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स्नेहामृत समारोह: भाव भंगिमा से सीता हरण के दृश्य को दर्शाया तो तालियों से गूंज उठा हॉल
Wed, 16 Oct 2024 12:30 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 16 Oct 2024 12:30 AM IST
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स्नेहामृत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
कथक के जरिए रामायण के सीता हरण का दृश्य चेहरे की भाव भंगिमा से दर्शाया तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौका था कानपुर संगीतज्ञ परिवार की ओर से मोतीझील स्थित लाजपत भवन में आयोजित शास्त्रीय संगीत का, जहां कथक नर्तक विशाल कृष्ण मिश्रा ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरूआत पं बलवंत भाऊ शास्त्री पटवर्धन ने सामवेद मंगलाचारण से की। गोल्डन गर्ल स्नेहा चौरसिया की स्मृति में आयोजित स्नेहामृत समारोह में बांसुरी वादक पद्मविभूषण पं हरिप्रसाद चौरसिया मुख्य अतिथि रहे। पं शंकर लाल भट्ट को सभी ने श्रद्धांजलि दी और उनके द्वारा रचित सरस्वती वंदना को दीपिका शुक्ला ने अपना स्वरों से सजाया, तबले पर हरीश झा और वॉयलिन पर संगत देवानंद पाठक ने की। इसके बाद कलाकारों ने सरोद वादन, तबला और कथक की प्रस्तुतियां दीं।
मुंबई से आए सरोद वादक प्रतीक श्रीवास्तव ने अपने सुमधुर सरोद वादन से दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने रागेश्री बजाया और तबले पर संगत पं हरीश कुमार झा ने की, इसमें मसीत खानीगत, रजा खानीगत राग बजाया। मनमोहक धुन पर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। दूसरी प्रस्तुति कथक नर्तक विशाल कृष्ण मिश्रा ने शंकर महादेव देव...पर शिव स्तुति कर दी। उसके बाद तीन ताल पर निबद्ध, जिसके अंतर्गत तिहाइयां, तोड़, परण की पारंपरिक कथक में प्रस्तुति दी तो हर कोई वाह, वाह कह उठा । विशाल ने रामायण के दो प्रसंग सीता हरण और जटायु मोक्षम का प्रस्तुतिकरण भाव भंगिमा के जरिए दिया, जिसमें सीता और रावण के अलग अलग भंगिमाओं को चेहरे पर प्रदर्शित किया तो लोग एकटक देखते रहे। इस मौके पर संयोजक अमित शंकर भट्ट, अनुज कुमार, किशन चौरसिया बउआ, अनिल चौरसिया, गोविंद चौरसिया, शिशिर चौरसिया, आशीष गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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मैं सोचता हूं कि मेरा जन्म कानपुर में क्यों नहीं हुआ : हरिप्रसाद
बांसुरीवादक हरिप्रसाद चौरसिया का स्वागत फूलों से किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि, यहां इतने सारे कलाप्रेमियों को देखकर मुझे लगता है कि, मैं कानपुर में पैदा क्यों नहीं हुआ। यहां की कला का भी मैं सम्मान करता हूं और कलाकारों व कलाप्रेमियों से ये गुजारिश करता हूं कि वे इसी परंपरा को आगे बढ़ाएं। ताकि आगे आने वाली पीढ़ी कला के महत्व को समझ सके। उन्होंने कहा कि मैं कभी बोलता नहीं हमेशा बांसुरी के जरिए ही बोलता रहा। आज यहां पर बोल रहा हूं तो अच्छा लग रहा है। उन्होंने पं शंकर लाल भट्ट को याद किया।
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कार्यक्रम की शुरूआत पं बलवंत भाऊ शास्त्री पटवर्धन ने सामवेद मंगलाचारण से की। गोल्डन गर्ल स्नेहा चौरसिया की स्मृति में आयोजित स्नेहामृत समारोह में बांसुरी वादक पद्मविभूषण पं हरिप्रसाद चौरसिया मुख्य अतिथि रहे। पं शंकर लाल भट्ट को सभी ने श्रद्धांजलि दी और उनके द्वारा रचित सरस्वती वंदना को दीपिका शुक्ला ने अपना स्वरों से सजाया, तबले पर हरीश झा और वॉयलिन पर संगत देवानंद पाठक ने की। इसके बाद कलाकारों ने सरोद वादन, तबला और कथक की प्रस्तुतियां दीं।
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मुंबई से आए सरोद वादक प्रतीक श्रीवास्तव ने अपने सुमधुर सरोद वादन से दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने रागेश्री बजाया और तबले पर संगत पं हरीश कुमार झा ने की, इसमें मसीत खानीगत, रजा खानीगत राग बजाया। मनमोहक धुन पर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। दूसरी प्रस्तुति कथक नर्तक विशाल कृष्ण मिश्रा ने शंकर महादेव देव...पर शिव स्तुति कर दी। उसके बाद तीन ताल पर निबद्ध, जिसके अंतर्गत तिहाइयां, तोड़, परण की पारंपरिक कथक में प्रस्तुति दी तो हर कोई वाह, वाह कह उठा । विशाल ने रामायण के दो प्रसंग सीता हरण और जटायु मोक्षम का प्रस्तुतिकरण भाव भंगिमा के जरिए दिया, जिसमें सीता और रावण के अलग अलग भंगिमाओं को चेहरे पर प्रदर्शित किया तो लोग एकटक देखते रहे। इस मौके पर संयोजक अमित शंकर भट्ट, अनुज कुमार, किशन चौरसिया बउआ, अनिल चौरसिया, गोविंद चौरसिया, शिशिर चौरसिया, आशीष गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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मैं सोचता हूं कि मेरा जन्म कानपुर में क्यों नहीं हुआ : हरिप्रसाद
बांसुरीवादक हरिप्रसाद चौरसिया का स्वागत फूलों से किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि, यहां इतने सारे कलाप्रेमियों को देखकर मुझे लगता है कि, मैं कानपुर में पैदा क्यों नहीं हुआ। यहां की कला का भी मैं सम्मान करता हूं और कलाकारों व कलाप्रेमियों से ये गुजारिश करता हूं कि वे इसी परंपरा को आगे बढ़ाएं। ताकि आगे आने वाली पीढ़ी कला के महत्व को समझ सके। उन्होंने कहा कि मैं कभी बोलता नहीं हमेशा बांसुरी के जरिए ही बोलता रहा। आज यहां पर बोल रहा हूं तो अच्छा लग रहा है। उन्होंने पं शंकर लाल भट्ट को याद किया।