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यूक्रेन में फंसे कानपुर के प्रशांत की जुबानी: हाथों में तिरंगा देख रूसी सैनिकों ने सैल्यूट किया और चले गए

Sun, 27 Feb 2022 03:53 PM IST
शिखा पांडेय प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 27 Feb 2022 03:53 PM IST
सार

प्रशांत ने बताया कि गुरुवार रात हॉस्टल के ऊपर से कई लड़ाकू विमान सायरन बजाते गुजरे तो पूरे हॉस्टल में दहशत का माहौल फैल गया। प्रबंधन ने हॉस्टल की सभी लाइट बंद करवा दीं।

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Russia Ukraine war: student of kanpur up stuck in ukraine
यूक्रेन में फंसे प्रशांत सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरे साथ ही सैकड़ों छात्र रोमानिया की ओर बढ़ रहे थे, तभी रूसी सैनिक वहां से गुजरे। उन्हें देखकर एक बार तो हम लोग दहशत में आ गए। लेकिन सैनिकों ने हमारे हाथों में तिरंगा देखा और उसे सैल्यूट कर आगे बढ़ गए।
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यूक्रेन में फंसे कानपुर के श्यामनगर पीएसी कैंपस निवासी प्रशांत सिंह ने जब यह वाकया अपने पिता को सुनाया तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। साथ ही अब वे पूरी तरह से आश्वस्त भी नजर आ रहे कि तिरंगे की शरण में उनका बेटा सकुशल स्वदेश लौटेगा। 
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प्रशांत के पिता नाहर सिंह पीएसी में हैं। नाहर सिंह ने बताया कि उनका बेटा यूक्रेन की टर्नोपिल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस सेकेंड ईयर का छात्र है। प्रशांत ने उन्हें बताया कि गुरुवार रात हॉस्टल के ऊपर से कई लड़ाकू विमान सायरन बजाते गुजरे तो पूरे हॉस्टल में दहशत का माहौल फैल गया।
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प्रबंधन ने हॉस्टल की सभी लाइट बंद करवा दीं। शनिवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुबह 9:30 बजे (भारतीय समय के अनुसार दोपहर दो बजे) प्रशांत समेत सभी छात्रों को बसों में बैठाकर रोमानिया देश की सीमा से करीब आठ किमी दूर छुड़वा दिया।

नाहर सिंह के अनुसार प्रशांत ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से सभी बसों पर भारत के तिरंगे लगाए गए। सभी छात्र यूक्रेन के समयानुसार शाम छह बजे बस से उतरे और हाथों में तिरंगा लेकर रोमानिया की ओर पैदल ही चल पड़े।

नाहर ने बाताय कि बेटे से फोन पर संपर्क में थे। हालांकि वहां नेटवर्क की समस्या है। व्हाट्एप के माध्यम से प्रशांत ने उन्हें आखिरी बार बताया था कि सैकड़ों छात्र पैदल करीब तीन किमी का सफर तय कर चुके हैं। 
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