Kanpur Jail: कैदियों का कौशल विकास प्रशिक्षण...आसानी से मिलेगा रोजगार, मोजा बनाने से लेकर सीख रहे हैं ये काम
Kanpur News: डीजी ने कहा कि जेल में मिलाई को लेकर सिस्टम कंप्यूटराइज्ड हुआ है ,मगर अभी पूरी तरह से शुरू नहीं हो सका है। कहा कि सॉफ्टवेयर बनने के बाद बहुत जल्द लोग घर बैठकर बंदी से मिलने का समय और दिन तय कर सकेंगे।
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कानपुर में डीजी जेल डीएन साबत ने जिला जेल निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया था कि देशभर की जेलों में चेस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता में कानपुर की जिला जेल के 70 बंदी प्रतिभा दिखाएंगे। इंडियन ऑयल के प्रयासों से यह प्रतियोगिता कराई जा रही है।
लगभग तक तीन घंटे तक निरीक्षण कर डीजी ने बंदियों से बात की। जेल में बैरकों, स्नानगृह, शौचालय, रसोई, अस्पताल, महिला बैरक आदि स्थानों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि मानवाधिकार आयोग की जो गाइडलाइन को उन्होंने जेल में परखा है।
बंदी बना रहे हैं मोजे, डिजाइन कर रहे हैं कपड़े
बताया कि जेल में मिलाई को लेकर सिस्टम कंप्यूटराइज्ड हुआ है ,मगर अभी पूरी तरह से शुरू नहीं हो सका है। कहा कि सॉफ्टवेयर बनने के बाद बहुत जल्द लोग घर बैठकर बंदी से मिलने का समय और दिन तय कर सकेंगे। बताया कि यहां बंदी मोजे बना रहे हैं। बुटीक का कोर्स कर कपड़े डिजाइन कर रहे हैं।
जेल के एफएम में राष्ट्रभक्ति का कार्यक्रम
डीजी ने कहा कि जेल का अपना एफएम चैनल शुरू हो चुका है। इसमें एक बंदी ही रेडियो जॉकी की भूमिका में रहता है। उसमें देश के महापुरुषों की जीवनी के बारे में जानकारी दी जाती है और देशभक्ति के गाने बजाए जाते हैं।
लगभग 2800 कैदियों को प्रशिक्षण
जेल अधीक्षक बीडी पांडेय ने बताया कि कानपुर जेल में लगभग 2800 कैदी बंद हैं। इनमें ऐसे कैदी हैं, जिनके अंदर कई प्रतिभाएं हैं। अब कैदियों की प्रतिभा निखारने को जेल के अंदर कई काम किए जा रहे हैं। इसमें उनके भीतर एक अलग तरह का आत्मविश्वास पैदा होने के साथ ही नजरिया भी बदल रहा है।