पॉलिटेक्निक में रैगिंग से डिप्रेशन का माहौल, अभिषेक की मौत का मामला गहराया, 20 की तबीयत खराब
- सिर मुंडवाया इस कारण दिवाली में घर नहीं गया था अभिषेक
- साथी छात्रों ने बताया सीनियरों के सिर मुंडवाए जाने के बाद से गुमसुम भी था
- दहशत में जी रहे पॉलिटेक्निक के जूनियर छात्र
- छात्रों के मुताबिक अभिषेक की मौत के बाद बढ़ गया है सीनियरों का कहर
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कानपुर जीटी रोड स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक प्रशासन भले ही रैगिंग से इनकार करता रहे लेकिन आलम यह है कि रैगिंग से डिप्रेशन में आए छात्रों की तबीयत खराब होने लगी है। करीब 20 छात्र बुखार और सिरदर्द की समस्या से जूझ रहे हैं। छात्रों के मुताबिक अभिषेक शर्मा की मौत के बाद से सीनियरों का कहर और बढ़ गया है। सीनियरों को डर है कि जूनियर उनकी शिकायत न कर दें। जूनियर छात्रों के मुताबिक मंगलवार को भी उन्हें डराया धमकाया गया।
छात्रों ने बताया कि तबीयत खराब होने की शिकायत उन लोगों ने कॉलेज प्रशासन से की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। छात्र बाहर से दवाएं मंगाकर खा रहे हैं। हालांकि प्रिंसिपल आरके सिंह ने कैंपस में रैगिंग की बात को पूरी तरह से खारिज किया है। उनका कहना है कि छात्र अभिषेक शर्मा की आत्महत्या मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय जांच कमेटी बनी है। जांच शुरू हो चुकी है और दो दिन में रिपोर्ट भी मिल जाएगी। रिपोर्ट में अगर रैगिंग की बात सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विश नहीं करने पर बेल्ट से पीटते हैं
जूनियरों के मुताबिक सीनियर इतना प्रताड़ित करते हैं कि उनके सामने सिर उठाकर चलने की भी इजाजत नहीं है। छात्रों के सिर मुंडवा दिए हैं। गुड मार्निंग, गुड ईवनिंग, गुड ऑफ्टरनून विश न करने पर बेल्ट से पिटाई की जाती है। कपड़े तक उतरवा देते हैं।
सीनियरों को नहीं किसी का डर
कुछ जूनियर छात्र बताते हैं कि सीनियरों को किसी का डर नहीं है। न तो शिक्षक से डरते हैं और न ही प्रिंसिपल से। बेरोकटोक हॉस्टल में घुसते हैं। कभी भी किसी के कमरे में चले जाते हैं। कोई रोकता है तो उससे मारपीट तक कर डालते हैं।
सिर मुंडवाया इस कारण दिवाली में घर नहीं गया था अभिषेक
कानपुर राजकीय पॉलिटेक्निक में सीनियरों द्वारा सिर मुंडवाए जाने के कारण आत्महत्या करने वाला जूनियर छात्र अभिषेक शर्मा दिवाली में अपने घर नहीं गया। साथी छात्रों के मुताबिक उसे लगता था कि घर और मोहल्ले में सब पूछेंगे कि सिर क्यों मुंडवाया तो वह क्या जवाब देगा। इसके बाद से वह गुमसुम भी रहने लगा था। दिवाली की छुट्टी में उसने हॉस्टल में ही रहने के लिए वार्डन से अनुमति मांगी थी, नहीं मिलने पर देवरिया में रहने वाले अपने दोस्त के घर चला गया था। वहां आठ दिन रुका लेकिन दोस्त के घर से 20 किलोमीटर दूर अपने घर (रामपुरखाना) नहीं गया। एक छात्र ने यह भी बताया कि उसने आत्महत्या से कुछ दिन पहले ही मां को फोन कर बताया था कि उसका यहां मन नहीं लग रहा है।
दो घंटे में ऐसे क्या हुआ कि इतना बड़ा कदम उठाया
सर, आंखों के सामने आता है उसका चेहरा
अभिषेक के साथ हॉस्टल में रहने वाले छात्र बड़े दुखी नजर आए। मन बदलने के लिए कुछ साथी छात्र कैंपस में टहलने लगे तो एक शिक्षक ने उन्हें हॉस्टल में जाने को कहा। इस पर छात्रों ने कहा कि सर, हॉस्टल जाते हैं तो उसका चेहरा सामने आ जाता है। पढ़ाई में भी मन नहीं लग रहा है। रात में तो बाथरूम जाने में भी डर लगता है।
पीने को स्वच्छ पानी भी नहीं