनवाते हैं
- मां अन्नपूर्णा के नाम से गौशाला
- बिठूर में वृद्धाश्रम
- जमीन बेचकर गरीब बेटियों की शादी
- निर्धनों को अपने घर में पनाह
- बीमार जानवरों के इलाज के लिए लगाए प्राइवेट डॉक्टर