Kanpur: 10 हजार लोगों को रोज आता है खुदकुशी का ख्याल, लंबे समय तक तनाव के कारण प्रभावित होता सेरोटोनिन केमिकल
डॉ. चौधरी ने बताया कि अगर किसी को आत्महत्या करने का विचार आ रहा है तो उसे तुरंत ‘साइकोलॉजिकल फर्स्ट ऐड’ लेनी चाहिए। विशेषज्ञ के अलावा भी उसे ऐसे शख्स से बात करनी चाहिए जो उसे अवसाद की स्थिति से बाहर निकाले।
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लगातार तनाव में रहने से आत्महत्या की प्रवृत्ति विकसित होने लगती है। आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी और डॉ. गणेश शंकर ने बताया कि एक लाख आबादी में दो सौ लोग रोज आत्महत्या के संबंध में सोचते हैं।
कानपुर की आबादी 50 लाख मानें तो 10 हजार लोगों को रोज आत्महत्या करनेे का ख्याल आता है। डॉ. चौधरी ने बताया कि अगर किसी को आत्महत्या करने का विचार आ रहा है तो उसे तुरंत ‘साइकोलॉजिकल फर्स्ट ऐड’ लेनी चाहिए। विशेषज्ञ के अलावा भी उसे ऐसे शख्स से बात करनी चाहिए जो उसे अवसाद की स्थिति से बाहर निकाले। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर शनिवार को मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञों ने प्रिंसिपल कमेटी रूम में पत्रकारों से बात की।
उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेस (एनआईएमएचएएनएस) के सर्वे के हवाले से बताया कि आत्महत्या के मामलों में 90 फीसदी मनोरोगी होते हैं। इनमें 80 फीसदी अवसाद, 10 फीसदी सीजोफ्रेनिया, पांच फीसदी डिमेंशिया और 25 फीसदी शराब के लती होते हैं। सबसे अधिक आत्महत्या फांसी लगाकर की जाती है। इसके बाद जहर का इस्तेमाल होता है। समय से साइकोलॉजिकल फर्स्ट ऐड और साइको थेरेपी से लोगों को बचाया जा सकता है। अगर किसी को ऐसा विचार आता है तो वह इस संबंध में बात जरूर करे। इसके साथ ही डॉक्टर को जाकर दिखाए। फर्स्ट ऐड कोई भी दे सकता है।