'शिक्षा के 64 भगवान' और उनके कलंकित करने वाले कारनामे, जिसने भी सुने उसके होश उड़ गए
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शिक्षा क्षेत्र में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है लेकिन इटावा जिले के 64 शिक्षकों ने कुछ ऐसे कारनामे किए हैं जिसे सुनने के बाद लोगों के होश फाख्ता हो गए हैं। इनमें इटावा की तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, नगर शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी के पटल सहायक के नाम शामिल हैं।
आर्थिक अपराध शाखा ने इटावा में हुए छात्रवृत्ति घोटाले में शुक्रवार को 20 अधिकारियों, 64 प्रधानाचार्य व प्रबंधकों समेत 154 लोगों पर दो एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर वर्ष 2008-09 में इटावा में हुए 14.61 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपियों के खिलाफ की गई है।
इस मामले में 6 मई 2010 को शासन ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को जांच सौंपी थी। ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच में पाया कि स्कूल प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों और अधिकारियों की मिली भगत से सरकारी धन का आपस में बंदरबांट कर लिया गया। जांच के दौरान सभी स्कूल संचालित पाए गए।
एफआईआर में इटावा में तैनात रहे तत्कालीन जिन अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में नामजद किया गया है उसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी इंद्रा सिंह, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी अजीत सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी जेपी राजपूत, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी सियाराम दोहरे, मोहम्मद अल्ताफ, रेखा श्रीवास्तव, नाथू राम दोहरे, बीएन सिंह, ब्रहमपाल सिंह वर्मा, बीएल गोस्वामी, साधव सिंह, ओपी सिंह, राम अवतार शुक्ला, राम मूर्ति सिंह चौहान, नरेश कुमार वर्मा, कैलाश नाथ कन्नौजिया, ओपी त्रिपाठी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पटल सहायक मोहम्मद उबैदुर्रहमान, नगर शिक्षा अधिकारी सरला वर्मा, जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी को नामजद किया गया है।