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हैरान मत हों...बहुत से असाध्य रोगों की दवा रोगी के जिस्म में होती है, पढ़िए ये रिपोर्ट
Wed, 24 Jul 2019 03:40 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 24 Jul 2019 03:40 PM IST
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डॉक्टरों ने दी जानकारी डायबिटीज की दवा रोगी के ही शरीर में है
- फोटो : अमर उजाला
बहुत से असाध्य रोगों की दवा रोगी के अपने ही जिस्म में होती है। रोगी की अस्थि मज्जा में पाई जाने वाली स्टेम सेल से डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है। अस्थि मज्जा से स्टेम सेल निकालकर इसे इंजेक्शन के जरिये रोगी के खून में पहुंचा दिया जाता है।
यह बात मंगलवार को मुंबई के स्टेम सेल विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत ने मेडिकल कॉलेज कानपुर के लेक्चर थिएटर-3 में आयोजित कार्यक्रम में डॉक्टरों को बताई। उन्होंने बताया कि इसी तरह स्टेम सेल से स्पाइनल कॉर्ड की क्षति को सुधारा जा सकता है।
डॉ. राजपूत ने बताया कि शोध के दौरान हाई ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए डायबिटीज रोगियों के पैंक्रियाज और खून में अलग-अलग स्टेम सेल का इंजेक्शन लगाया गया लेकिन दोनों का प्रभाव एक जैसा रहा। उन्होंने बताया कि शरीर के अंदर जख्म कहीं भी हो, वह कीमोटेक्टिक सिग्नल छोड़ता है।
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खून में स्टेम सेल डालते ही यह उस सिग्नल को पकड़ लेती है और बीमारग्रस्त एरिया में जम जाती है। बीमार अंग ठीक हो जाता है। उन्होंने बताया कि मांसपेशियों की बीमारी, न्यूरो, गठिया आदि बीमारियों में स्टेम सेल कारगर है। पार्किंसन, गठिया ग्रेड 4 आदि में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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यह बात मंगलवार को मुंबई के स्टेम सेल विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत ने मेडिकल कॉलेज कानपुर के लेक्चर थिएटर-3 में आयोजित कार्यक्रम में डॉक्टरों को बताई। उन्होंने बताया कि इसी तरह स्टेम सेल से स्पाइनल कॉर्ड की क्षति को सुधारा जा सकता है।
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डॉ. राजपूत ने बताया कि शोध के दौरान हाई ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए डायबिटीज रोगियों के पैंक्रियाज और खून में अलग-अलग स्टेम सेल का इंजेक्शन लगाया गया लेकिन दोनों का प्रभाव एक जैसा रहा। उन्होंने बताया कि शरीर के अंदर जख्म कहीं भी हो, वह कीमोटेक्टिक सिग्नल छोड़ता है।
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खून में स्टेम सेल डालते ही यह उस सिग्नल को पकड़ लेती है और बीमारग्रस्त एरिया में जम जाती है। बीमार अंग ठीक हो जाता है। उन्होंने बताया कि मांसपेशियों की बीमारी, न्यूरो, गठिया आदि बीमारियों में स्टेम सेल कारगर है। पार्किंसन, गठिया ग्रेड 4 आदि में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।