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शहर विच आ गए और छा गए सिख
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 20 Dec 2017 10:43 PM IST
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गुरु ग्रंथ साहिब जी
किसी भी सभ्यता को रंग-रूप-पहचान देने में समाज का योगदान सर्वाधिक होता है। समाज ही सभ्यता और शहर को संवारता-आगे बढ़ाता है जिसकी छाप देश-दुनिया पर पड़ती है। कानपुर को भी पहचान देने में कई समाजों का योगदान रहा है। आज हम बात कर रहे हैं सिख समाज की। शहर को व्यापारिक पहचान देने का श्रेय मुख्य रूप से सिख समाज को जाता है। मशीनरी, लोहा, ट्रासंपोर्ट का कारोबार सबसे पहले सिखों ने कानपुर में शुरू किया। इसकेअलावा शहर में लंगर का आयोजन पहली बार सिखों ने ही शुरू किया था।
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मशीनरी, लोहा, ट्रांसपोर्ट का कारोबार दिया, शहर को जीवंतता की पहचान दी
गुरुद्वारा
आज से करीब 94 साल पहले सिंह इंजीनियरिंग वर्क्स के सरदार इंदर सिंह 1923 में शहर आए थे। उन्होंने जरीब चौकी पर सबसे पहले सिंह इंजीनियरिंग वर्क्स नाम से इकाई लगाई। इसके बाद समाज के लोगों को कानपुर बुलाया और अपने साथ काम पर लगाया। कुछ ही वर्षों बाद तेजा सिंह, हर विलास राय और सरदार करतार सिंह सोनी पहुंचे। तेजा सिंह और हर विलास राय ने 1927 में श्रीगुरु सिंह सभा की स्थापना की और पहले संस्थापक बने सरदार इंदर सिंह। कुछ ही साल बाद संत सुंदर सिंह और संत बाबा मोहन सिंह आए थे। इन लोगों ने 1937 में गुरु नानक इंटर कॉलेज की नींव रखी ताकि शहर के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। साथ ही, लाटूश रोड गुरुद्वारे की स्थापना की। ताकि सिख समाज का भी अपना गुरुद्वारा हो और जहां वे अरदास कर सकेंगे। इसी के साथ शहर में शुरू हुई लंगर की प्रथा। पहला लंगर प्रकाश पर्व पर शुरू हुआ और इसके बाद यह सिलसिला आज भी तेज गति से चल रहा है। 1947 में भारत-पाक बंटवारे के बाद बड़ी संख्या में सिख कानपुर शहर आए और बस गए। धीरे-धीरे समाज के लोग बढ़ते गए और व्यवसाय को भी बढ़ाते गए। समाज के लोगों ने मशीनरी, ट्रांसपोर्ट, लोहा और कपड़ा की इकाई स्थापित कीं।
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1923 में पहले सिख इंदरजीत सिंह शहर आए, सिंह इंजीनियरिंग की नींव रखी
सिख समाज के लाेग
श्रीगुरु सिंह सभा लाटूश रोड के प्रधान हरविंदर सिंह लार्ड ने बताया कि आज शहर में समाज का बड़ा दायरा है। करीब दो लाख सिख समाज के लोग हैं। शहर में 50 गुरुद्वारों और जत्थे-बंदियों के अलावा अनेक धर्मशाला हैं। समाज के लोग बढ़चढ़कर शहरवासियों के दुख-सुख में शामिल होते हैं। आज शहर में सिख अपनी आन, बान और शान के अलावा प्रेम के लिए भी जाना जाता है। कई ऐसे मौके आए जब सिख समाज के लोगों ने बढ़चढ़कर अपनी जिम्मेदारी संभाली। कहा, ‘आज हमें फर्क है कि हम कानपुर में रहते हैं और यह शहर हमारा है’।
समाज के लोग राजनीति में भी आए
सरदार इंदर सिंह, राज्यसभा सदस्य और महापौर रहे
सरदार महेंद्र सिंह, महापौर रहे
सरदार कुलदीप सिंह, एमएलसी रहे
समाज के पर्व
गुरु नानक महाराज का प्रकाश पर्व
गुरु गोविंद सिंह महाराज का प्रकाश पर्व
गुरु तेग बहादुर महाराज का शहीदी पर्व
बैसाखी पर्व अप्रैल में
लोहड़ी पर्व
समाज के लोग राजनीति में भी आए
सरदार इंदर सिंह, राज्यसभा सदस्य और महापौर रहे
सरदार महेंद्र सिंह, महापौर रहे
सरदार कुलदीप सिंह, एमएलसी रहे
समाज के पर्व
गुरु नानक महाराज का प्रकाश पर्व
गुरु गोविंद सिंह महाराज का प्रकाश पर्व
गुरु तेग बहादुर महाराज का शहीदी पर्व
बैसाखी पर्व अप्रैल में
लोहड़ी पर्व
शहर को सिख समाज की देन
गुरुद्वारा
शहर को सिख समाज की देन
गुरु नानक इंटर कॉलेज, कौशलपुरी
गुरु नानक डिग्री कॉलेज, कौशलपुरी
गुरु नानक बालक इंटर कॉलेज, नारायणपुरवा
गुरु नानक इंटर कॉलेज, लाटूश रोड
गुरुद्वारा लाटूश रोड, लाटूश रोड
गुरुद्वारा कीर्तनगढ़, गुमटी नंबर 5
गुरुनानक धर्मशाला, कौशलपुरी
जस्सा सिंह हॉल, आर्यनगर
सिख समाज के बड़े कारोबारी
सरदार इंदर सिंह, सिंह इंजीनियरिंग वर्क्स
अमर सिंह-महताब सिंह छतवाल, जगदीश रोलिंग मिल
सरदार मालिक सिंह, ट्रांसपोर्टर (अभिनेता सुनील दत्त भी काम करते थे)
हजूर सिंह, कपड़े वाले
सरदार संतोक सिंह अरोड़ा, कपड़े वाले
सरदार कृपाल सिंह, कपड़े वाले
सरदार वजूर सिंह, हरवंश सिंह भल्ला
स्याल परिवार, गन हाउस वाले
गुरु नानक इंटर कॉलेज, कौशलपुरी
गुरु नानक डिग्री कॉलेज, कौशलपुरी
गुरु नानक बालक इंटर कॉलेज, नारायणपुरवा
गुरु नानक इंटर कॉलेज, लाटूश रोड
गुरुद्वारा लाटूश रोड, लाटूश रोड
गुरुद्वारा कीर्तनगढ़, गुमटी नंबर 5
गुरुनानक धर्मशाला, कौशलपुरी
जस्सा सिंह हॉल, आर्यनगर
सिख समाज के बड़े कारोबारी
सरदार इंदर सिंह, सिंह इंजीनियरिंग वर्क्स
अमर सिंह-महताब सिंह छतवाल, जगदीश रोलिंग मिल
सरदार मालिक सिंह, ट्रांसपोर्टर (अभिनेता सुनील दत्त भी काम करते थे)
हजूर सिंह, कपड़े वाले
सरदार संतोक सिंह अरोड़ा, कपड़े वाले
सरदार कृपाल सिंह, कपड़े वाले
सरदार वजूर सिंह, हरवंश सिंह भल्ला
स्याल परिवार, गन हाउस वाले