पूर्व सहकारिता मंत्री शिवपाल सिंह यादव अपने गृह क्षेत्र इटावा में सहकारिता की कमान संभाले हुए हैं। वह किसी भी कीमत पर सहकारिता अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते हैं। यही वजह है कि इटावा के बाद औरैया में भी उन्होंने डेरा डाल दिया है।
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तो क्या 'शिवपाल की सहकारिता' पर मंडरा रहा है संकट?
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 18 Jan 2018 02:17 PM IST
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शिवपाल सिंह यादव
शिवपाल सिंह यादव
सहकारिता से जुड़े लोगों से मिलकर सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। सहकारिता चुनाव में कौन कहां से प्रत्याशी बन रहा है, इस पर भी राय मशविरा किया।
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सहकारिता पर शिवपाल सिंह यादव की गहरी पैठ है। उनके बेटे आदित्य यादव पीसीएफ चेयरमैन हैं तो पत्नी अध्यक्ष। निदेशक मंडल में भी ये शामिल हैं। ऐसे में सहकारिता चुनाव में वह पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं।
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बुधवार को उन्होंने औरैया के विभिन्न स्थानों पर जनसंपर्क किया। इस दौरान कहा कि जिले में खाद की किल्लत पैदा हो गई है। क्योंकि उप जिला सहकारी प्रबंधक विभागीय कामकाज छोड़कर सत्ता पक्ष के इशारे पर सहकारिता चुनाव पर फोकस कर रहे हैं।
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कमलेश पाठक के यहां जाकर चौंकाया
इस दौरान वह शहर भ्रमण करते हुए एमएलसी डा. कमलेश पाठक के यहां पहुंचे। हालांकि दोनों नेताओं में पिछले लगभग दो दशक से एक दल में रहने के बावजूद हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहा है। इस संबंध में दोनों नेताओं से बातचीत करने पर मुस्करा टाल गए।
इस दौरान वह शहर भ्रमण करते हुए एमएलसी डा. कमलेश पाठक के यहां पहुंचे। हालांकि दोनों नेताओं में पिछले लगभग दो दशक से एक दल में रहने के बावजूद हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहा है। इस संबंध में दोनों नेताओं से बातचीत करने पर मुस्करा टाल गए।