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बहन की शादी में नहीं मिली बर्फ, गुस्से से आगबबूला सिंघानिया ने खोल दी थी खुद की बर्फ फैक्ट्री

Sun, 13 Aug 2017 11:31 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 13 Aug 2017 11:31 AM IST
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story about rich singhania family
सिंघानिया परिवार

देश की बड़ी रईस ‘सिंघानिया फैमिली’ इस समय सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। कारण है विजयपत सिंघानिया और बेटे गौतम सिंघानिया के बीच रेमंड कंपनी के स्वामित्व को लेकर गहराया विवाद। कानपुर के इस प्रतिष्ठित अमीर खानदान ने केवल यूपी को ही नहीं बल्कि भारत के दूसरे शहरों को भी बहुत कुछ बिना किसी स्वार्थ के दिया। शहर का मशहूर जेके मंदिर हो या धर्मशालायें सिंघानिया परिवार के रहम पर आज भी कई लोगों के परिवार पल रहे हैं। आज हम बताते हैं इस परिवार के बारे में कुछ रोचक बातें...

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सिंघानिया परिवार
सर पदमपत सिंघानिया जिनका जन्म 1904 में हुआ। वह भारतीय उद्योगपति और भारतीय संविधान सभा के सदस्य भी थे। वह लाला जुग्गीलाल कमलापति के सबसे बड़े पोते और लाला कमलापत सिंघानिया के बेटे थे। उनके भाई कैलाशपत सिंघानिया थे जो रेमंड्स कंपनी का स्वामित्व रखते थे और लक्ष्मीपत सिंघानिया भी इसी कंपनी के मालिकों में से एक हुआ करते थे। पदमपत सिंघानिया जे के मिल्स के अध्यक्ष थे और जे के संगठन का हिस्सा भी।
 
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सर पदमपत सिंघानिया पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू के साथ
उन्हें 1 943 में न्यू ईयर ऑनर्स की सूची में भी शामिल किया गया था। 23 फरवरी को नई दिल्ली में वाइसराय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) में भारत के वायसराय, लिनलिथगो के मार्क्वेस ने अपने नाइटहुड के साथ निवेश किया। 1 947 में आजादी के बाद, वह भारतीय संविधान सभा के सदस्य बने  लेकिन उन्होंने राजनीति में प्रवेश नहीं किया।
 
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सिंघानिया
'सर पदमपत सिंघानिया, मैन ऑफ ऑल सीजन्स'
गौर हरि और गोविंद हरि की किताब 'सर पदमपत सिंघानिया, मैन ऑफ ऑल सीजन्स' में इस कंपनी और सिंघानिया परिवार के इतिहास बताया गया है। किताब में  रेमंड्स कंपनी के संस्थापक सर पदमपत सिंघानिया महज 30 साल की उम्र में फिक्की के प्रेसिडेंट बन गए थे। किताब के लेखक गौर हरि लिखते हैं बात 1930 के दशक की है।
 
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सिंघानिया
पदमपत सिंघानिया की बहन की शादी थी। गर्मी का सीजन था, तो शादी में बर्फ की जरूरत पड़ी। कंपनी के कर्मचारी बार-बार भार्गव आइस फैक्ट्री में जाकर बर्फ का इंतजाम कर रहे थे। इत्तेफाक से उस फैक्ट्री में बर्फ खत्म हो गई। इसके बावजूद सिंघानिया के कर्मचारी बर्फ के लिए फैक्ट्री पहुंच रहे थे।
 
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