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Kanpur News: जांच में दोषी मिले आरटीओ के दोनों बाबू विपिन और मधुर निलंबित
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पुलिस और प्रशासन की जांच में सामने आई थी अनियमितताएं,
दोषी मिलने के बाद जांच टीम ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी, कार्यालय में मचा हड़कंप
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। आरटीओ कार्यालय में पुलिस और प्रशासन की छापेमारी और लंबी जांच के बाद शासन ने चार दिन बाद दोनों दोषी पाए गए बाबुओं विपिन और मधुर मिश्रा को निलंबित कर दिया है। जांच के दौरान विपिन बाबू के पास सात हजार रूपये और मधुर मिश्रा के पास 15 हजार रूपये का सही जवाब न दे पाने कारण जांच टीम ने काकदेव थाने मे प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। शासन मे रिपोर्ट पहुंचते ही अपर परिवहन आयुक्त चित्रलेखा सिंह ने दोनों बबुओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की करवाई कर दी है।
बीते सोमवार को एसडीएम सदर अनुभव सिंह और एडीसीपी अनिल सुधाकर रामटेके ने आरटीओ कार्यालय मे छापेमारी की थी। ड्रोन से परिसर और आसपास के इलाके की रेकी के बाद पुलिस ने घेराबंदी की तो कार्यालय के बाहर सक्रिय दलालों में भगदड़ मच गई थी । कई लोग बाउंड्री फांदकर भाग निकले, जबकि करीब 22 संदिग्धों को पुलिस ने पकड़ लिया था ।कार्रवाई के दौरान दोनों मुख्य गेट बंद करा दिए गए और परिसर में आने-जाने पर रोक लगा दी गई। बाहर सन्नाटा पसरा रहा, जबकि अंदर पुलिस की मौजूदगी में कर्मचारियों से घंटों पूछताछ चलती रही। जांच टीम ने रिकॉर्ड, कैश, चालान और कार्यालय से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की थी । इसी दौरान बाबू विपिन के काउंटर से सात हजार रूपये कम पाए गए थे ज़ब की रशीद ज्यादा की मिली थी। वंही मधुर मिश्रा की सीट पर 15 हजार रूपये ज्यादा मिले थे जिसका जाँच टीम को सही जवाब नहीं दे पाए थे। जांच में दोषी मिलने के बाद दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। टीम ने रिपोर्ट जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप को सौपी थी। उसी के आधार पर शासन ने अब दोनों को निलंबित कर दिया है।निलंबन की कार्रवाई से विभागीय कर्मचारियों में भी बेचैनी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि जांच का दायरा आगे बढ़ने पर अफसर और अन्य कर्मचारियों और निजी ऑपरेटरों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
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कैश और चालान के रिकॉर्ड पर उठे सवाल
जांच के दौरान कैश काउंटर, चालान और रसीदों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। एक काउंटर पर वसूली की रकम और रसीदों का मिलान कराया गया तो दूसरे स्थान पर मिले अतिरिक्त कैश का हिसाब मांगा गया। कर्मचारियों से रजिस्टर, दस्तावेज और नकदी का स्पष्ट विवरण लिया गया।
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किसी से रजिस्टर मांगा गया तो किसी से नकदी का हिसाब। कई घंटे तक दस्तावेजों और रकम का मिलान चलता रहा। इसी प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ियों ने मामले को गंभीर बना दिया और प्राथमिकी की कार्रवाई तक पहुंचाया।
सारथी भवन में भी हुई पड़ताल
आरटीओ कार्यालय के बाद टीम सारथी भवन पहुंची। यहां स्क्रूटनी का काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के काउंटर भी जांच के दायरे में आए थे । ऑपरेटरों से पूछताछ की गई और पहचान से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। कार्रवाई के चलते कुछ समय के लिए सारथी भवन का कामकाज भी प्रभावित रहा था ।
जाँच के दौरान 13 दलाल और दो बबुओं पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
करीब पांच घंटे तक चली कार्रवाई के बाद पुलिस पकड़े गए संदिग्ध 22 दलालों को काकादेव थाने ले गई। इसके बाद जांच टीम ने सभी से पूछताछ की थी जिसमें 13 को गिरफ्तार और दो बाबुओं समेत 15,के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। आरटीओ कार्यालय में हुई कार्रवाई ने दलालों और कर्मचारियों के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल दोनों बाबुओं के निलंबन को जांच की पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि प्राथमिकी और आगे की जांच में कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और विभागीय स्तर पर अगली गाज किस पर गिरती है।
वर्जन
शासन ने दोनों बाबुओं को सही जवाब न दे पाने पर निलंबित कर दिया है। दोनों कटी रसीद के अनुसार अपना जवाब नहीं दे पाए थे। शासन के अनुसार आगे की कार्रवाई होंगी।
अलोक कुमार, एआरटीओ प्रशासन