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शमसुद्दीन का पत्नी से तलाक नहीं हुआ, 13 साल पहले बेटियों को लेकर पाकिस्तान से लौट आईं थीं
Wed, 18 Nov 2020 04:06 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 18 Nov 2020 04:06 PM IST
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शमसुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
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शमसुद्दीन का उनकी पत्नी शाकिरा से तलाक नहीं हुआ है। किसी के कह देने पर लोग समझ रहे थे कि पति-पत्नी अलग हो गए हैं। लेकिन अब खुद शमसुद्दीन ने साफ कर दिया है। शमसुद्दीन ने अपने दोस्तों और मीडिया वालों को भी यह बात बताई।
अपनी पत्नी से इफ्तिखाराबाद जाकर मिले भी। शाकिरा 13 साल पहले अपनी बच्चियों को लेकर पाकिस्तान से आ गई थी। बेटियों को पाल-पोस कर बड़ा किया और शादी कर दी। अरसे से अपने शौहर के लौटने का इंतजार किया।
लेकिन उन्हें पक्षाघात (पैरालिसिस अटैक) हो गया है। अब जब वक्त खुशियां लेकर लौटा है तो बीमारी ने अपनी जकड़ सख्त कर दी। रविवार को लौटने के बाद जब शमसुद्दीन उनसे मिले तो आंखों से आंसू भर निकले। जुबान साफ नहीं थी। शमसुद्दीन की भी आंखें भर आईं। बेटियों ने पिता के बिना गुजारे दिनों की यादें साझा कीं। उनका कहना था कि लगता है कि सब कुछ जैसे नए सिरे से शुरू हो रहा हो।
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शमसुद्दीन के जेहन में कानपुर को ताजा किया असद ने
कंघी मोहाल के रहने वाले दोस्त असद सिद्दीकी ने शमसुद्दीन के जेहन में कानपुर को फिर ताजा किया। शमसुद्दीन जब लौटे तो शहर के मोहल्लों के नाम भूल चुके थे। शहर की बदली हुई सूरत में वे कंघी मोहाल के आसपास के मोहल्लों की निशानदेही भी नहीं कर पाए।
तलाक महल उन्हें याद नहीं हुआ। शमसुद्दीन के स्मृति पटल को मजबूत करनेे मेें असद सिद्दीकी ने मदद की। असद हालांकि दो-तीन साल शमसुद्दीन से उम्र मेें बड़े हैं लेकिन उनका रिश्ता दोस्ताना रहा है। असद ने अमृतसर से उन्हें यहां तक लाए जाने में भी मदद की है।
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अपनी पत्नी से इफ्तिखाराबाद जाकर मिले भी। शाकिरा 13 साल पहले अपनी बच्चियों को लेकर पाकिस्तान से आ गई थी। बेटियों को पाल-पोस कर बड़ा किया और शादी कर दी। अरसे से अपने शौहर के लौटने का इंतजार किया।
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लेकिन उन्हें पक्षाघात (पैरालिसिस अटैक) हो गया है। अब जब वक्त खुशियां लेकर लौटा है तो बीमारी ने अपनी जकड़ सख्त कर दी। रविवार को लौटने के बाद जब शमसुद्दीन उनसे मिले तो आंखों से आंसू भर निकले। जुबान साफ नहीं थी। शमसुद्दीन की भी आंखें भर आईं। बेटियों ने पिता के बिना गुजारे दिनों की यादें साझा कीं। उनका कहना था कि लगता है कि सब कुछ जैसे नए सिरे से शुरू हो रहा हो।
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शमसुद्दीन के जेहन में कानपुर को ताजा किया असद ने
कंघी मोहाल के रहने वाले दोस्त असद सिद्दीकी ने शमसुद्दीन के जेहन में कानपुर को फिर ताजा किया। शमसुद्दीन जब लौटे तो शहर के मोहल्लों के नाम भूल चुके थे। शहर की बदली हुई सूरत में वे कंघी मोहाल के आसपास के मोहल्लों की निशानदेही भी नहीं कर पाए।
तलाक महल उन्हें याद नहीं हुआ। शमसुद्दीन के स्मृति पटल को मजबूत करनेे मेें असद सिद्दीकी ने मदद की। असद हालांकि दो-तीन साल शमसुद्दीन से उम्र मेें बड़े हैं लेकिन उनका रिश्ता दोस्ताना रहा है। असद ने अमृतसर से उन्हें यहां तक लाए जाने में भी मदद की है।