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स्कूलों की मनमानी, स्टूडेंटों की परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Apr 2016 12:57 AM IST
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इन दोनों कोर्स में प्रति कोर्स 70-70 सीटों के बैच भरे जाने हैं।
- फोटो : Demo pic
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कानपुर। शहर के पब्लिक स्कूल मानव संसाधन विकास मंत्रालय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन (सीबीएसई) के नेशनल काउंसिल ऑफ एजूकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की किताबें पढ़ाने का आदेश हवा में उड़ा रहे हैं। धड़ल्ले से निजी प्रकाशकों और लेखकों की किताबें पढ़ा रहे हैं। इससे स्टूडेंट, उनके माता-पिता और अभिभावक परेशान हैं। इसी का नतीजा है कि तमाम अभिभावकों ने शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ को फोन करके दर्द बयां किया। अभिभावकोें से जो बात हुई है, वह रिकार्डेड है।
सीबीएसई ने एनसीईआरटी की किताबें न पढ़ाने पर मान्यता वापस लेने की धमकी दी है, फिर भी पब्लिक स्कूल संचालक मनमानी पर उतारू हैं। एक अभिभावक का कहना है कि पूर्ण चंद्र विद्या निकेतन में आरडी शर्मा की मैथमेटिक्स की किताब पढ़ाई जाती है। कक्षा नौ, दस, ग्यारह और 12वीं के स्टूडेंटों का एग्जाम भी इसी से लिया जाता है। इस कारण स्टूडेंटों की बोर्ड एग्जाम और प्रतियोगी परीक्षा (जेईई मेन, जेईई एडवांस या फिर एआईपीएमटी) की तैयारी नहीं हो पाती है, क्योेंकि ज्यादातर क्वेश्चन एनसीईआरटी की किताबों से पूछे जाते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय पब्लिक स्कूल के कक्षा 11वीं के छात्र ने कहा कि एसएल अरोड़ा, बालाजी और एमपी साहनी की निजी किताबें पढ़ने का दबाव डाला जाता है। फातिमा कांवेंट स्कूल की कक्षा 7 की छात्रा ने कहा कि ज्यादातर किताबें गुमटी प्लाजा स्थित बुक शॉप से मंगाई जाती हैं। एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताब पढ़ाने पर जोर है। कंप्यूटर की जो किताब सस्ती मिलती है, वही पोर्डवा पब्लिकेशन की 300 रुपये से ज्यादा के दाम पर बेची जा रही है। ज्यादातर किताबें बाहरी हैं। आक्सफोर्ड मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भी फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलोजी और अंग्रेजी की किताबें बाहरी लेखक, प्रकाशकों की मंगाई जा रही हैं। बीएसएस की कॉपी, किताबें बंश ट्रेडिंग से खरीदने का
दबाव है। एक अभिभावक ने बताया कि कॉपी खरीदने की स्थिति में ही किताबें दी जाती हैं। कॉपी काफी महंगी है। एनसीईआरटी की किताब पढ़ाने पर फोकस नहीं रहता है। सुघर सिंह एकेडमी और केडीएमए बर्रा में भी सीबीएसई के आदेश की अनदेखी की जा रही है।
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सरकारी किताबें नदारद, निजी प्रकाशकों की चांदी
नई दिल्ली। स्कूल खुल गए हैं। पढ़ाई भी शुरू हो गई है मगर हमेशा की तरह किताबें बाजार से नदारद हैं। पढ़ने वालों की मजबूरी है कि सस्ती सरकारी किताबें बाजार में आने का इंतजार करने के बजाय वे निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदें। हालांकि अधिकृत प्रकाशकों की किताबों के मुकाबले ये कई गुना महंगी हैं। अधिकृत प्रकाशकों की किताबों की अधिकतम कीमत 70 रुपये है, जबकि निजी प्रकाशकों की वही किताबें 150 से 170 रुपये की हैं। तमाम प्रशासनिक दावों के उलट नए सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों को किताबों का यह संकट झेलना ही पड़ता है, चाहे यूपी बोर्ड हो या सीबीएसई। यूपी बोर्ड की किताबों की छपाई के लिए प्रकाशकों से आवेदन मांगने और उन्हें अधिकृत करने की प्रक्रिया ही अभी पूरी नहीं हो सकी है। सीबीएसई के स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई की अनिवार्यता है मगर इन स्कूलों में रेफरेंस बुक के नाम पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदवाने का चलन है। दिल्ली के स्कूलों में नया सत्र शुरू हुए बीस दिन हो चुके हैं। दसवीं की इतिहास, भूगोल व संस्कृत की किताबें, नौवीं की इतिहास की और पांचवीं की गणित की किताबें ढूंढे नहीं मिल रही हैं। एनसीईआरटी की कुछ विषयों की किताबें भी गायब हैं।
