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Kanpur News: तीन माह में क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र की करनी होगी सैंपलिंग
Sun, 15 Feb 2026 12:59 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 15 Feb 2026 12:59 AM IST
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कानपुर देहात। खानचंद्रपुर व उसके आस-पास के क्षेत्र में क्रोमियम डंप होने से दूषित भूजल का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। खानचंद्रपुर, उमरन के बाद अब रनियां के वार्डों में लोगों के खून में क्रोमियम व फ्लोराइड पाया गया है। एनजीटी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग जांच में तेजी लाया है। विभाग को तीन माह में क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों से खून के सैंपल लेकर जांच करानी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग लोगों में लक्षण जांचने के लिए स्वास्थ्य शिविरों की संख्या बढ़ाएगा। वहीं, भारी तत्वों से प्रभावित क्षेत्रों में शिविर लगाकर लोगों की स्क्रीनिंग कभी की जाएगी।
खानचंद्रपुर-मटियामऊ मार्ग पर करीब 20 साल तक करीब 95000 मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप रहने से भूजल दूषित हो गया है। इसके बावजूद भी जिम्मेदारों की ओर से पानी में मिलने वाले भारी तत्वों के रोकथाम के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाने से इसका प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को आई रनियां के चार नए वार्डों से लिए गए 120 लोगों के नमूने की आई रिपोर्ट में दो लोगों में खतरनाक स्तर पर क्रोमियम पाया गया। जबकि शेष लोगों में मानक से आंशिक रूप से अधिक क्रोमियम पाया गया है। जबकि आठ लोगों में मानक से अधिक फ्लोराइड मिला है।
सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि भारी तत्वों से प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग है। एनजीटी की ओर से तीन माह के अंदर खानचंद्रपुर व इसके आस-पास के क्षेत्र में भारी तत्वों का स्तर पता करने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच करवाने निर्देश हैं। इसको लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अगले चरण में प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के रैंडम तरीके से जांच करवाने के लिए टीम गठित कर दी गई है।
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एक सप्ताह बाद करीब 120 लोगों के रक्त व पेशाब के नमूने लेकर जांच के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट लखनऊ व एम्स रायबरेली भेजे जाएंगे। वहीं प्रभावित क्षेत्र में भारी तत्वों से लोगों के स्वास्थ्य पर हो रहे असर की स्थिति पता करने के लिए प्रभावित क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति की स्क्रीनिंग की जाएगी। साथ ही जिन लोगों में मानक से अधिक क्रोमियम पाया गया है उनलोगों का लगातार फॉलोअप किया जाएगा। जिससे उन्हें भारी तत्वों से होने वाले खतरे से बचाया जा सके।
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मानक से अधिक मिल रहा क्रोमियम, फ्लोराइड
सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि एक स्वस्थ्य व्यक्ति में क्रोमियम 0.05 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से 1.4 माइक्रोग्राम प्रति लीटर क्रोमियम होना चाहिए। वहीं एक स्वस्थ्य व्यक्ति में 0.1 माइक्रोग्राम से लेकर 1 माइक्रोग्राम प्रति लीटर फ्लोराइड होना चाहिए। जबकि मर्करी की मात्रा 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए, लेकिन खानचंद्रपुर के आस-पास इन भारी तत्वों का प्रकोप अधिक है। ज्यादातर लोगों के शरीर में मानक से अधिक क्रोमियम पाया जा रहा है। जबकि कुछ लोगों में फ्लोराइड व मर्करी की मात्रा मानक से अधिक मिल रही है। फिलहाल सभी लोग स्वस्थ्य है उनमें किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण नहीं हैं।
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वर्जन
खानचंद्रपुर व इससे सटे क्षेत्र में मर्करी का प्रकोप अधिक नहीं है, कुछ ही लोगों मानक से अधिक मर्करी मिली है। सबसे ज्यादा लोगों में क्रोमियम की मात्रा अधिक पाई जा रही है। लोगों को इन भारी तत्वों से परेशानी न हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनजीटी की गाइड लाइन का पालन करते हुए काम किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र में सभी की जांच की जानी है। इसके लिए अगले चरण की टीम गठित की गई है। सभी की स्क्रीनिंग भी की जाएगी। जिससे लक्षण का पता लगाया जा सके। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ
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खानचंद्रपुर-मटियामऊ मार्ग पर करीब 20 साल तक करीब 95000 मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा डंप रहने से भूजल दूषित हो गया है। इसके बावजूद भी जिम्मेदारों की ओर से पानी में मिलने वाले भारी तत्वों के रोकथाम के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाने से इसका प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को आई रनियां के चार नए वार्डों से लिए गए 120 लोगों के नमूने की आई रिपोर्ट में दो लोगों में खतरनाक स्तर पर क्रोमियम पाया गया। जबकि शेष लोगों में मानक से आंशिक रूप से अधिक क्रोमियम पाया गया है। जबकि आठ लोगों में मानक से अधिक फ्लोराइड मिला है।
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सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि भारी तत्वों से प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग है। एनजीटी की ओर से तीन माह के अंदर खानचंद्रपुर व इसके आस-पास के क्षेत्र में भारी तत्वों का स्तर पता करने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच करवाने निर्देश हैं। इसको लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अगले चरण में प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के रैंडम तरीके से जांच करवाने के लिए टीम गठित कर दी गई है।
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एक सप्ताह बाद करीब 120 लोगों के रक्त व पेशाब के नमूने लेकर जांच के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट लखनऊ व एम्स रायबरेली भेजे जाएंगे। वहीं प्रभावित क्षेत्र में भारी तत्वों से लोगों के स्वास्थ्य पर हो रहे असर की स्थिति पता करने के लिए प्रभावित क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति की स्क्रीनिंग की जाएगी। साथ ही जिन लोगों में मानक से अधिक क्रोमियम पाया गया है उनलोगों का लगातार फॉलोअप किया जाएगा। जिससे उन्हें भारी तत्वों से होने वाले खतरे से बचाया जा सके।
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मानक से अधिक मिल रहा क्रोमियम, फ्लोराइड
सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि एक स्वस्थ्य व्यक्ति में क्रोमियम 0.05 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से 1.4 माइक्रोग्राम प्रति लीटर क्रोमियम होना चाहिए। वहीं एक स्वस्थ्य व्यक्ति में 0.1 माइक्रोग्राम से लेकर 1 माइक्रोग्राम प्रति लीटर फ्लोराइड होना चाहिए। जबकि मर्करी की मात्रा 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए, लेकिन खानचंद्रपुर के आस-पास इन भारी तत्वों का प्रकोप अधिक है। ज्यादातर लोगों के शरीर में मानक से अधिक क्रोमियम पाया जा रहा है। जबकि कुछ लोगों में फ्लोराइड व मर्करी की मात्रा मानक से अधिक मिल रही है। फिलहाल सभी लोग स्वस्थ्य है उनमें किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण नहीं हैं।
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वर्जन
खानचंद्रपुर व इससे सटे क्षेत्र में मर्करी का प्रकोप अधिक नहीं है, कुछ ही लोगों मानक से अधिक मर्करी मिली है। सबसे ज्यादा लोगों में क्रोमियम की मात्रा अधिक पाई जा रही है। लोगों को इन भारी तत्वों से परेशानी न हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनजीटी की गाइड लाइन का पालन करते हुए काम किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र में सभी की जांच की जानी है। इसके लिए अगले चरण की टीम गठित की गई है। सभी की स्क्रीनिंग भी की जाएगी। जिससे लक्षण का पता लगाया जा सके। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