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कानपुर: कुंभ के दौरान बंद नहीं, 24 घंटे निगरानी में रहेंगी टेनरियां
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 17 Oct 2018 10:38 AM IST
सार
- टेनरियों की तीन माह की बंदी का फैसला वापस लेगी सरकार
- हफ्तेभर में सख्त पाबंदियों के साथ नई गाइड लाइन जारी करेगी सरकार
- 24 घंटे टेनरियों की सरकारी एजेंसियों करेंगी निगरानी
- उल्लंघन पर होगी तालाबंदी, दायरे में गंगा किनारे की सभी इकाइयां
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विस्तार
राज्य सरकार इलाहाबाद कुंभ के दौरान टेनरियों और गंगा किनारे स्थित अन्य औद्योगिक इकाइयों को लगातार तीन माह बंद करने का फैसला वापस लेगी। इसकी जगह सरकार टेनरियों और अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए हफ्तेभर में नई गाइड लाइन जारी करेगी। इसके तहत इकाइयों को कई पाबंदियों का सख्ती से पालन करना होगा। गाइड लाइन के उल्लंघन पर संबंधित इकाई पर तत्काल तालाबंदी की कार्रवाई का प्रावधान होगा।
पांच दिनों से प्रदेश सरकार के पर्यावरण मंत्रालय, नगर विकास मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी कुंभ के दौरान औद्योगिक इकाइयों के लिए गाइड लाइन तैयार कर रहे हैं। इसमें खास यह है कि टेनरियां लगातार तीन माह तक सरकारी एजेंसियों की निगरानी में रहेंगी। इन एजेंसियों के जरिये टेनरियों पर 24 घंटे नजर रखी जाएगी। निगरानी एजेंसियों पर भी जल्द फैसला लिया जाएगा।
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पांच दिनों से प्रदेश सरकार के पर्यावरण मंत्रालय, नगर विकास मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी कुंभ के दौरान औद्योगिक इकाइयों के लिए गाइड लाइन तैयार कर रहे हैं। इसमें खास यह है कि टेनरियां लगातार तीन माह तक सरकारी एजेंसियों की निगरानी में रहेंगी। इन एजेंसियों के जरिये टेनरियों पर 24 घंटे नजर रखी जाएगी। निगरानी एजेंसियों पर भी जल्द फैसला लिया जाएगा।
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माना जा रहा है कि आईआईटी के अलावा चेन्नई लेदर इंस्टीट्यूट, एनआईटी इलाहाबाद और बीएचयू आईआईटी को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी। किस इकाई से कितना प्रदूषित पानी निकल रहा है और वह कहां जा रहा है, इसकी जानकारी लिखित में सभी संचालकों को रोजाना देनी होगी। बताया जा रहा है कि यह गाइड लाइन सिर्फ 15 मार्च तक के लिए होगी। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में ही जांच एजेंसियां कानपुर आ जाएंगी।
लोकसभा चुनाव के चलते लिया फैसला
लगातार तीन माह की बंदी के फैसले से सरकार इसलिए पीछे हटी है, क्योंकि अगले वर्ष लोकसभा चुनाव भी होने हैं। कहा जा रहा है कि औद्योगिक इकाइयों की लंबी बंदी से उद्यमियों के कारोबार में बड़ा नुकसान होगा। इसी वजह से बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की गई है।
लोकसभा चुनाव के चलते लिया फैसला
लगातार तीन माह की बंदी के फैसले से सरकार इसलिए पीछे हटी है, क्योंकि अगले वर्ष लोकसभा चुनाव भी होने हैं। कहा जा रहा है कि औद्योगिक इकाइयों की लंबी बंदी से उद्यमियों के कारोबार में बड़ा नुकसान होगा। इसी वजह से बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की गई है।