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सीबीएसई ने एनसीईआरटी की किताबें न पढ़ाने पर मान्यता वापस लेने की धमकी दी है, फिर भी पब्लिक स्कूल संचालक मनमानी पर उतारू हैं। एक अभिभावक का कहना है कि पूर्ण चंद्र विद्या निकेतन में आरडी शर्मा की मैथमेटिक्स की किताब पढ़ाई जाती है। कक्षा नौ, दस, ग्यारह और 12वीं के स्टूडेंटों का एग्जाम भी इसी से लिया जाता है। इस कारण स्टूडेंटों की बोर्ड एग्जाम और प्रतियोगी परीक्षा (जेईई मेन, जेईई एडवांस या फिर एआईपीएमटी) की तैयारी नहीं हो पाती है, क्योेंकि ज्यादातर क्वेश्चन एनसीईआरटी की किताबों से पूछे जाते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय पब्लिक स्कूल के कक्षा 11वीं के छात्र ने कहा कि एसएल अरोड़ा, बालाजी और एमपी साहनी की निजी किताबें पढ़ने का दबाव डाला जाता है। फातिमा कांवेंट स्कूल की कक्षा 7 की छात्रा ने कहा कि ज्यादातर किताबें गुमटी प्लाजा स्थित बुक शॉप से मंगाई जाती हैं। एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताब पढ़ाने पर जोर है। कंप्यूटर की जो किताब सस्ती मिलती है, वही पोर्डवा पब्लिकेशन की 300 रुपये से ज्यादा के दाम पर बेची जा रही है। ज्यादातर किताबें बाहरी हैं। आक्सफोर्ड मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भी फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलोजी और अंग्रेजी की किताबें बाहरी लेखक, प्रकाशकों की मंगाई जा रही हैं। बीएसएस की कॉपी, किताबें बंश ट्रेडिंग से खरीदने का
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दबाव है। एक अभिभावक ने बताया कि कॉपी खरीदने की स्थिति में ही किताबें दी जाती हैं। कॉपी काफी महंगी है। एनसीईआरटी की किताब पढ़ाने पर फोकस नहीं रहता है। सुघर सिंह एकेडमी और केडीएमए बर्रा में भी सीबीएसई के आदेश की अनदेखी की जा रही है।
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सरकारी किताबें नदारद, निजी प्रकाशकों की चांदी
नई दिल्ली। स्कूल खुल गए हैं। पढ़ाई भी शुरू हो गई है मगर हमेशा की तरह किताबें बाजार से नदारद हैं। पढ़ने वालों की मजबूरी है कि सस्ती सरकारी किताबें बाजार में आने का इंतजार करने के बजाय वे निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदें। हालांकि अधिकृत प्रकाशकों की किताबों के मुकाबले ये कई गुना महंगी हैं। अधिकृत प्रकाशकों की किताबों की अधिकतम कीमत 70 रुपये है, जबकि निजी प्रकाशकों की वही किताबें 150 से 170 रुपये की हैं। तमाम प्रशासनिक दावों के उलट नए सत्र की शुरुआत में विद्यार्थियों को किताबों का यह संकट झेलना ही पड़ता है, चाहे यूपी बोर्ड हो या सीबीएसई। यूपी बोर्ड की किताबों की छपाई के लिए प्रकाशकों से आवेदन मांगने और उन्हें अधिकृत करने की प्रक्रिया ही अभी पूरी नहीं हो सकी है। सीबीएसई के स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई की अनिवार्यता है मगर इन स्कूलों में रेफरेंस बुक के नाम पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदवाने का चलन है। दिल्ली के स्कूलों में नया सत्र शुरू हुए बीस दिन हो चुके हैं। दसवीं की इतिहास, भूगोल व संस्कृत की किताबें, नौवीं की इतिहास की और पांचवीं की गणित की किताबें ढूंढे नहीं मिल रही हैं। एनसीईआरटी की कुछ विषयों की किताबें भी गायब हैं।