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संजीत यादव का परिवार न्याय के लिए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा तो पुलिस ने पिता और बहन को किया नजरबंद
Tue, 25 Aug 2020 01:19 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 25 Aug 2020 01:19 PM IST
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संजीत की बहन को ले जाती पुलिस
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के संजीत यादव अपहरण एवं हत्याकांड में पीड़ित परिवार न्याय के लिए आज फिर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए निकल पड़े। पीड़ित परिवार सरकार से अपनी मांगों को लेकर फिर से बर्रा-शास्त्री चौक पर अनिश्चितकाल धरना शुरु करने जा रहा था पर तभी पुलिस को खबर लग गई। इसकी जानकारी होते ही पुलिस ने सभी लोगों को हिरासत में लेकर नजरबंद कर दिया।
उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती, तब तक वो धरने पर रहेंगे। पीड़ित परिवार के मुखिया चमनलाल यादव के अनुसार उनकी सरकार तीन मांगें प्रमुख हैं
1- केस की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
2- दोषी पुलिसवालों पर हत्या का केस दर्ज कर उनको जेल भेजा जाए।
3- पीड़ित परिवार की बेटी को उसकी योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी दी जाए।
बता दें कि उत्तर प्रदेश के कानपुर में थाना बर्रा इलाके में संजीत हत्याकांड के 65 दिन हो गए हैं। पुलिस आरोपियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है लेकिन अभी भी संजीत का शव पुलिस के हाथ नहीं लगा। दूसरी तरफ संजीत के परिजन लगातार पुलिस की जांच पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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अभी कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए क्षेत्रीय लोगों के साथ संजीत के पिता, माता, बहन पैदल ही लखनऊ के लिए निकल पड़े थे। पुलिस ने रास्ते में इन्हें रोक समझा-बुझाकर घर वापस कर दिया था।
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उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती, तब तक वो धरने पर रहेंगे। पीड़ित परिवार के मुखिया चमनलाल यादव के अनुसार उनकी सरकार तीन मांगें प्रमुख हैं
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1- केस की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
2- दोषी पुलिसवालों पर हत्या का केस दर्ज कर उनको जेल भेजा जाए।
3- पीड़ित परिवार की बेटी को उसकी योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी दी जाए।
बता दें कि उत्तर प्रदेश के कानपुर में थाना बर्रा इलाके में संजीत हत्याकांड के 65 दिन हो गए हैं। पुलिस आरोपियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है लेकिन अभी भी संजीत का शव पुलिस के हाथ नहीं लगा। दूसरी तरफ संजीत के परिजन लगातार पुलिस की जांच पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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अभी कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए क्षेत्रीय लोगों के साथ संजीत के पिता, माता, बहन पैदल ही लखनऊ के लिए निकल पड़े थे। पुलिस ने रास्ते में इन्हें रोक समझा-बुझाकर घर वापस कर दिया था।